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शुभमन गिल की कप्तानी में इस बल्लेबाजी लाइन-अप का बार-बार दोहराया जाना यह दिखाता है कि टीम प्रबंधन नए प्रयोगों से बच रहा है. साई सुदर्शन, ध्रुव जुरेल और नितीश रेड्डी को लगातार टीम में बनाए रखना एक तरफ निरंतरता का संकेत हो सकता है, लेकिन दूसरी तरफ यह अन्य घरेलू खिलाड़ियों के मनोबल को तोड़ने जैसा है.
6 महीने पहले दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ फेल हुई बैटिंग लाइन-अप पर फिर सेलेक्टर्स हुए मेहरबान
नई दिल्ली. अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले एकमात्र टेस्ट के लिए भारतीय क्रिकेट टीम के हालिया टीम चयन ने प्रशंसकों और विश्लेषकों के बीच एक गंभीर बहस को जन्म दे दिया है. जब टीम का ऐलान हुआ, तो ऐसा लगा मानो समय छह महीने पीछे चला गया हो. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलने वाले वही बल्लेबाज, वही गेंदबाजी आक्रमण और वही पुराना सेटअप एक बार फिर मैदान पर उतरने के लिए तैयार है.
यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, साई सुदर्शन, कप्तान शुभमन गिल, ध्रुव जुरेल और नितीश कुमार रेड्डी के कंधों पर ही फिर से बल्लेबाजी का जिम्मा है. गेंदबाजी में भी जसप्रीत बुमराह के आराम के अलावा कोई नया चेहरा नहीं है वही मोहम्मद सिराज, वाशिंगटन सुंदर और कुलदीप यादव. इस चयन ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है क्या भारतीय घरेलू क्रिकेट में अब डेज क्रिकेट (प्रथम श्रेणी) के लिए प्रतिभाओं का अकाल पड़ गया है, या चयनकर्ता किसी भी तरह के जोखिम से डर रहे हैं?
वही पुराना बल्लेबाजी क्रम: निरंतरता या ठहराव?
रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों के बाद उम्मीद थी कि टीम में नए और डेज क्रिकेट में बेहतर करने वाले चेहरों को लगातार मौका मिलेगा. यशस्वी जायसवाल ने निश्चित रूप से प्रभावित किया है, लेकिन शुभमन गिल की कप्तानी में इस बल्लेबाजी लाइन-अप का बार-बार दोहराया जाना यह दिखाता है कि टीम प्रबंधन नए प्रयोगों से बच रहा है. साई सुदर्शन, ध्रुव जुरेल और नितीश रेड्डी को लगातार टीम में बनाए रखना एक तरफ निरंतरता का संकेत हो सकता है, लेकिन दूसरी तरफ यह अन्य घरेलू खिलाड़ियों के मनोबल को तोड़ने जैसा है. रणजी ट्रॉफी और इंडिया-ए के दौरों पर लगातार रन बनाने वाले कई बल्लेबाज आज भी राष्ट्रीय टीम के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं, लेकिन उनके लिए खिड़की खुलती नजर नहीं आ रही.
गेंदबाजी में बदलाव से परहेज
जसप्रीत बुमराह को आराम दिए जाने के बाद उम्मीद थी कि किसी नए तेज गेंदबाज को आजमाया जाएगा, जो लाल गेंद से अपनी गति और स्विंग से प्रभावित कर सके. इसके उलट, चयनकर्ताओं ने एक बार फिर मोहम्मद सिराज के अनुभव पर भरोसा जताया. स्पिन विभाग में कुलदीप यादव और वाशिंगटन सुंदर की जोड़ी वही पुरानी कहानी दोहरा रही है. जब हम विदेशी दौरों या भविष्य की टेस्ट चैंपियनशिप की बात करते हैं, तो हमारे पास बैकअप गेंदबाजों का एक मजबूत पूल होना चाहिए लेकिन मौजूदा चयन को देखकर लगता है कि टीम प्रबंधन आज भी वहीं खड़ा है जहां वह छह महीने पहले था.
घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन की अनदेखी?
भारत का घरेलू क्रिकेट ढांचा दुनिया के सबसे मजबूत ढांचों में से एक माना जाता है. हर साल रणजी ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी से ऐसे खिलाड़ी निकलते हैं जो पांच दिनों के खेल में तकनीक और धैर्य का बेजोड़ नमूना पेश करते हैं. इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ही सेट को बार-बार मौका देना यह संदेश देता है कि आईपीएल या चुनिंदा दौरों के प्रदर्शन को घरेलू क्रिकेट की लंबी तपस्या से ज्यादा तवज्जो मिल रही है. अगर नए खिलाड़ियों को मौका नहीं मिलेगा, तो टेस्ट क्रिकेट की कड़ाही में नए नायक कैसे तैयार होंगे. टीम में निरंतरता जरूरी है, लेकिन जब निरंतरता ‘ठहराव’ में बदल जाए तो वह टीम के भविष्य के लिए घातक हो सकती है. भारतीय टेस्ट टीम को इस समय नए खून, नई सोच और बेंच स्ट्रेंथ को मजबूत करने की जरूरत है. छह महीने पहले जहां सफर रुका था, वहीं से दोबारा बिना किसी बदलाव के शुरू करना यह दिखाता है कि हम आगे बढ़ने के बजाय सिर्फ सुरक्षित खेलने की कोशिश कर रहे हैं.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


