Horse Lover Ramashray Yadav Story: शौक बड़ी चीज है. जब शौक बचपन का हो तो उम्र की सीमा मायने नहीं रखती. बिहार के जहानाबाद जिले के गोविंदपुर गांव (मोदनगंज प्रखंड) के रहने वाले 60 वर्षीय किसान रामाश्रय यादव आज उन लोगों के लिए मिसाल हैं. जो महंगी गाड़ियों और भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागते हैं. रामाश्रय के लिए उनकी ‘लक्जरी कार’ उनका घोड़ा है. रामाश्रय को घुड़सवारी का शौक 15 साल की उम्र में लगा था. गरीबी के कारण कभी दूसरों के घोड़े पर सवारी की, लेकिन हार नहीं मानी. करीब 10 साल पहले उन्होंने अपना सपना पूरा किया और सोनपुर मेले से 1 लाख रुपये में अपना घोड़ा खरीदा. एक आम किसान होते हुए भी रामाश्रय अपने घोड़े की डाइट और मालिश पर रोजाना करीब 1000 रुपये खर्च करते हैं. वे कई घोड़ा दौड़ प्रतियोगिताओं (जैसे नालंदा के तेल्हारा) में बाजी भी मार चुके हैं. उनका कहना है कि जिंदगी में शौक कभी नहीं मारना चाहिए. आज जब मैं घोड़े पर सवार होता हूं, तो वह सुख किसी महंगी गाड़ी से कहीं अधिक है.


