उत्तर प्रदेश में सड़क नमाज पढ़ने की पाबंदी लगाई गई है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसे लॉ एंड ऑर्डर और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित रखने के लिए यह फैसला लिया है, लेकिन आगामी यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इसपर राजनीति शुरू हो गई है. खासकर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने इस प्रशासनिक फैसले को धार्मिक रंगे देने का प्रयास शुरू कर दिया है. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में अब कुछ ही महीने बचे हैं ऐसे में मुस्लिम परस्त राजनीति करने वाली AIMIM ने इस फैसले को धर्म से जोड़ दिया है और इस पार्टी के नेता लोगों को उकसाने वाले बयान देने शुरू कर दिए हैं.
सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर क्या बोले सीएम योगी?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमाजियों से कहा कि नमाज पढ़नी आवश्यक है तो शिफ्ट में पढि़ए, हम उसको नहीं रोकेंगे, लेकिन सड़क पर नमाज नहीं पढ़ने देंगे. योगी ने बकरीद से पहले कहा, ‘हम सड़कों पर अराजकता नहीं फैलने देंगे. प्यार से मानेंगे तो ठीक बात है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे.’ उन्होंने कहा कि ‘बाहर लोग पूछते हैं कि क्या यूपी में सड़कों पर नमाज नहीं होती, मैं कहता हूं कि कतई नहीं होती. जाकर देख लीजिए, नहीं होती है.’ उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘सड़कें चलने के लिए हैं, या कोई भी व्यक्ति आकर चौराहे पर तमाशा बना देगा. क्या अधिकार है उसको सड़क रोकने का और आवागमन बाधित करने का उसको कौन सा अधिकार है.’
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘जहां उनका स्थल होगा वहां जाकर नमाज पढ़ें. उन लोगों ने कहा कि कैसे होगा, हमारी संख्या ज्यादा है, क्या करें, तो हमने कहा कि शिफ्ट में पढ़ लो. नमाज पढ़नी आवश्यक है तो आप शिफ्ट में पढ़िए. हम उसको रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर नहीं पढ़ने देंगे.’
उन्होंने फिर दोहराया, ‘सड़क चलने के लिए है, आम नागरिक के लिए है, बीमार व्यक्ति के लिए है, एक कर्मचारी के लिए, एक सामान्य नागरिक के लिए, एक व्यापारी के लिए, हम सड़क को बाधित नहीं करने देंगे. सरकार का नियम सार्वभौम है जो सबके लिए समान रूप से लागू होता है.’
योगी के बयान पर AIMIM ने गोली खाने की कही बात
सड़कों पर नमाज पढ़ने की पाबंदी लगाए जाने के बाद AIMIM के नेता वारिस पठान ने कहा- ‘देखिए योगी बतौर मुख्यमंत्री पूरी तरह फेल हो चुके हैं. उन्होंने संविधान का शपथ लिया है, लेकिन आए दिन इस तरह के अनाप-शनाप बकवास करते हैं. कभी ठोक डालूंगा पॉलिसी की बात करते हैं. कभी कठमुल्लों वाली बात करेंगे. अरे आप कितनी नफरत फैलाएंगे. अब आपका क्या बयान है नमाज दो शिफ्ट, तीन शिफ्ट पढ़ें. एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं आप और किस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं.’
वारिस पठान ने आगे कहा- ‘किसी को रस्ते पर, बारिश में नमाज पढ़ने का शौक नहीं होता. मस्जिद में जगह नहीं होती है तो लोग पांच मिनट में सड़क पर नमाज पढ़ लेते हैं तो आपको तकलीफ हो रही है. अरे हमने तो कभी आपत्ति नहीं जताई. हिंदू भाई ट्रेनों में और एयरपोर्ट के अंदर भजन कीर्तन करते हैं. लेकिन आप इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं कि अगर नहीं माने तो हम अपने हिसाब से नियम पालन कराएंगे.’
AIMIM ने कहा कि क्या योगी सबको मार डालेंगे. क्या करेंगे, सबको गोली मार देंगे. इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए. मैं तो चाहूंगा कि देश के प्रधानमंत्री ये सब देखें सुनें कि आपके मुख्यमंत्री किस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. क्या यही है आपका ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास.’ उन्होंने आगे कहा कि मुसलमान जुम्मा के दिन पांच मिनट नमाज पढ़ लिया तो आपको परेशानी हो गई. जुम्मे की नमाज अपने जमात के बीच पढ़ा जाता है, इसलिए वह सड़कों पर पांच मिनट नमाज पढ़ लेता है. मुसलमान अगर रास्ते पर 5 मिनट जुमे की नमाज पढ़ लिया तो किसके पेट में दर्द होने लगा. कायदे कानून का पालन करते हुए किसी की आस्था को ठेस पहुंचाए बिना नमाज पढ़ते. किसी को तकलीफ नहीं होती है.
AIMIM नेता ने कहा, ‘आप नहीं करते हैं क्या? ये कांवड़ यात्रा निकालते हैं तो हम तो कभी आपत्ति नहीं उठाते हैं. संविधान समानता की बात करता है. इस देश में जितना अधिकार सीएम योगी का है, उतना ही अधिकार वारिस पठान का भी है. कानून सभी के ऊपर समान रूप से लागू होना चाहिए. मगर एक ही समुदाय को टारगेट करना और उसके खिलाफ नफरत करना सरासर गलत बात है. इस तरह की धमकी देना एक मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता है. हम चाहेंगे कि पीएम मोदी को इस पर संज्ञान लेना चाहिए.’
नमाज पढ़ने के लिए गोली खाने की क्या जरूरत?
यूपी के सीएम ने सड़क सुरक्षा के नियम को पालन कराने के लिए मस्जिद के अंदर नमाज पढ़ने की हिदायत दे रहे हैं तो AIMIM नेता गोली मारने और खाने की बात कर रहे हैं. सवाल उठता है कि भला नमाज पढ़ने के लिए गोली खाने की बात कहां से आ गई. सीएम योगी ने नमाज पढ़ने पर पाबंदी नहीं लगाई है. उन्होंने साफ शब्दों में मुस्लिमों के धार्मिक स्थानों के दायरे में रहकर नमाज पढ़ने की बात कही है. उदाहरण के तौर बिहार में छठ पूजा महापर्व है, गंगा नदी के घाटों पर ज्यादा भीड़ देखते हुए कई बार सरकारें लोगों से अपील करती रही है कि अगर संभव हो तो अपने घरों में ही भगवान सूर्य को अर्घ्य दें. ऐसे में अगर मुस्लिम समाज को धार्मिक स्थलों के अंदर नमाज पढ़ने के लिए कहा गया है तो इसमें गलत क्या है.
कल को अगर AIMIM ही सत्ता में आई तो क्या उनके लिए लॉ एंड ऑर्डर व्यवस्थित रखना और सड़कों पर सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना जिम्मेदारी नहीं होगी. महज सड़क सुरक्षा के नियम तोड़कर नमाज पढ़ना ये कैसी जिद्द है. कायदे से अगर AIMIM को लोकतंत्र में भरोसा है तो उन्हें खुद से आगे बढ़कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले का स्वागत करना चाहिए था. राजनीति करने के लिए आम लोगों से जुड़े कई और मुद्दें हैं, लेकिन लॉ एंड ऑर्डर और सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर आम लोगों को गोली खाने के लिए उकसाना कहां तक सही है.


