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केकेआर के लिए इस वक्त कुछ भी सही नहीं चल रहा है. फिन एलन रन नहीं बना पा रहे हैं, लेकिन फिर भी टीम में टिम सिफर्ट को मौका नहीं दिया जा रहा. कैमरन ग्रीन पर लगाया गया बड़ा दांव अब भारी पड़ता दिख रहा है ना बल्ले से रन निकल रहे हैं और ना ही गेंद से कोई असर दिख रहा है.
KKR के कोच अभिषेक नायर और कप्तान अंजिक्य रहाणे बन गए हैं टीम की सबसे कमजोर कड़ी
नई दिल्ली. आईपीएल के इस सीज़न में 193 रन का स्कोर अब “पार” माना जा रहा है लेकिन जब आपकी टीम चार-चार कैच छोड़ दे और फिर भी लक्ष्य का पीछा करने में बुरी तरह नाकाम हो जाए, तो यह सिर्फ हार नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के टूटने की कहानी बन जाती है. चेपॉक में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जहां जीत की उम्मीद धीरे-धीरे निराशा में बदल गई.
केकेआर के लिए इस वक्त कुछ भी सही नहीं चल रहा है. फिन एलन रन नहीं बना पा रहे हैं, लेकिन फिर भी टीम में टिम सिफर्ट को मौका नहीं दिया जा रहा. कैमरन ग्रीन पर लगाया गया बड़ा दांव अब भारी पड़ता दिख रहा है ना बल्ले से रन निकल रहे हैं और ना ही गेंद से कोई असर दिख रहा है. टीम के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में से एक रिंकू सिंह का खराब फॉर्म भी चिंता बढ़ा रहा है, और ऐसे में कप्तान अजिंक्य रहाणे एक बार फिर आलोचनाओं के घेरे में आ गए हैं.
ग्रीन को ‘रेड कॉर्ड’
अब केकेआर के लिए हर मैच एक फाइनल जैसा है. रास्ता मुश्किल जरूर है, लेकिन विकल्प भी कोई नहीं बचा है और जहां तक कैमरन ग्रीन के निवेश की बात है यह अब “ग्रीन” से ज्यादा “रेड” नजर आ रहा है. यह अनुभव भविष्य के लिए एक बड़ा सबक साबित हो सकता है.ग्रीन पर किए गए निवेश से लेकर पांच में से चार हार तक, सब कुछ कोच अभिषेक नायर के लिए मुश्किलें बढ़ाता जा रहा है. यूपी वॉरियर्ज के साथ उनका WPL अभियान पहले ही निराशाजनक रहा था, और अब आईपीएल में हालात और खराब होते जा रहे हैं. अगर जल्द ही चीजें नहीं सुधरीं, तो टीम के पास बड़े बदलावों के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा.
टीम में माहौल तनावपूर्ण
अगर समस्या की जड़ खोजने की कोशिश करें, तो यह किसी एक कारण तक सीमित नहीं है चोटों ने टीम को प्रभावित किया, फिर चयन में गलतियां हुईं, और खराब फॉर्म ने हालात और बिगाड़ दिए. अब स्थिति यह है कि पूरी टीम दबाव में दिख रही है. हार का डर खिलाड़ियों के खेल में साफ झलक रहा है, और इस मानसिकता से बाहर निकलना आसान नहीं होगा. नायर और रहाणे दोनों ही काफी गंभीर स्वभाव के माने जाते हैं ऐसे समय में जब टीम पहले से ही दबाव में है, यह गंभीरता माहौल को और भारी बना सकती है. केकेआर को अब थोड़ा हल्का माहौल बनाने की जरूरत है.
वापसी की राह कठिन
24 घंटे सिर्फ क्रिकेट की बातें करना मददगार नहीं होगा. वे नतीजों को बदल नहीं सकते, ना ही टीम संयोजन को पीछे जाकर सुधार सकते हैं ऐसे में बेहतर यही होगा कि दो दिन का ब्रेक लेकर दिमाग को शांत किया जाए और फिर नई रणनीति के साथ वापसी की जाए. केकेआर ने पहले भी वापसी की है 2021 में उन्होंने कोविड ब्रेक के बाद चमत्कारी प्रदर्शन करते हुए टूर्नामेंट में शानदार वापसी की थी लेकिन इस बार कोई ब्रेक नहीं है, और मैचों के बीच समय भी बेहद कम है, जिससे चुनौती और कठिन हो गई है. आज बंगाली नववर्ष (पोइला बोइसाख) है, लेकिन कोलकाता की गर्मी और टीम के खराब प्रदर्शन ने फैंस का उत्साह ठंडा कर दिया है. फिर भी हर गिरावट के बाद एक नई शुरुआत होती है, और शायद यह मौका भी केकेआर के लिए नई उम्मीद लेकर आए.


