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M&M History : आल लग्जरी कारों से लेकर बैंकिंग और आईटी सेक्टर तक में धाक जमाने वाली महिंद्रा कंपनी की शुरुआत कभी सिर्फ स्टील बेचने के काम से हुई थी. तब इसके पाटर्नर एक पाकिस्तानी नागरिक भी थे और कंपनी का नाम महिंद्रा एंड मोहम्मद था. 1947 के बंटवारे के बाद कंपनी के दोनों पार्टनर भी अलग हो गए और इसका नाम भी बदल गया .
महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी की शुरुआत एक पाकिस्तानी पार्टनर के साथ हुई थी.
नई दिल्ली. आनंद महिंद्रा की अगुवाई वाली महिंद्रा एंड महिंद्रा यानी M&M कंपनी को तो हर कोई जानता है. लेकिन, क्या आपको यह पता है कि कभी इस कंपनी का पार्टनर एक पाकिस्तानी हुआ करता था और इसके नाम M&M में शामिल दूसरे M का मतलब महिंद्रा नहीं बल्कि मोहम्मद था. शायद नहीं, तो चलिए आज आपको इस कंपनी के बारे में कुछ ऐसी रोचक बातें बताते हैं, जिसे पढ़कर आपका मजा आ जाएगा. आज यह कंपनी 20 सेक्टर्स में काम करती है और इसकी बागडोर आनंद महिंद्रा के हाथ में है.
वैसे तो महिंद्रा कंपनी की स्थापना कैलाश चंद्र महिंद्रा और जगदीश चंद्र महिंद्रा ने की थी. कंपनी के साथ एक और पार्टनर थे गुलाम मोहम्मद. उनके नाम की वजह से ही कंपनी का पूरा नाम तब महिंद्रा एंड मोहम्मद था. साल 1947 में बंटवारे के बाद महिंद्रा तो भारत में रह गए लेकिन मोहम्मद पाकिस्तान चले गए और इसके साथ ही कंपनी के नाम में दूसरे M का मतलब भी बदल गया. कभी महिंद्रा एंड मोहम्मद के नाम जानी जाने वाली कंपनी आज महिंद्रा एंड महिंद्रा बन चुकी है. यह घटना बताती है कि आजादी के बाद हुए बंटवारे ने सिर्फ एक मुल्क को ही दो हिस्सों में नहीं बांटा, बल्कि एक कंपनी के भी दो हिस्से कर दिए.
कैसे हुई दोनों की साझेदारी
महिंद्रा की शुरुआत एक स्टील ट्रेड कंपनी के तौर पर हुई थी. साल 1945 में पंजाब के लुधियाना शहर के रहने वाले दो भाई कैलाश चंद्र महिंद्रा और जगदीश चंद्र महिंद्रा ने इस कंपनी को शुरू किया था. इन दोनों भाइयों के साथ कंपनी के पार्टनर थे गुलाम मोहम्मद. इसका मतलब है कि इस कंपनी को तीन लोगों ने शुरू किया था और इसका नाम महिंद्रा एंड मोहम्मद रखा गया था. महिंद्रा भाइयों ने कंपनी के नाम में मोहम्मद को भी इसलिए शामिल किया, ताकि उनके पार्टनर को इसमें बराबर का भागीदार होने का अहसास हो. हालांकि, कंपनी में हिस्सेदारी दोनों भाइयों के मुकाबले कम थी.
बिजनेस बंटा लेकिन बना रहा ब्रांड
साल 1947 के उस बंटवारे को भला कौन भूल सकता है, जो हजारों निर्दोषों की जान की कीमत पर पूरा हुआ था. इस बंटवारे ने हिंदुस्तान को एक और मुल्क पाकिस्तान में बांट दिया. इसके बाद गुलाम मोहम्मद पाकिस्तान चले गए और वहां देश के पहले वित्त मंत्री बने. साल 1951 में गुलाम मोहम्मद को गवर्नर जनरल भी बनाया गया, लेकिन उनके जाने से महिंद्रा कंपनी का एक पार्टनर भी अलग हो गया. ऐसे मुश्किल समय में कंपनी के सामने भी अपने नाम और ब्रांड को बनाए रखने की चुनौती थी. महिंद्रा ब्रदर्स के लिए कंपनी का नाम बदलना आसान नहीं था और तब उन्होंने दूसरे M का मतलब बदलकर मोहम्मद से महिंद्रा कर दिया.
आनंद महिंद्रा ने बताई थी तब की चुनौती
आनंद महिंद्रा ने काफी समय बाद खुद इस बारे में बात की थी. उन्होंने कहा था कि गुलाम मोहम्मद ने जब कंपनी छोड़ी तो इसके ज्यादातर डॉक्यूमेंट पर ‘एम एंड एम’ लिखा जा चुका था. इन सभी सामग्रियों को बर्बाद होने और कंपनी के नाम बदलने की झंझट से बचने के लिए इस शब्द को बनाए रखने का फैसला किया गया और पूरा नाम बदलकर महिंद्रा एंड महिंद्रा कर दिया गया. इस तरह M&M नाम भी बरकरार रहा और ब्रांड को इसी नाम से आगे बढ़ाया गया. विभाजन ने दोनों पार्टनर को भले ही अलग कर दिया हो, लेकिन गुलाम मोहम्मद के व्यक्तिगत संबंध महिंद्रा परिवार से हमेशा बने रहे. साल 1955 में भारत आकर उन्होंने सबसे पहले महिंद्रा परिवार को ही संपर्क किया.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें


