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Virat Kohli Test Captaincy Record: साउथ अफ्रीका में टेस्ट सीरीज हारने के बाद विराट कोहली ने कप्तानी छोड़ दी थी. अब करीब चार साल बाद उन्होंने खुलासा किया है कि कप्तानी और बल्लेबाजी के दोहरे बोझ ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह थका दिया था. भारत को 68 मैचों में 40 जीत दिलाकर इतिहास के सबसे सफल टेस्ट कप्तान बने कोहली ने बताया कि टीम को नंबर वन बनाने के जुनून में उन्होंने खुद को खो दिया था. कोहली की कप्तानी में 2018-19 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी.
विराट कोहली ने क्यों छोड़ी थी टेस्ट कप्तानी?
नई दिल्ली. जब भारतीय टीम 2021-22 में साउथ अफ्रीका दौरे पर गई तो उसे टेस्ट सीरीज में 1-2 से हार का सामना करना पड़ा. सीरीज खत्म ही हुई थी कि विराट कोहली ने इस फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ने का ऐलान कर भारतीय क्रिकेट में भूचाल ला दिया. हर कोई हैरान इस बात से था कि इस फॉर्मेट के सबसे सफल भारतीय कप्तान के साथ ऐसा क्या हो गया कि उन्होंने कप्तानी से ही हटने का फैसला ले लिया. इस दिग्गज का यह निर्णय तब आया जब कुछ ही महीने पहले उन्होंने टी20 की कप्तानी छोड़ी थी और उन्हें वनडे के कप्तान पद से हटा दिया गया था. अब जब इस बात को चार साल से भी ज्यादा समय बीत चुका है, विराट कोहली ने कप्तानी छोड़े के अपने इस फैसले पर खुलकर बात की है. भले ही उनकी कप्तानी में भारत ने कई बड़ी सफलताएं हासिल कीं, लेकिन विराट ने माना कि कप्तानी के दबाव का असर उन पर दिखने लगा था. जब उनका खुद का फॉर्म खराब हुआ और भारत साउथ अफ्रीका में टेस्ट सीरीज हार गया, तब कोहली को लगा कि कप्तानी से हटने का यह सही समय है.
आईपीएल 2026 खेल रहे इस दिग्गज ने आरसीबी इनोवेशन लैब के दौरान बात करते हुए अपने इस फैसले के बारे में कहा, ‘मुझमें कुछ नहीं बचा था, मैं पूरी तरह थक चुका था. मैं एक ऐसे दौर में पहुंच गया था जहां मैं टीम की बल्लेबाजी का भी मुख्य हिस्सा था और कप्तानी का भी. सच कहूं तो मुझे अंदाजा नहीं था कि इन दोनों चीजों का मेरी रोजमर्रा की जिंदगी पर कितना भारी बोझ पड़ेगा. लेकिन चूंकि मैं भारत क्रिकेट को सबसे ऊपर रखने के लिए बहुत ज्यादा जुनूनी था, इसलिए मैंने इस बोझ पर ध्यान ही नहीं दिया. यही वजह है कि जब तक मैंने कप्तानी छोड़ी, मैं पूरी तरह से थक चुका था. मुझमें बिल्कुल ताकत नहीं बची थी. कप्तानी ने मुझे पूरी तरह थका दिया था. वह समय बहुत मुश्किल था.’
‘9 साल में किसी ने नहीं पूछा कि मैं कैसा हूं’
कोहली को लगने लगा था कि कप्तानी के चक्कर में उन्होंने कहीं न कहीं खुद को खो दिया है. कप्तानी की जिम्मेदारियों के कारण उन्हें अपने लिए समय ही नहीं मिलता था, इसलिए आखिरकार इस पद को छोड़ना ही उन्हें सही फैसला लगा. कोहली ने आगे कहा, “आपको लीडरशिप की जिम्मेदारी इसलिए दी जाती है क्योंकि लोगों को लगता है कि आप ज्यादा बोझ संभाल सकते हैं. कई मायनों में, कप्तानी कोचिंग से ज्यादा मैनेजमेंट के बारे में है. इसका मतलब है कि आप अपने साथ खेलने वाले खिलाड़ियों को समझें और यह देखें कि उनसे बेस्ट प्रदर्शन कैसे निकाला जाए. ऐसा करने के लिए आपको लगातार एक ऐसे जोन में रहना पड़ता है जहां आप खुद के बारे में नहीं सोच सकते. आपके दिमाग में यह बात कभी आती ही नहीं कि कोई आपसे आकर पूछेगा, ‘क्या तुम ठीक हो?’”
विराट ने कप्तानी के अपने आखिरी दिनों को याद करते हुए कहा, ‘अपनी कप्तानी के आखिरी दिनों में, जब मैंने पीछे मुड़कर देखा, तो मुझे एहसास हुआ कि पिछले लगभग 9 सालों में मुझसे किसी ने भी यह नहीं पूछा था- ‘तुम कैसे हो?’”
भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान बने कोहली
कोहली ने पहली बार 2014 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड टेस्ट में भारत की कप्तानी की थी, जब एमएस धोनी अंगूठे की चोट के कारण बाहर हो गए थे. उस मैच में कोहली ने दोनों पारियों में शतक लगाकर भारत को जीत के करीब पहुंचा दिया था, लेकिन आखिरी समय में बल्लेबाजी बिखरने के कारण भारत मैच हार गया. इसके बाद अगस्त 2015 में बतौर परमानेंट कप्तान अपनी पहली सीरीज में कोहली ने भारत को श्रीलंका में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जिताई. यहीं से कोहली और रवि शास्त्री की जोड़ी का सफर शुरू हुआ. टेस्ट क्रिकेट में भारत के एक सुनहरे दौर का आगाज हुआ और कोहली एंड कंपनी ने 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में हराकर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीतकर एक नया इतिहास रचा. कोहली भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान हैं. उन्होंने 68 मुकाबलों में कमान संभाली, जिनमें से 40 में भारत को जीत मिली. उनकी कप्तानी में भारत सिर्फ 17 ही मैच हारा. उनका जीत प्रतिशत 58.82 का रहा.
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शिवम उपाध्याय उभरते हुए खेल पत्रकार हैं, जो नवंबर 2025 से देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान नेटवर्क 18 ग्रुप में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं. क्रिकेट विशेषज्ञता का मुख्य क्षेत्र है, लेकिन इसके अलावा हॉकी और बैडमिं…और पढ़ें


