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Chitrakoot news: यूपी का चित्रकूट अब अपनी पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी में है. एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत जिले के प्रसिद्ध लकड़ी के खिलौनों को नया रूप देने की पहल शुरू की गई है,इसके अंतर्गत लकड़ी के खिलौने बनाने वाले कारीगरों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देने के साथ ही फ्री टूलकिट भी उपलब्ध कराई जाएगी,ताकि वे बाजार की मांग के अनुसार आकर्षक और आधुनिक डिजाइन के खिलौने तैयार कर सकें.
चित्रकूटः यूपी का चित्रकूट अब अपनी पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी में है. एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत जिले के प्रसिद्ध लकड़ी के खिलौनों को नया रूप देने की पहल शुरू की गई है,इसके अंतर्गत लकड़ी के खिलौने बनाने वाले कारीगरों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देने के साथ ही फ्री टूलकिट भी उपलब्ध कराई जाएगी,ताकि वे बाजार की मांग के अनुसार आकर्षक और आधुनिक डिजाइन के खिलौने तैयार कर सकें.
कारीगरों को नई तकनीक से जोड़ रहा उद्योग विभाग
चित्रकूट जिला लंबे समय से लकड़ी के हस्तनिर्मित खिलौनों के लिए पहचान रखता है. यहां बनने वाले खिलौने न सिर्फ स्थानीय बाजारों में बल्कि अन्य जिलों तक भी पहुंचते हैं. हालांकि बदलते समय और आधुनिक मशीनों के बढ़ते उपयोग के कारण पारंपरिक कारीगरों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था. कई कारीगर पुराने तरीके से काम करने के कारण आर्थिक संकट से भी जूझ रहे थे, ऐसे में जिला प्रशासन और उद्योग विभाग के द्वारा कारीगरों को नई तकनीक से जोड़ने की पहल कारीगरों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है.
प्रशिक्षण के दौरान मिलेगा 2 हजार रूपये
वही इस संबंध में जिला उद्योग विभाग के उपायुक्त एसके केसरवानी ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि एक जिला एक उत्पाद प्रशिक्षण योजना के तहत इस वर्ष 200 कारीगरों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है. प्रशिक्षण कार्यक्रम 10 दिनों तक चलेगा, जिसमें कारीगरों को आधुनिक लकड़ी के खिलौने बनाने की नई तकनीकें सिखाई जाएंगी,इसके साथ ही प्रशिक्षण लेने वाले प्रत्येक कारीगर को 2000 रुपये की प्रोत्साहन राशि और आधुनिक टूलकिट भी प्रदान की जाएगी.
टूलकिट के लाभ के लिए ऐसे करें आवेदन
उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि प्रशिक्षण और टूलकिट का लाभ लेने के लिए इच्छुक कारीगरों को ऑनलाइन https://msme.up.gov.in 31 जुलाई से पहले आवेदन करना होगा.आवेदन करने वाले व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए और वह चित्रकूट जिले का निवासी होना जरूरी है.प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कारीगरों को प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा. इस प्रमाण पत्र के माध्यम से वे आसानी से बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे. उन्होंने बताया कि चित्रकूट में करीब 50 प्रकार के लकड़ी के खिलौने तैयार किए जाते हैं, जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में पुरस्कार या उपहार के रूप में चित्रकूट के लकड़ी के खिलौनों का ही उपयोग किया जाए, इससे स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को बाजार मिलेगा और उनके व्यापार को नई पहचान भी मिलेगी.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


