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Prayagraj SRN Hospital: प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में जूनियर डॉक्टरों और वकीलों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है. मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. वीके पांडेय ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर 20 रेजिडेंट डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. दूसरी तरफ, भीषण गर्मी (हीटवेव) और मरीजों की परेशानी को देखते हुए डॉक्टरों ने अपनी 3 दिनों से जारी हड़ताल खत्म कर दी है और अस्पताल में सभी चिकित्सा सेवाएं सुचारू रूप से बहाल हो गई हैं.
Prayagraj SRN Hospital: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. यहां के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय (SRN) के ट्रॉमा सेंटर में जूनियर डॉक्टरों और वकीलों के बीच हुई हिंसक झड़प के मामले में प्रशासन ने बेहद सख्त एक्शन लिया है. इस पूरे बवाल के बाद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीके पांडेय ने शुरुआती जांच रिपोर्ट के आधार पर 20 जूनियर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है. दूसरी तरफ, भीषण गर्मी और मरीजों की परेशानी को देखते हुए डॉक्टरों ने अपनी तीन दिन से चली आ रही हड़ताल को भी खत्म कर दिया है.
क्या है पूरा मामला और क्यों हुआ विवाद?
दरअसल, यह पूरा विवाद बुधवार सुबह करीब 6 बजे शुरू हुआ था. ट्रॉमा सेंटर में एक सड़क दुर्घटना में घायल हुई 25 वर्षीय जूनियर वकील जागृति शुक्ला को इलाज के लिए लाया गया था. इलाज के दौरान मरीज के तीमारदारों और परिचितों ने आरोप लगाया कि इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टरों ने उनके साथ बदसलूकी की. बात इतनी बढ़ गई कि डॉक्टरों पर अमर्यादित व्यवहार, गाली-गलौज और तीमारदारों के साथ मारपीट करने के गंभीर आरोप लगे. वकीलों के साथ हुई इस मारपीट के बाद अस्पताल में भारी बवाल खड़ा हो गया था.
जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद 20 डॉक्टरों पर गिरी गाज
इस संवेदनशील मामले को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. वीके पांडेय ने तुरंत तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था. जांच कमेटी की शुरुआती सिफारिशों के बाद, घटना के वक्त ट्रॉमा सेंटर की सर्जरी यूनिट-2 और ऑर्थोपेडिक (अस्थि रोग) यूनिट-2 में तैनात सभी 20 डॉक्टरों को सस्पेंड कर दिया गया. निलंबित होने वाले डॉक्टरों में 10 सर्जरी विभाग के और 10 ऑर्थो विभाग के जूनियर व सीनियर रेजिडेंट शामिल हैं. मेडिकल कॉलेज के उप प्राचार्य डॉ. मोहित जैन और जांच समिति के सदस्य प्रोफेसर डॉ. दिलीप चौरसिया ने बताया कि फिलहाल यह कार्रवाई प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर की गई है और मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है. पूरी रिपोर्ट आने के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा.
सस्पेंड डॉक्टरों के लिए कड़े नियम लागू
निलंबन की अवधि के दौरान इन सभी 20 डॉक्टरों को चिकित्सीय (मरीजों को देखने) और शैक्षणिक (पढ़ाई-लिखाई) कार्यों से पूरी तरह से रोक दिया गया है. इन सभी को एसआरएन अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक कार्यालय से अटैच किया गया है. इसके अलावा, आदेश में साफ कहा गया है कि इन डॉक्टरों को हर कार्य दिवस पर ऑफिस में खुद मौजूद होकर अपनी हाजिरी लगानी होगी.
हीटवेव को देखते हुए हड़ताल खत्म, सुचारू हुईं सेवाएं
इस बवाल के बाद अस्पताल के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे, जिससे मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था. हालांकि, अब राहत की बात यह है कि तीन दिन बाद डॉक्टरों की यह हड़ताल खत्म हो गई है. प्रदेश में चल रही भयंकर ‘हीटवेव’ (लू) और जनहित को देखते हुए, सीनियर शिक्षकों के समझाने के बाद जूनियर डॉक्टर काम पर लौटने के लिए राजी हो गए हैं. अस्पताल में सभी चिकित्सा सेवाएं फिर से पूरी तरह बहाल कर दी गई हैं.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें


