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petrol, diesel and CNG prices increased News- बस एवं कार ऑपरेटर्स कंफडेरेशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन (एएमवीआर) गुरमीत सिंह तनेजा के अनुसार सामान्य समय में वाहनों का माइलेज अधिक होता है, पर पीक ऑवर ट्रैफिक अधिक होने से कम हो जाता है. आफिस जाने वाले लोग पीक ऑवर में ही चलते हैं, इसलिए इन लोगों पर इसका असर पड़ेगा.
शुक्रवार से पेट्रोल,डीजल और सीएनजी की कीमतें बढ़ गयी हैं.
नई दिल्ली. लंबे समय से चल रहे पश्चिम एरिया संकट अब वाहन चालकों पर भारी पड़ेगा. इसकी सबसे ज्यादा मार महानगरों के आसपास के शहरों में रहने वाले लोगों पर पड़ेगी, क्योंकि वे रोजाना 30 से 50 किमी. की दूरी तय कर वाहन से गंतव्य जाते-आते हैं. यहां बात करते हैं राजधानी दिल्ली और आसपास के शहर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम के लोगों की, जिनका निजी वाहनों से रोजाना दिल्ली आना जाना होता है. इन वाहन चालकों पर क्या असर पड़ेगा, आइए जानें.
शुक्रवार से सीएनजी करीब 79.09 रुपये प्रति किलो हो गयी है, जबकि पेट्रोल 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है. रोजाना दिल्ली आने वालों का सेंटर प्वाइंट कनाट प्लेस रखा जाएगा, 30 से 50 किमी. एक तरफ पड़ेगा. जोड़ने में 60 से 100 किमी. की दूरी तय करनी पड़ेगी. महीने में 26 दिन के हिसाब से कैलकुलेशन जानते हैं.
एक्सपर्ट बता रहे हैं माइलेज पर असर
बस एवं कार ऑपरेटर्स कंफडेरेशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन (एएमवीआर) गुरमीत सिंह तनेजा के अनुसार सामान्य समय में वाहनों का माइलेज अधिक होता है, पर पीक ऑवर या आफिस ऑवर में कम हो जाता है. आफिस जाने वाले लोग पीक ऑवर में ही चलते हैं, इसलिए सामान्य लोगों की तुलना में इन पर ज्यादा असर पड़ेगा.
गुरमीत सिंह तनेजा सामान्य परिस्थितियों में जो पेट्रोल कार 15 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है. पर ऑफिस आवर के भारी ट्रैफिक में 11 से 12 किलोमीटर प्रति लीटर तक ही रह जाती है. इसी तरह सीएनजी और डीजल वाहनों की एवरेज भी 15 से 20 फीसदी तक घट जाती है. बार-बार ब्रेक लगाने, धीरे-धीरे रेंगने, लंबे समय तक इंजन ऑन रहने और एसी चलने की वजह से ईंधन की खपत तेजी से बढ़ती है और माइलेज कम हो जाता है.
ग्रेटर नोएडा से कनॉट प्लेस की दूरी करीब 42 किलोमीटर के आसपास है. इस तरह आना और जाना रोजाना लगभग 84 किलोमीटर का सफर होगा. सामान्य हालत में पेट्रोल कार करीब 5.6 लीटर पेट्रोल खर्च करती थी, लेकिन ट्रैफिक में यह 7 लीटर तक पहुंच सकता है. इस बढ़ोत्तरी के बाद ऐसे में रोज लगभग 22 से 25 रुपये अतिरिक्त खर्च का अनुमान है. सीएनजी वाहन चालकों को करीब 8 से 9 रुपये और डीजल वाहन मालिकों को करीब 15 रुपये रोज अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है. महीने के हिसाब से 700 रुपये महीने का खर्च बढ़ सकता है.
वाहन चालकों की जेब पर पड़ेगा असर.
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करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें
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