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एशियन गेम्स में जीता गोल्ड, फिर झटके वेस्ट-इंडीज के 8 विकेट, ‘चैंपियन चूनी’ के फुटबालर से क्रिकेटर बनने की अनोखी कहानी

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चूनी गोस्वामी ने एक ही जीवनकाल में दो अलग-अलग खेलों में शिखर को छूने का कारनामा करने वाले गिने-चुने खिलाड़ी ही हुए हैं.  सुविमल ‘चूनी’ गोस्वामी एक ऐसे ही जादुई एथलीट थे. वह जितने बेहतरीन फुटबॉलर थे, उतने ही शानदार क्रिकेटर भी थे. 

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चूनी गोस्वामी- एक फुटबॉलर जिसने एशियान गेम्स में जीता गोल्ड फिर क्रिकेट खेल में कमाया नाम

नई दिल्ली. ऑलराउंडर शब्द को जितना इस्तेमाल भारत में किया जाता है शायद ही किसी देश में किया जता है. जो भी व्यक्ति समान अधिकार के साथ दो काम करने का हुनर रखता है वो बन जाता है चौतरफा खिलाड़ी यानि आलराउंडर.  भारतीय खेल जगत के इतिहास में कई ऐसे सितारे हुए हैं जिन्होंने अपने खेल से देश का नाम रोशन किया.  लेकिन एक ही जीवनकाल में दो अलग-अलग खेलों में शिखर को छूने का कारनामा करने वाले गिने-चुने खिलाड़ी ही हुए हैं.  सुविमल ‘चूनी’ गोस्वामी एक ऐसे ही जादुई एथलीट थे. वह जितने बेहतरीन फुटबॉलर थे, उतने ही शानदार क्रिकेटर भी थे.

चूनी गोस्वामी का व्यक्तित्व ऐसा था कि विरोधी टीमें भी उनके हुनर का लोहा मानती थीं. फुटबॉल में स्वर्ण युग के महानायक चूनी गोस्वामी भारतीय फुटबॉल के उस दौर के नायक थे जिसे आज भी ‘स्वर्ण युग’ कहा जाता है.  उनकी कप्तानी में भारत ने 1962 के जकार्ता एशियाई खेलों में फुटबॉल का स्वर्ण पदक जीता था.  यह भारतीय फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है. मैदान पर उनकी ड्रिब्लिंग, गेंद पर नियंत्रण और खेल को समझने की क्षमता अद्भुत थी.  उन्होंने अपने पूरे करियर में केवल एक ही क्लब ‘मोहन बागान’ के लिए खेला.

क्रिकेट पिच पर वेस्टइंडीज को चटाई धूल

फुटबॉल से संन्यास लेने के बाद चूनी गोस्वामी ने क्रिकेट के मैदान पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया.  उन्होंने बंगाल क्रिकेट टीम की कप्तानी की और उसे दो बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल तक पहुंचाया. वह एक बेहतरीन ऑलराउंडर थे, जो मध्यक्रम में बल्लेबाजी करने के साथ-साथ मध्यम गति की तेज गेंदबाजी भी करते थे. उनकी सबसे बड़ी क्रिकेट उपलब्धियों में से एक 1966 में आई जब उन्होंने मध्य क्षेत्र और पूर्वी क्षेत्र की संयुक्त टीम की ओर से खेलते हुए टूर पर आई दिग्गज वेस्टइंडीज टीम के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दर्ज की.  उस मैच में गोस्वामी ने अपनी शानदार गेंदबाजी से वेस्टइंडीज के आठ बल्लेबाजों को आउट किया था. सर गैरी सोबर्स की आत्मकथा में विशेष स्थानचूनी गोस्वामी की खेल प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के सर्वकालिक महान ऑलराउंडर सर गारफील्ड (गैरी) सोबर्स भी उनके मुरीद थे.

सोबर्स की किताब में चूनी गोस्वामी 

सर गैरी सोबर्स ने अपनी आत्मकथा में चूनी गोस्वामी की खेल क्षमता और एथलेटिसिज्म की खुलकर तारीफ की है. किसी भारतीय एथलीट के लिए क्रिकेट के सबसे बड़े दिग्गजों में से एक से ऐसी तारीफ मिलना यह साबित करता है कि वह वाकई ‘सर्टिफाइड लेजेंड’ थे. बहुमुखी प्रतिभा के धनी और विरासतभारत सरकार ने उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्म श्री से सम्मानित किया. चूनी गोस्वामी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि भारतीय खेल संस्कृति के प्रतीक थे.  आज के दौर में जब खिलाड़ी केवल एक ही खेल पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तब चूनी गोस्वामी का जीवन हमें याद दिलाता है कि जुनून और कड़ी मेहनत से किसी भी खेल की सीमाओं को पार किया जा सकता है.

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Rajeev MishraAssociate editor

मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें



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