17.5 C
Munich

रणजी में नहीं हुआ सेलेक्शन तो पास किया UPSC, नक्सलियों के उड़ाए होश; IPS सीवी आनंद बने तेलंगाना के DGP

Must read


रमना कुमार पी.वी.

हैदराबाद. तेलंगाना सरकार ने आईपीएस अधिकारी सीवी आनंद को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया है. 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी आनंद वर्तमान में गृह विभाग के विशेष मुख्य सचिव हैं. मंगलवार को आनंद के तबादले और उन्हें पुलिस महानिदेशक के पद पर तैनात करने का एक सरकारी आदेश जारी किया गया. वह शिवधर रेड्डी की जगह लेंगे, जो 30 अप्रैल को सेवा से रिटायर हो रहे हैं. आनंद इससे पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के महानिदेशक के रूप में कार्य कर चुके हैं और दो बार हैदराबाद शहर के पुलिस आयुक्त का पद संभाल चुके हैं. उन्होंने साइबराबाद के आयुक्त के रूप में भी सेवा दी थी.

अधिकारी ने माओवाद से प्रभावित कई जिलों में काम किया और अपने नेतृत्व व सेवा के लिए पहचान बनाई. उन्हें 2002 में असाधारण बहादुरी के लिए राष्ट्रपति का वीरता पदक मिला. डीजीपी कार्यालय की ओर से जारी एक नोट के अनुसार, आनंद को मेट्रोपॉलिटन पुलिसिंग में 15 वर्षों का अनुभव है, जिसमें से 10 वर्ष उन्होंने अकेले हैदराबाद शहर में बिताए हैं. वहां उन्हें शहर की संस्कृति, रीति-रिवाजों और लोगों की गहरी समझ रखने वाले अधिकारी के तौर पर जाना जाता है. इस समझ ने उन्हें मुश्किल समय में और गणेश व बकरीद जैसे सभी त्योहारों के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने में मदद की.

5 जून 1968 को हैदराबाद में जन्मे आनंद, चमा दामोदर रेड्डी के पांच बेटों में से एक थे. चमा दामोदर रेड्डी भारतीय वन सेवा में ‘वन संरक्षक’ के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. हैदराबाद पब्लिक स्कूल के छात्र के तौर पर, उन्होंने पढ़ाई और खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया. उन्होंने हैदराबाद की यू-19 क्रिकेट टीम के लिए खेला और 1986 में इसी टीम के साथ इंग्लैंड का दौरा किया. साथ ही, उसी वर्ष उन्होंने 12वीं की आईएससी परीक्षा में अपनी कक्षा में प्रथम स्थान भी प्राप्त किया.

1989 में, उन्होंने निजाम कॉलेज से मैथ्स-इकोनॉमिक्स-स्टैटिस्टिक्स में अपना बीए पूरा किया और बाद में उस्मानिया यूनिवर्सिटी के आर्ट्स कॉलेज से एमए इकोनॉमिक्स किया. अंडर-22 क्रिकेट में हैदराबाद राज्य का प्रतिनिधित्व करने और रणजी ट्रॉफी में चयन से चूकने के बाद, आनंद ने 1990 में सिविल सेवा परीक्षा देने का फैसला किया.

साल 1991 में आईपीएस में उन्हें उनका गृह राज्य आवंटित किया गया. जिला प्रशिक्षण के लिए, उन्हें वारंगल जिला आवंटित किया गया और वारंगल ग्रामीण उप-मंडल में एएसपी के रूप में तैनात किया गया. उनकी सेवा के पहले नौ साल नक्सल-प्रभावित जिलों में बीते, जहां उन्होंने व्यक्तिगत रूप से बलों का नेतृत्व किया और गोलीबारी तथा मुठभेड़ों में हिस्सा लिया. आनंद ने 2000-2001 में कृष्णा जिले के अधीक्षक के रूप में भी कार्य किया. उन्हें 2001-2004 में हैदराबाद शहर के डीसीपी पूर्वी जोन और डीसीपी मध्य जोन के रूप में तैनात किया गया.

डीआईजी के रूप में पदोन्नति पर उन्हें सीआईडी ​​ईओडब्ल्यू में तैनात किया गया, जहां उनके विशेष प्रयासों के कारण उन्हें क्रुशी बैंक घोटाले के आरोपी वेंकटेश्वर राव (2004-2005) को प्रत्यर्पण के जरिए वापस लाने के लिए बैंकॉक जाने वाली टीम का नेतृत्व करने का अवसर मिला. उन्हें डीआईजी एलुरु रेंज (2006) के रूप में तैनात किया गया, जहां से उनका तबादला विजयवाड़ा के पुलिस आयुक्त (2007-2008) के रूप में कर दिया गया.

इसके बाद, उन्होंने आबकारी विभाग के निदेशक (2009-2010) के रूप में कार्य किया. आईजी के रूप में पदोन्नति पर, उन्होंने हैदराबाद शहर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (यातायात) (2010-2013) के रूप में कार्य किया. बाद में, उन्होंने 2013 से 2016 तक साइबराबाद के पुलिस आयुक्त के रूप में कार्य किया.

एडीजी के रूप में पदोन्नति पर उन्हें नागरिक आपूर्ति आयुक्त, खाद्य सचिव और नागरिक आपूर्ति निगम के एमडी के रूप में नियुक्त किया गया. वे 2018 से 2022 तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सीआईएसएफ में गए और आईजी हवाई अड्डा क्षेत्र के रूप में कार्य किया. भारत सरकार में एडीजी के रूप में उनका पैनल में चयन हुआ और बाद में दिसंबर 2021 में राज्य सरकार द्वारा उन्हें हैदराबाद शहर के पुलिस आयुक्त के रूप में कार्य करने के लिए वापस बुला लिया गया.



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article