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दक्षिण एशिया विशेषज्ञ के. एलन क्रोनस्टेड द्वारा तैयार की गई CRS रिपोर्ट, पाकिस्तान को पीड़ित और आशावादी – दोनों रूपों में दिखाई देता है. जहां एक ओर इस्लामाबाद घरेलू हिंसा में अचानक आई तेज़ी से जूझ रहा है, जिसके अशांत बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववाद और खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ती स्थिति शामिल है. वहीं दूसरी ओर वह उन आतंकवादी नेटवर्कों को पनाह देना जारी रखे हुए है, जिन्होंने लंबे समय से भारत को प्रभावित किया है.
पाकिस्तान के आतंकी संगठन भारत के खिलाफ अपनी कार्रवाई को अंजाम देने में लगे हैं. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. अमेरिका की कांग्रेस रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर उस सच्चाई पर मुहर लगा दी है, जिसे भारत सालों से दुनिया के सामने रखता आया है कि पाकिस्तान सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि आतंकवाद का स्थायी ठिकाना बन चुका है. 25 मार्च 2026 की इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पाकिस्तान की जमीन पर बैठे आतंकी संगठन आज भी खुलकर भारत के खिलाफ साजिशें रच रहे हैं, खासकर जम्मू और कश्मीर को निशाना बनाकर.
सीआरएस की ‘इन फोकस’ रिपोर्ट में 15 खतरनाक आतंकी संगठनों का जिक्र किया गया है, जिनमें से कई को अमेरिका पहले ही विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) घोषित कर चुका है. इनमें शामिल हैं: लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हरकत-उल जिहाद इस्लामी, हरकत उल-मुजाहिदीन और हिज्बुल मुजाहिदीन. ये सभी संगठन सालों से भारत, खासकर कश्मीर में आतंक फैलाने की साजिशें रचते रहे हैं.
आतंकियों के लिए ‘स्वर्ग’ बना पाकिस्तान
जैश के हथियारों से लैस 500 आतंकी हैं, जबकि हिज्बुल के 1500 कैडर हैं. रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि ये आतंकी संगठन पाकिस्तान में लगभग बेखौफ और बिना किसी रोक-टोक के काम कर रहे हैं. यानी एक तरफ पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंक के खिलाफ बयान देता है, तो दूसरी तरफ उसकी जमीन पर ही आतंकवाद पनप रहा है. यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टमेटिक शेल्टर की ओर इशारा करता है.
कई ‘ऑपरेशन’ के बाद भी आतंकी ग्रुप एक्टिव
सीआरएस का कहना है, “कई बड़े मिलिट्री ऑपरेशन, जिनमें हवाई हमले भी शामिल हैं – और लाखों ‘इंटेलिजेंस ऑपरेशन’ भी उन कई आतंकवादी समूहों को हराने में नाकाम रहे हैं, जिन्हें अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित घोषित किया हुआ है, और जो अभी भी पाकिस्तान की धरती पर सक्रिय हैं.” 2014 में एक ‘राष्ट्रीय कार्य योजना’ (नेशनल एक्शन प्लान) बनाई गई थी, जिसका मकसद हथियारबंद आतंकवादी समूहों और मिलिशिया को खत्म करना था; इसके बावजूद, ये समूह आज भी सक्रिय हैं.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें




