लखनऊ: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में याचिका दाखिल करने वाले कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार विग्नेश शिशिर ने खुद की जान को बड़ा खतरा बताते हुए केंद्र सरकार से ‘जेड प्लस’ (Z+) सुरक्षा की मांग की है. इस सिलसिले में उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को मामले में जल्द फैसला लेने का एक बड़ा आदेश जारी किया है.
हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर ने सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार के सामने जो प्रतिवेदन दिया है, उस पर गृह मंत्रालय अगले तीन हफ्तों के भीतर अंतिम फैसला ले.
‘खतरा बहुत बढ़ गया है, मौजूदा सुरक्षा काफी नहीं’
आपको बता दें कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब विग्नेश शिशिर ने सुरक्षा की गुहार लगाई है. इससे पहले पिछले साल 28 अगस्त 2025 को भी कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को आदेश दिया था कि विग्नेश शिशिर की 24 घंटे सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल के एक पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर की तैनाती की जाए. लेकिन अब विग्नेश शिशिर ने कोर्ट में एक नया प्रार्थना पत्र देकर कहा है कि राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद से उन्हें मिल रही धमकियां और खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है. मौजूदा सुरक्षा उनके लिए नाकाफी है, इसलिए उन्हें तुरंत ‘जेड प्लस’ सुरक्षा दी जाए और साथ ही उनके घर पर भी कड़ा सुरक्षा पहरा बैठाया जाए.
राहुल गांधी की कथित संपत्ति की जांच पर भी हाईकोर्ट सख्त
विग्नेश शिशिर की सुरक्षा के अलावा, राहुल गांधी की कथित आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में भी हाईकोर्ट का रुख बेहद कड़ा नजर आ रहा है. कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर की ओर से दाखिल आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने देश की दो सबसे बड़ी जांच एजेंसियों सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़े निर्देश दिए हैं.
इस मामले की गोपनीय सुनवाई बीते 12 मई को जज के चैंबर में हुई थी, जिसका विस्तृत आदेश गुरुवार को हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि, ‘यदि याचिकाकर्ता की शिकायत संबंधित जांच एजेंसियों को मिल चुकी है, तो कानून के दायरे में रहकर इन आरोपों का तुरंत सत्यापन किया जाए.’ कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सीबीआई और ईडी इस मामले में कानून के तहत जो भी जरूरी कार्रवाई बनती है, उसे करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं.
जांच एजेंसियों से मांगी प्रोग्रेस रिपोर्ट, 20 जुलाई को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में केवल आदेश ही नहीं दिया, बल्कि सख्त टाइमलाइन भी तय कर दी है. कोर्ट ने सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस के निदेशक को 8 हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को अवगत कराया कि उन्हें विग्नेश शिशिर की शिकायत मिल चुकी है और वे तय समय यानी 8 हफ्तों में अपना जवाब कोर्ट के सामने रख देंगे. वहीं, ईडी ने भी शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि वे आरोपों का बारीकी से परीक्षण कर रहे हैं और जल्द ही वस्तुस्थिति से कोर्ट को रूबरू कराएंगे. अदालत ने कहा कि एजेंसियां जब अपना जवाबी हलफनामा कोर्ट में पेश करें, तो उसमें अब तक हुई कार्रवाई और जांच की प्रोग्रेस रिपोर्ट की पूरी जानकारी होनी चाहिए.
दस्तावेज रहेंगे सीलबंद, अगली सुनवाई पर खुलेगा राज
इस हाई-प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सुरक्षा के लिहाज से एक और बड़ा कदम उठाया है. कोर्ट ने अपने सीनियर रजिस्ट्रार को सख्त निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर की ओर से पेश की गई पूरी पेपर बुक और जितने भी अहम दस्तावेज हैं, उन्हें एक सीलबंद लिफाफे में बेहद सुरक्षित रखा जाए. इन सीलबंद दस्तावेजों को अगली सुनवाई पर खुद याचिकाकर्ता की मौजूदगी में ही सबके सामने खोला जाएगा.
हालांकि, कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस याचिका की पोषणीयता पर भी सवाल उठाए गए. इस पर हाईकोर्ट ने रुख साफ करते हुए कहा कि इस कानूनी पहलू पर वह तभी विचार करेगी, जब सभी पक्षों के जवाब और प्रति-उत्तर हलफनामे कोर्ट के रिकॉर्ड पर आ जाएंगे. फिलहाल, कोर्ट ने इस पूरे मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तारीख तय की है, और उसी दिन जांच एजेंसियों को अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट भी सौंपनी होगी.


