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आईपीएल के दो महीनों के दौरान खिलाड़ियों पर अंतिम फैसला टीमों का होता है, लेकिन यह भी उतना ही सही है कि यह टूर्नामेंट बीसीसीआई की ही संपत्ति है और वरुण एक केंद्रीय अनुबंधित खिलाड़ी हैं. ऐसे में उनका खुद को ज़बरदस्ती फिट दिखाना और चोट को बढ़ाना न तो खिलाड़ी के लिए सही है और न ही क्रिकेट के लिए. यह मुद्दा आईपीएल के अंत तक बड़ा विवाद बन सकता है.
वरुण के चोट के साथ खेलने के मुद्दे पर बहुत गंभीरता के साथ विचार कर रही है बीसीसीआई
नई दिल्ली. ईडन गार्डन्स में केकेआर के आखिरी मैच में वरुण चक्रवर्ती को लंगड़ाते हुए गेंदबाज़ी करते देखना वाकई परेशान करने वाला था. यह समझा जा सकता है कि फ्रेंचाइज़ी को उनकी जरूरत है, खासकर तब जब प्लेऑफ में पहुंचने की उम्मीद अभी बाकी हो, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि वरुण एक कॉन्ट्रैक्टेड क्रिकेटर हैं और भारतीय टीम का हिस्सा भी हैं. उन्हें चोट के बावजूद खेलते देखना गलत संदेश देता है.
बीसीसीआई सचिव ने कहा है कि आईपीएल के दो महीनों के दौरान खिलाड़ियों पर अंतिम फैसला टीमों का होता है, लेकिन यह भी उतना ही सही है कि यह टूर्नामेंट बीसीसीआई की ही संपत्ति है और वरुण एक केंद्रीय अनुबंधित खिलाड़ी हैं. ऐसे में उनका खुद को ज़बरदस्ती फिट दिखाना और चोट को बढ़ाना न तो खिलाड़ी के लिए सही है और न ही क्रिकेट के लिए. यह मुद्दा आईपीएल के अंत तक बड़ा विवाद बन सकता है.
फ्रेंचाइज जरूरी या फ्यूचर?
किसी भी क्रिकेट जानकार से आप पूछेंगे तो वो यहीं कहेंगे कि किसी भी खिलाड़ी को चोट के साथ जोखिम नहीं लेना चाहिए. वरुण अब युवा नहीं हो रहे हैं और भारतीय टीम का हिस्सा होने के नाते उनकी स्थिति अन्य खिलाड़ियों से अलग है, जो केंद्रीय अनुबंध में नहीं हैं. केकेआर की उन पर निर्भरता समझ में आती है, लेकिन यह आगे के लिए एक खतरनाक उदाहरण भी पेश करता है और कमेंटेटरों का इस फैसले का समर्थन करना और भी अजीब लगता है. कमेंटेटर भले ही आईपीएल के लिए काम कर रहे हों, लेकिन खेल के प्रति उनकी जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. वरुण भारत की व्हाइट-बॉल टीम के अहम खिलाड़ी हैं और उन्हें किसी भी कीमत पर खुद को जोखिम में नहीं डालना चाहिए चाहे वह आईपीएल ही क्यों न हो.
पैसा जरूरी पर मजबूरी नहीं
आईपीएल भले ही भारतीय क्रिकेट के लिए सबसे बड़ा आर्थिक स्रोत हो, लेकिन यह एक घरेलू प्रतियोगिता ही है, जिसकी प्रतिष्ठा और महत्व विश्व कप जैसे टूर्नामेंट से कभी तुलना नहीं कर सकते. विश्व कप या बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट जीतना बिल्कुल अलग स्तर की उपलब्धि है, और राष्ट्रीय टीम को हमेशा प्राथमिकता मिलनी चाहिए. यहाँ खिलाड़ी की ईमानदारी भी महत्वपूर्ण है. क्या वरुण को वास्तव में कोई परेशानी नहीं है? क्या मेडिकल टीम ने उन्हें खेलने की पूरी तरह से अनुमति दी है?
बीसीसीआई का दखल अहम
आने वाले समय में बीसीसीआई को इस मुद्दे पर दोबारा विचार करना होगा. हाँ, फ्रेंचाइज़ी खिलाड़ी पर भारी रकम खर्च करती हैं और लीग बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन बीसीसीआई ही देश में क्रिकेट का संचालन करती है और उसे इस खेल का संरक्षक माना जाता है इसलिए “पहले भारत” का सिद्धांत हमेशा लागू होना चाहिए आईपीएल में भी. अगर बीसीसीआई को लगता है कि कोई खिलाड़ी खुद को खतरे में डाल रहा है, तो उसे तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और उसे खेलने से रोकना चाहिए यही सही तरीका है. अगर चोट मैच के दौरान लगी होती तो स्थिति अलग हो सकती थी, लेकिन यहाँ खिलाड़ी पहले से ही चोटिल होकर मैदान में उतर रहा है यही सबसे चिंताजनक बात है.
अंत में फैसला बीसीसीआई को ही लेना होगा न कि फ्रेंचाइज़ी, न खिलाड़ी और न ही कमेंटेटर अगर बीसीसीआई को लगता है कि वरुण अपने भारत के करियर को जोखिम में डाल रहे हैं, तो उन्हें तुरंत रोक देना चाहिए.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


