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यह प्राचीन कुआं चित्रकूट के मारकुंडी क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध मार्कंडेय आश्रम परिसर में बना हुआ है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस कुएं का निर्माण स्वयं महर्षि मार्कंडेय ने किया था, कहा जाता है कि सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने अपने कमंडल से इसमें जल भरकर इसे पवित्र बनाया था.इस कुएं की सबसे खास बात इसका पानी है, जो बेहद स्वच्छ और निर्मल दिखाई देता है.
चित्रकूटः देशभर में अलग अलग हिस्सों में कई कुएं देखे और उनके बारे में सुना भी होगा, लेकिन आज भी चित्रकूट जिले में एक ऐसा अनोखा कुआं मौजूद है, जो आज भी लोगों के लिए रहस्य और आस्था का केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि इस कुएं का पानी औषधीय गुणों से भरपूर है और इसे पीने से पेट से जुड़ी कई समस्याओं में लाभ मिलता है. यही वजह है कि स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भी यहां पहुंचकर इस कुएं का जल ग्रहण करते हैं और अपने साथ भी लेकर जाते हैं.
महर्षि मार्कंडेय ने किया था कुएं का निर्माण
आप को बता दे कि यह प्राचीन कुआं चित्रकूट के मारकुंडी क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध मार्कंडेय आश्रम परिसर में बना हुआ है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस कुएं का निर्माण स्वयं महर्षि मार्कंडेय ने किया था, कहा जाता है कि सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने अपने कमंडल से इसमें जल भरकर इसे पवित्र बनाया था.इस कुएं की सबसे खास बात इसका पानी है, जो बेहद स्वच्छ और निर्मल दिखाई देता है.आश्चर्य की बात यह भी है कि यह कुआं कभी सूखता नहीं है, पाठा में पड़ने वाली भीषण गर्मी के बाद भी इसमें पानी निकालने के लिए लंबी रस्सी या बाल्टी की भी जरूरत नहीं पड़ती,क्योंकि इसका जल स्तर हमेशा ऊपर बना रहता है.
प्रलय काल में भी समाप्त नहीं हुआ कुआं
वही मार्कंडेय आश्रम के पुजारी दयादास महाराज ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि इस कुएं का उल्लेख पद्म पुराण में भी मिलता है. उन्होंने बताया कि यह कुंड महर्षि मार्कंडेय ऋषि ने खुद बनाया था इसका संबंध प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है,धार्मिक मान्यता यह भी है कि प्रलय काल में भी यह कुंड और इसके आसपास के कुछ वृक्ष नष्ट नहीं होते.पुजारी के अनुसार इस कुंड ने कई बार प्रलय का सामना किया है और फिर भी यह आज तक सुरक्षित बना हुआ है.
उन्होंने आगे बताया कि इस कुएं का पानी पेट से संबंधित रोगों के लिए काफी लाभकारी माना जाता है, मान्यता है कि भोजन के बाद इस पानी को पीने से पाचन क्रिया बेहतर होती है और कुछ समय बाद फिर से भूख लगने लगती है.गर्मी के मौसम में जब आश्रम में भंडारे का आयोजन होता है, तब कुछ समय के लिए पानी का स्तर थोड़ा कम जरूर होता है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अगले ही दिन यह कुआं फिर से पूरी तरह भर जाता है.और आज भी लोगों के लिए यह एक रहस्यमई कुआं बना हुआ है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


