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बच्चों के साथ समय बिताने के फायदे I चंदौली समाचार

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पोते-पोतियों के साथ खेलना और समय बिताना बुजुर्गों की शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है. डॉक्टर रिद्धि पांडे के अनुसार, बच्चों का साथ बुजुर्गों को एक्टिव, खुश और तनावमुक्त रखने में मदद करता है.

चंदौली. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां अधिकांश लोग कामकाज में व्यस्त रहते हैं. वहीं, बुजुर्गों के लिए अकेलापन एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है, ऐसे में दादा-दादी और नाना-नानी अगर अपने पोते-पोतियों और नाती-नातिनों के साथ समय बिताते हैं, तो यह उनकी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. इस विषय पर डॉक्टर रिद्धि पांडे ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि बच्चों के साथ खेलना और समय बिताना बुजुर्गों की शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत को बेहतर बनाता है.

बढ़ती उम्र में स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी
डॉक्टर रिद्धि पांडे ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि यह एक बहुत अच्छा और महत्वपूर्ण सवाल है, क्योंकि बढ़ती उम्र में स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है. उन्होंने बताया कि जब दादा-दादी या नाना-नानी अपने ग्रैंडचिल्ड्रन के साथ खेलते हैं, बातचीत करते हैं और समय बिताते हैं, तो इससे उनकी शारीरिक गतिविधियां बढ़ती हैं. बच्चों के साथ खेलते समय उन्हें चलना-फिरना पड़ता है, उनके पीछे दौड़ना पड़ता है और एक्टिव रहना पड़ता है. इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और हल्की-फुल्की एक्सरसाइज भी हो जाती है.

मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है सबसे बड़ा फायदा 
उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ समय बिताने का सबसे बड़ा फायदा मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है. बुजुर्गों का दिमाग सक्रिय रहता है और उनकी याददाश्त बेहतर बनी रहती है. डॉक्टर ने बताया कि ऐसे लोगों में भूलने की बीमारी या डिमेंशिया जैसी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है. बच्चों के साथ बातचीत और खेलकूद से बुजुर्ग मानसिक रूप से सतर्क बने रहते हैं और उन्हें जीवन में खुशी महसूस होती है.

कई बार अकेलापन महसूस करने लगते हैं बुजुर्ग
डॉक्टर रिद्धि पांडे ने भावनात्मक स्वास्थ्य को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि आज के समय में अधिकतर परिवारों में सभी सदस्य नौकरी या काम में व्यस्त रहते हैं, जिससे बुजुर्ग कई बार अकेलापन महसूस करने लगते हैं, लेकिन जब वे अपने पोते-पोतियों के साथ समय बिताते हैं, तो उन्हें अपनापन और जुड़ाव महसूस होता है. इससे उनका अकेलापन दूर होता है और डिप्रेशन तथा तनाव जैसी समस्याएं भी कम होती हैं. बच्चों के साथ हंसी-मजाक और खेल बुजुर्गों को समाज से जुड़ा हुआ महसूस कराते हैं.

थकान और स्वास्थ्य संबंधी हो सकती हैं दिक्कतें 
हालांकि, डॉक्टर ने यह भी सलाह दी कि बच्चों की पूरी जिम्मेदारी बुजुर्गों पर नहीं डालनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कई बार माता-पिता अपने बच्चों को पूरी तरह दादा-दादी या नाना-नानी के भरोसे छोड़ देते हैं, जिससे बुजुर्गों पर अधिक बोझ पड़ सकता है. ज्यादा जिम्मेदारी लेने से उन्हें थकान और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं. इसलिए जरूरी है कि बुजुर्ग सीमित समय तक ही बच्चों के साथ एक्टिव रहें और उनकी क्षमता का भी ध्यान रखा जाए.

मानसिक और भावनात्मक रूप से बनाता है मजबूत
उन्होंने सुझाव दिया कि सुबह या शाम के समय या फिर स्कूल से लौटने के बाद कुछ समय बच्चों के साथ खेलना और बातचीत करना बुजुर्गों के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है. इससे उनका मन भी खुश रहता है और शरीर भी सक्रिय बना रहता है. डॉक्टर रिद्धि पांडे ने बताया कि पोते-पोतियों के साथ बिताया गया समय बुजुर्गों के लिए किसी दवा से कम नहीं है. यह न केवल उन्हें शारीरिक रूप से फिट रखता है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी मजबूत बनाता है.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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