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Anil Kumble son: वर्ल्ड क्रिकेट में जंबो के नाम से मशहूर अनिल कुंबले ने अपने बेटे मयास के लिए एक भावुक पोस्ट शेयर किया है. कुंबले बेटे मयास इंजीनियर बन गए हैं. इस खास मौके पर कुंबले की वाइफ चेतना ने इंस्टाग्राम पर बेटे के लिए एक लंबा पोस्ट लिखा और उन्हें टैग भी किया. बेटे मयास की तरह अनिल कुंबले भी एक इंजीनियर रहे हैं.
अनिल कुंबले का बेटा बना इंजीनियर
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज अनिल कुंबले ने अपने बेटे मयास के लिए सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखा है. इस पोस्ट में कुंबले के साथ उनकी वाइफ चेतना और बेटे मयास की तस्वीर भी हैं. दरअसल, अनिल कुंबले के बेटे मयास इंजीनियर बन गए हैं. इस खास मौके पर उनकी वाइफ कुंबले को टैग करते हुए एक लंबा पोस्ट लिखा. इस पोस्ट में चेतना ने अपने बेटे की कामयाबी और उनकी कड़ी मेहनत के बारे में एक सुंदर सा मैसेज लिखा.
चेतना ने इंजीनियर बेटे के लिए लिखा, “जब वह बमुश्किल तीन साल का था तभी से उसके मन में इस बात को लेकर कभी कोई संदेह नहीं था कि वह बड़ा होकर क्या बनना चाहता है. वह उसी दृढ़ता के साथ कहता जो सिर्फ एक बच्चे में हो सकती है मैं इंजीनियर बनूंगा. वह अपने छोटे-छोटे हाथों में एक नन्हा सा पाना (रिंच) उठा लेता और पूरे आत्मविश्वास से घोषणा करता कि एक दिन वह एक नया स्कूटर बनाएगा. सात साल की उम्र में उसके सपने और बड़े हो गए. वह कारें डिजाइन करना चाहता था और गर्व से कहता था कि वह उनका नाम “MAK” रखेगा.”
बचपन से इंजीनियर बनना चाहते थे मयास कुंबले
मयास कुंबले की मां ने अपने पोस्ट में बताया कि उनका बेटा बचपन से ही इंजीनियर बनना चाहते थे. इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा, “माता-पिता होने के नाते हम बचपन के इन सपनों पर मुस्कुराते हैं और सोचते हैं कि आने वाला समय क्या लेकर आएगा, लेकिन आज उसे एक इंजीनियर के रूप में ग्रेजुएट होते देख मुझे एक बेहद खूबसूरत बात का अहसास हो रहा है. कभी-कभी बच्चे दुनिया के जानने से बहुत पहले ही यह जानते हैं कि वे वास्तव में कौन हैं”
उन्होंने आगे लिखा, “साल बीतते गए, कड़ी मेहनत हुई, रातों की नींदें उड़ीं और आईं, लेकिन उस छोटे लड़के ने कभी अपने सपने को हाथ से जाने नहीं दिया और आज उसने इसे पूरा कर दिखाया है. मेरा दिल गर्व, कृतज्ञता और भावनाओं से भरा हुआ है. तुम्हें हाथ में औजार लिए एक जिज्ञासु छोटे बच्चे से लेकर दिल में एक मकसद लिए एक इंजीनियर बनते देखना मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशियों में से एक रहा है.मुझे तुम पर बहुत गर्व है, मेरे बच्चे. तुमने सपना देखा उस पर विश्वास किया और उसे सच कर दिखाया. मैं इंजीनियर बनूंगा. कहने वाले उस छोटे लड़के ने अपना वादा निभाया.”
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जितेंद्र कुमार डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में बीते 10 सालों से सक्रिय हैं. इस वक्त नेटवर्क 18 समूह में हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. क्रिकेट के साथ बॉक्सिंग, कबड्डी, बैडमिंटन, ह…और पढ़ें


