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18 साल पहले भी MI की हुई थी जमकर पिटाई, वैभव-यशस्वी की तरह एक लेफ्टी ने खूब कूटा, 231 का स्ट्राइक रेट, 42 गेंद पर 100

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नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर जब कोई बाएं हाथ का बल्लेबाज अपनी लय में होता है, तो वह किसी कलाकार की पेंटिंग जैसा सुंदर और किसी तूफान जैसा विनाशकारी लगता है. हाल ही में वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल ने जिस अंदाज में मुंबई इंडियंस के गेंदबाजों की बखिया उधेड़ी, उसने क्रिकेट प्रेमियों को आईपीएल के उस सुनहरे दौर की याद दिला दी जब एक ऑस्ट्रेलियाई ‘तूफान’ ने डी वाई ए पाटिल मैदान के मैदान पर तबाही मचाई थी.

बात हो रही है एडम गिलक्रिस्ट की, जिन्होंने 2008 में मुंबई इंडियंस के खिलाफ एक ऐसी पारी खेली थी, जो आज भी टी20 क्रिकेट के इतिहास में ‘क्लीन हिटिंग’ का सबसे बेहतरीन उदाहरण मानी जाती है. उस मैच में अंपायरिंग कर रहे पाकिस्तान के असद रऊफ ने बताया कि गिलक्रिस्ट जिस अंदाज में गेंदों को बाउंड्री पार पहुंचा रहे थे उसको देखकर बतौर अंपायर पहली बार डर लगा था कि गेंद कहीं उनकी तरफ ना आ जाए.

जब गिलक्रिस्ट के बल्ले से बरसी थी आग

साल 2008, आईपीएल का पहला सीजन डेक्कन चार्जर्स और मुंबई इंडियंस के बीच मुकाबला था. मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 154 रनों का एक सम्मानजनक लक्ष्य रखा था. उस दौर में 150+ का स्कोर एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य माना जाता था लेकिन एडम गिलक्रिस्ट के मन में कुछ और ही चल रहा था.जैसे ही गिलक्रिस्ट क्रीज पर उतरे, उन्होंने ‘सम्मान’ शब्द को डिक्शनरी से बाहर कर दिया और उन्होंने केवल 42 गेंदों पर अपना शतक पूरा कर लिया. यह उस समय का सबसे तेज शतक था. गिलक्रिस्ट की इस पारी की सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने मुंबई के किसी भी गेंदबाज को नहीं बख्शा. शॉन पोलाक से लेकर आशीष नेहरा तक, हर कोई गिलक्रिस्ट के रडार पर था.

96 रन सिर्फ बाउंड्री से: एक अविश्वसनीय आंकड़ा

गिलक्रिस्ट ने अपनी 109 रनों की नाबाद पारी में कुल 9 चौके और 10 गगनचुंबी छक्के जड़े. अगर आप गणित लगाएं, तो उनके 109 रनों में से 96 रन सिर्फ बाउंड्री (चौकों और छक्कों) से आए थे. उन्होंने महज 47 गेंदों का सामना किया और 231.91 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए. उस रात गिलक्रिस्ट सिर्फ क्रिकेट नहीं खेल रहे थे, बल्कि वह मुंबई के गेंदबाजों के आत्मविश्वास के साथ खिलवाड़ कर रहे थे. गेंद बल्ले से टकराते ही रॉकेट की रफ्तार से सीमा रेखा के पार जा रही थी.  उनके साथ क्रीज पर मौजूद वीवीएस लक्ष्मण सिर्फ एक दर्शक की तरह खड़े होकर इस ऐतिहासिक बल्लेबाजी का लुत्फ उठा रहे थे.

155 का लक्ष्य और 12 ओवर का खेल

अक्सर 155 रनों का पीछा करते हुए टीमें संभलकर खेलती हैं, लेकिन गिलक्रिस्ट और लक्ष्मण की जोड़ी ने मुंबई इंडियंस को संभलने का मौका ही नहीं दिया. जिस लक्ष्य को हासिल करने में 20 ओवर लगते हैं, उसे इस जोड़ी ने महज 12 ओवर (72 गेंदें) में हासिल कर लिया. डेक्कन चार्जर्स ने बिना कोई विकेट खोए 10 विकेट से यह मैच जीत लिया.

वैभव और यशस्वी में गिलक्रिस्ट की झलक

आज जब हम यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा बल्लेबाजों को मुंबई इंडियंस के खिलाफ निडर होकर खेलते देखते हैं, तो गिलक्रिस्ट की वही आक्रामकता याद आती है. यशस्वी का क्लास और वैभव की क्लीन हिटिंग हमें बताती है कि बाएं हाथ के बल्लेबाजों का दबदबा आज भी कायम है. एडम गिलक्रिस्ट ने 2008 में जो मानक स्थापित किए थे, आज की युवा पीढ़ी उसी रास्ते पर चल रही है. 42 गेंदों का वह शतक आज भी आईपीएल इतिहास की सबसे प्रभावशाली पारियों में गिना जाता है, क्योंकि उसने बताया था कि टी20 क्रिकेट में ‘पावरप्ले’ का असली इस्तेमाल कैसे किया जाता है.



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