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Theater Command News: भारत अपने डिफेंस स्ट्रक्चर को मौजूदा समय की जरूरतों के अनुरुप ढालने में जुटा है. इसमें पहला पड़ाव चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी CDS था, जिसका सफलतापूर्वक गठन किया जा चुका है. अब थिएटर कमांड के गठन की प्रक्रिया चल रही है. इसे मूर्त रूप देने के लिए जयपुर में आर्मी, एयरफोर्स और नेवी के टॉप कमांडर्स की अहम बैठक होने वाली है.
थिएटर कमांड के गठन को अंतिम रूप देने के लिए जयपुर में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के टॉप कमांडर्स की 7 और 8 मई 2026 को अहम बैठक होने वाली है. (फाइल फोटो)
रिपोर्ट: आकाश शर्मा
सूत्रों के अनुसार, इस सम्मेलन में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, संसाधनों के साझा उपयोग और भविष्य के युद्ध के लिए तैयारियों पर जोर दिया जाएगा. पिछले वर्षों में भी इस तरह की बैठकें होती रही हैं, लेकिन इस बार का एजेंडा अधिक व्यापक और रणनीतिक है. मुख्य फोकस इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड्स के मॉडल को अंतिम रूप देने और उससे जुड़े शेष मतभेदों को सुलझाने पर रहेगा. हाल ही में बेंगलुरु में आयोजित ‘रण संवाद’ सेमिनार में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने संकेत दिया था कि थिएटर कमांड से जुड़ी आंतरिक प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है. उन्होंने कहा था कि अब इस प्रस्ताव को रक्षा मंत्री और फिर कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के पास भेजा जाएगा. उनके मुताबिक, तीनों सेनाओं के बीच अधिकांश मुद्दों पर सहमति बना ली गई है. हालांकि, कुछ तकनीकी और कुछ अन्य मुद्दें से जुड़े मतभेद अभी भी बने हुए हैं.
थिएटर कमांड: किसके जिम्मे कौन सा क्षेत्र
थिएटर कमांड्स के प्रस्ताव के तहत चार स्टार रैंक के कमांडर नियुक्त किए जाने की सिफारिश है, जिन्हें सेवा प्रमुखों के बराबर दर्जा दिया जाएगा. शुरुआती चरण में तीन प्रमुख थिएटर कमांड बनाए जाने की योजना है. इनमें वेस्टर्न थिएटर कमांड (जो पाकिस्तान पर केंद्रित होगा) संभवतः एयरफोर्स के अधिकारी के नेतृत्व में रहेगा. उत्तरी थिएटर कमांड (जिसका फोकस चीन और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर होगा) सेना के अधिकारी के अधीन होगा. वहीं, समुद्री थिएटर कमांड (जो हिंद महासागर क्षेत्र में संचालन देखेगा) नौसेना के नेतृत्व में रहने की संभावना है.
और क्या प्रस्ताव?
प्रस्ताव में वाइस चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के सृजन और प्रत्येक थिएटर कमांड के लिए डिप्टी कमांडर्स नियुक्त करने की भी बात कही गई है. वर्तमान में भारत में कुल 17 अलग-अलग सिंगल सर्विस कमांड्स हैं – सेना और वायुसेना के 7-7 और नौसेना के तीन. थिएटर कमांड्स का उद्देश्य इन सभी को इंटीग्रेट कर एक संयुक्त सैन्य संरचना (Joint Military Structure) बनाना है, जिससे युद्ध के समय तीनों सेनाएं एक साथ, समन्वित तरीके से कार्रवाई कर सकें. इस कॉन्सेप्ट को सबसे पहले भारत के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने जोरदार तरीके से आगे बढ़ाया था. उन्होंने भविष्य के युद्धों के लिए थिएटर कमांड्स को अनिवार्य बताया था. हालांकि, उस समय वायु शक्ति के उपयोग और कमांड अथॉरिटी को लेकर तीनों सेनाओं के बीच कुछ मतभेद उभर आए थे, जिससे प्रक्रिया धीमी पड़ गई थी. लेकिन जनरल चौहान के नेतृत्व में इस दिशा में फिर से तेजी आई है और सहमति बनाने पर जोर दिया गया है.
अब किस बात का इंतजार?
इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने भी हाल ही में कहा था कि संयुक्त संरचनाओं और थिएटर कमांड्स पर काम 90 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है. अब अंतिम चरण में राजनीतिक मंजूरी का इंतजार है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस प्रस्ताव की समीक्षा कर सकते हैं और आवश्यक परामर्श के बाद इसे कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के पास भेजा जाएगा. यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो यह स्वतंत्रता के बाद भारतीय सशस्त्र बलों में सबसे बड़ा संरचनात्मक बदलाव होगा. ऐसे में जयपुर में होने वाली यह ज्वाइंट कमांडर्स कॉन्फ्रेंस बेहद अहम मानी जा रही है, जहां सैन्य नेतृत्व एकीकृत युद्धक ढांचे की दिशा में अगला कदम तय करेगा और भारत की रक्षा तैयारियों को नई दिशा देने की कोशिश करेगा.


