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Lucknow High Court News : हाईकोर्ट ने भर्ती विज्ञापन की शर्त और आयोग के आदेश पर रोक लगा दी है. अदालत ने कहा कि अनारक्षित कट ऑफ से अधिक अंक पाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को बाहर करना गलत है. लखनऊ उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि कोई आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से अधिक अंक लाने के बावजूद मुख्य परीक्षा में शामिल होने से मात्र इस आधार पर वंचित कर दिया जाता है कि वह आरक्षित वर्ग के कट ऑफ में नहीं आ सका, तो ये गलत है.
हाईकोर्ट ने ये आदेश भावना यादव और अन्य की विशेष अपील पर दिया है. फोटो AI
लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अनारक्षित कट ऑफ से अधिक अंक पाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को बाहर करना गलत है. हाईकोर्ट ने भर्ती विज्ञापन की शर्त और आयोग के आदेश पर रोक लगाई. अदालत ने कहा कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से अधिक अंक लाने के बावजूद मुख्य परीक्षा में शामिल होने से मात्र इस आधार पर वंचित कर दिया जाता है कि वह आरक्षित वर्ग के कट ऑफ में नहीं आ सका, तो ये संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 (1) का उल्लंघन होगा. इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी भर्ती परीक्षा विज्ञापन की संबंधित शर्त और राज्य लोक सेवा आयोग के 9 जनवरी 2020 के कार्यालय आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. हाईकोर्ट ने ये आदेश भावना यादव व अन्य की विशेष अपील पर दिया.
पहले क्यों खारिज किया
अपील में 9 जनवरी 2020 के आयोग के आदेश और 22 दिसंबर 2025 के भर्ती विज्ञापन की शर्त संख्या 10 को चुनौती दी गई थी. शर्त में कहा गया था कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में केवल अंतिम चयन के समय समायोजित किया जाएगा, प्रारंभिक परीक्षा या स्क्रीनिंग चरण में नहीं. सिंगल बेंच ने अपीलार्थियों की याचिका को खारिज कर दिया था.
डबल बेंच ने क्या पाई कमी
डबल बेंच ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा में एक निश्चित अंक पाने वाला सामान्य वर्ग का व्यक्ति मुख्य परीक्षा में शामिल होता है तो उससे अधिक अंक पाने वाला आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार सिर्फ इस आधार पर बाहर कर दिया जाए कि वह आरक्षित वर्ग के कट ऑफ में नहीं आ सका तो यह प्रथम दृष्टया समान अवसर के अधिकार के विपरीत होगा. हाईकोर्ट ने कहा कि अपीलार्थियों की चुनौती समय पूर्व नहीं थी क्योंकि आयोग का फैसला और विज्ञापन पहले से स्पष्ट रूप से लागू थे. ऐसे मामलों में परीक्षा होने से पहले दखल करना जरूरी है ताकि बाद में जटिलता पैदा न हो. मामले में अगली सुनवाई 26 मई को होगी.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें


