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गाजीपुर के रिलायंस मार्ट में इन दिनों इमली लड्डू, कच्चा आम गोली, जामुन गोली और जीरा कैंडी लोगों को उनके बचपन की याद दिला रही हैं. खट्टे-मीठे स्वाद के साथ हाजमे का देसी राज समेटे ये पारंपरिक गोलियां अब मॉडर्न मार्केट में भी लोगों की पहली पसंद बनती जा रही हैं.
खट्टी-मीठी इमली लड्डू आज भी लोगों की जुबान पर वही पुराना स्वाद छोड़ रही है. कभी स्कूलों के बाहर और मेलों में मिलने वाली ये छोटी-छोटी गोलियां मॉडर्न मार्केट तक पहुंच गई है. कुछ बुजुर्ग कहते है जठराग्नि (digestion) को भी जगाती है. इमली में मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भोजन के बाद होने वाली भारीपन की समस्या को दूर करते हैं. रिलायंस मार्ट में रखे ये इमली लड्डू सिर्फ बच्चों का शौक नहीं, बल्कि गैस और बदहजमी के खिलाफ एक पुराना और असरदार देसी इलाज भी हैं.

गाजीपुर के रिलायंस मार्ट में इन दिनों एक छोटा-सा देसी मिठाई वाला कोना लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. इमली लड्डू, कच्चा आम की गोली और जामुन की गोलियां लोगों को उनके बीते बचपन की याद दिला रही हैं. कभी पचास पैसे और एक रुपये में मिलने वाली ये गोलियां अब बड़े बाजारों की चमचमाती अलमारियों तक पहुंच चुकी हैं. बड़े लोग इन्हें देखकर पुराने दिनों में खो जाते हैं, वहीं बच्चों के लिए यह स्वाद बिल्कुल नया अनुभव बन रहा है. विदेशी चॉकलेटों के इस दौर में देसी स्वादों की यह वापसी लोगों को भावुक भी कर रही है और अपनी ओर आकर्षित भी.

अमरूद कैंडी का नाम सुनते ही लोगों को स्कूल के बाहर मिलने वाली खट्टी-मीठी गोलियां याद आने लगती हैं. हल्के नमक, मसाले और अमरूद के स्वाद से बनी यह कैंडी कभी बच्चों की सबसे पसंदीदा चीजों में गिनी जाती थी. वहीं अमरुद की हाजमा कैंडी पेट को साफ रखने में सहायक होती है. इन फ्रूट कैंडीज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये प्राकृतिक तत्वों से प्रेरित हैं, जो कृत्रिम चॉकलेट्स के मुकाबले बच्चों के लिए बहुत सुरक्षित और फायदेमंद हैं. यह आज के जंक फूड के दौर में एक सेहतमंद वापसी है.
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कच्चा आम गोली का स्वाद कई लोगों को उस दौर में वापस ले जाता है जब गर्मियों की छुट्टियों में कच्चे आम और नमक-मिर्च सबसे बड़ा मजा हुआ करते थे. इसकी खट्टी और तीखी खुशबू आज भी वैसी ही है।इस कैंडी में उस कच्चे आम का वो तीखा और खट्टा-मीठा स्वाद है, जो सीधा रूह में उतर जाता है. आज के बच्चे, जो विदेशी कैंडीज के आदी हैं, उनके लिए यह देसी फ्लेवर स्वाद का एक अनोखा और नया अनुभव साबित हो रहा है.

जामुन गोली सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि देसी हाजमे के लिए भी जानी जाती रही है. पुराने समय में लोग इसे खाने के बाद स्वाद और पाचन दोनों के लिए पसंद करते थे. यह कैंडी न सिर्फ स्वादिष्ट है, बल्कि हाजमे के लिए भी रामबाण मानी जाती है. जामुन को आयुर्वेद में पाचन और मधुमेह (sugar control) के लिए बहुत उपयोगी माना गया है.

यह वही स्वाद है जो कभी स्कूल के गेट पर दुपहरी का सुकून हुआ करता था. शुद्ध इमली के गूदे और काले नमक से तैयार यह कैंडी आज भी हाजमे का सबसे बड़ा देसी नुस्खा है. हमने कई महँगी चॉकलेट्स देखीं, पर जो रूहानी सुकून इस गीटक इमली के एक चटखारे में है, वो कहीं और नहीं, इसमें मौजूद इमली का टार्टरिक एसिड पाचन तंत्र को सक्रिय करता है.

जीरे की तासीर ठंडी होती है और यह पाचन के लिए रामबाण है. इन छोटी-छोटी जीरा गोलियों का हर दाना पेट की सूजन और कब्ज जैसी समस्याओं से लड़ने में मदद करता है. जीरा गोली भारी भोजन के बाद ‘मैजिक पिल’ की तरह काम करती है. यह स्वाद और सेहत का वो संतुलन है, जो आज की पीढ़ी को रिलायंस ने नए रूप में परोसा है. ये कैंडी लोगों की भावनाओं से जुड़ी कहानी बन गई है, जो स्वाद कभी स्कूल बैग, जेब और गांव के ठेलों तक सीमित थे, वही आज बड़े मॉल की चमकदार अलमारियों तक पहुंच चुके हैं. गाजीपुर का यह देसी कोना लोगों को एहसास करा रहा है कि बचपन का स्वाद समय के साथ कभी खत्म नहीं होता.


