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न फल-फूल, न प्रसाद…इंद्र से जुड़े यूपी के इस रहस्यमयी मंदिर में मन्नत पूरी होने पर चढ़ाया जाता है नल

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Baba Ekhottarnath Nath Temple Pilibhit: क्या आपने कभी किसी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है जहां मन्नत पूरी होने पर मिठाई या प्रसाद नहीं, बल्कि हैंडपंप चढ़ाया जाता है? उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में गोमती नदी के किनारे स्थित बाबा इकोत्तर नाथ मंदिर अपनी इसी अनोखी परंपरा के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवराज इंद्र द्वारा स्थापित यह 71वां शिवलिंग आज भी कई रहस्यों को समेटे हुए है. यहां का शिवलिंग न केवल दिन में तीन बार रंग बदलता है, बल्कि मान्यता है कि आज भी हर रात स्वयं इंद्र देव यहां आकर पूजा करते हैं.

पीलीभीत: आस्था की दुनिया में आपने कई चमत्कारी मंदिरों के बारे में सुना होगा, लेकिन उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में एक ऐसा मंदिर है जिसकी परंपरा आपको हैरान कर देगी. पूरनपुर तहसील के घने जंगलों के बीच गोमती नदी के तट पर स्थित बाबा इकोत्तर नाथ का मंदिर (baba ekottar nath temple pilibhit) अपने आप में अनूठा है. यहां भक्त अपनी मुराद पूरी होने पर फल-फूल नहीं, बल्कि मंदिर परिसर में हैंडपंप (नल) लगवाते हैं. आस्था का यह स्वरूप सचमुच अनोखा है.

देवराज इंद्र और 71वें शिवलिंग की पौराणिक कथा
बाबा इकोत्तर नाथ मंदिर का इतिहास सतयुग और देवराज इंद्र से जुड़ा हुआ है. स्थानीय निवासी बृजेश कुमार ने मंदिर की मान्यता पर जानकारी देते हुए बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महर्षि गौतम ने इंद्रदेव को श्राप दिया था, तो उस श्राप से मुक्ति पाने के लिए इंद्र ने गोमती नदी के किनारे कई शिवलिंग स्थापित किए थे.

इसी कड़ी में जो 71वां शिवलिंग स्थापित हुआ, उसे ही ‘बाबा इकोत्तर नाथ’ के नाम से पूजा जाता है. लोगों का अटूट विश्वास है कि आज भी हर रात स्वयं इंद्र देव इस मंदिर में आकर बाबा का पहला जलाभिषेक और पूजन करते हैं. सुबह मंदिर के कपाट खुलने पर वहां मिलने वाले विशेष निशान इस दिव्य उपस्थिति का प्रमाण माने जाते हैं.

मन्नत पूरी होने पर नल का दान
इस मंदिर की सबसे चर्चित बात यहां हैंडपंप चढ़ाने की रीत है. वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री ने बताया कि श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा के दरबार में मांगी गई कोई भी दुआ खाली नहीं जाती. जब भक्त की मुराद पूरी हो जाती है, तो वह आभार प्रकट करने के लिए मंदिर परिसर में एक नया नल लगवाता है. भक्तों का मानना है कि पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य है, इसलिए यहां हैंडपंप लगवाने की परंपरा शुरू हुई. आज मंदिर के चारों ओर लगे सैकड़ों हैंडपंप भक्तों के अटूट भरोसे की गवाही देते हैं.

दिन में तीन बार रंग बदलता है चमत्कारी शिवलिंग
मंदिर की महिमा केवल परंपराओं तक सीमित नहीं है, यहां का शिवलिंग भी किसी चमत्कार से कम नहीं है. श्रद्धालुओं और प्रत्यक्षदर्शिओं का कहना है कि यह शिवलिंग दिन भर में तीन बार अपना रंग बदलता है. सुबह के समय शिवलिंग का रंग अलग होता है, दोपहर में यह किसी और रंग का नजर आता है और शाम होते-होते इसकी आभा पूरी तरह बदल जाती है. शिवलिंग के इस अद्भुत रूप को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां खिंचे चले आते हैं. जंगलों के बीच स्थित यह सिद्ध पीठ आज पूरे देश में अपनी एक खास पहचान बना चुका है.

About the Author

Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें



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