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ऐसा पहले कभी नहीं हुआ… काजीरंगा से कान्हा तक 2000 KM का सफर, खतरनाक वाइल्ड बफेलो का सबसे बड़ा रीलोकेशन

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काजीरंगा से कान्हा तक 2000 KM का सफर, वाइल्ड बफेलो का सबसे बड़ा रीलोकेशन

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अधिकारियों का कहना है कि यह कदम लगभग एक सदी के बाद इस प्रजाति की वापसी का प्रतीक है, जिससे एक लंबे समय से चली आ रही पारिस्थितिक कमी पूरी हो गई है. वाइल्ड वॉटर बफेलो को, जिन्हें विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए क्रेट में सख्त पशु-चिकित्सा देखरेख में लाया गया है, शुरू में ‘सॉफ्ट-रिलीज़’ बाड़ों में रखा जाएगा; ऐसा इसलिए किया जाएगा ताकि वे पूरी तरह से जंगल में छोड़े जाने से पहले वहाँ के माहौल के अनुकूल ढल सकें.

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दुनिया में वाइल्ड वॉटर बफेलो की तादाद सिर्फ 4000 ही है. (एआई)

नई दिल्ली. भारत में वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन का एक बड़ा और ऐतिहासिक काम हुआ है. देश का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ रीलोकेशन प्रोजेक्ट सरेआम हो गया है. काजीरंगा नेशनल पार्क से खतरनाक वाइल्ड वॉटर बफेलो को शिफ्ट किया जा रहा है. इन बफेलो को 2000 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व लाया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट में कई लुप्तप्राय बफेलो को नई जगह बसाया जाएगा. पहले बैच में चार बफेलो कान्हा में रिलीज कर दिए गए हैं. इनमें तीन फीमेल और एक मेल बफेलो शामिल है.

सेंट्रल इंडिया में इस प्रजाति को बचाने का यह सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक है. दशकों पहले मध्य प्रदेश से वाइल्ड बफेलो एकदम गायब हो गए थे. एक सदी बाद इनकी वापसी से इकोसिस्टम में भारी बदलाव आएगा. अधिकारियों को इस प्रोजेक्ट से बड़ा उम्मीद है. इस मास्टरप्लान से मध्य प्रदेश के जंगल एक बार फिर पूरी तरह से आबाद होंगे.

काजीरंगा से 50 बफेलो को कान्हा लाने का प्लान
असम के काजीरंगा में वाइल्ड वॉटर बफेलो की सबसे बड़ी आबादी रहती है. प्रोजेक्ट के तहत 50 बफेलो को काजीरंगा से कान्हा शिफ्ट किया जाएगा. असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा और एमपी के सीएम मोहन यादव की बड़ी मीटिंग हुई थी. आठ जनवरी को गुवाहाटी में हुई मीटिंग में इस प्लान पर मुहर लगी. दोनों राज्यों ने बफेलो को तीन बैच में शिफ्ट करने का फैसला किया है. यह भारी रीलोकेशन प्रोसेस अगले तीन साल तक एकदम जारी रहेगा. ये 50 बफेलो सेंट्रल इंडिया में लॉन्ग टर्म ब्रीडिंग प्रोग्राम का आधार बनेंगे.

सख्त मेडिकल सुपरविजन में हुआ ट्रांसपोर्ट
जानवरों की सेफ्टी के लिए बहुत ज्यादा सख्त मेडिकल सुपरविजन रखा गया है. बफेलो को एक खास डिजाइन वाले क्रेट में रखकर ट्रांसपोर्ट किया गया है. कान्हा में इन्हें शुरुआत में साफ्ट रिलीज बाड़े में रखा जाएगा. इससे बफेलो को नए माहौल में एडजस्ट होने में बहुत भारी मदद मिलेगी. बाद में इन्हें पूरी तरह से वाइल्ड लाइफ में रिलीज कर दिया जाएगा. अधिकारी जानवरों की सेफ्टी को लेकर बहुत ज्यादा अलर्ट और सावधान हैं.

दुनिया भर में सिर्फ 4000 बफेलो बचे हैं
ग्लोबल लेवल पर वाइल्ड वॉटर बफेलो की आबादी बहुत ज्यादा खतरे में है. पूरी दुनिया में अब सिर्फ चार हजार बफेलो ही बचे हुए हैं. सबसे अहम बात है कि इनमें से 90 परसेंट आबादी सिर्फ भारत में है. सबसे ज्यादा बफेलो असम के काजीरंगा नेशनल पार्क में पाए जाते हैं. अरुणाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी इनकी छोटी आबादी मौजूद है. काजीरंगा नेशनल पार्क की फील्ड डायरेक्टर डॉक्टर सोनाली घोष ने अपना बयान दिया है. डॉक्टर सोनाली घोष ने कहा, ‘इस रीलोकेशन से बायोडायवर्सिटी को भारी बूस्ट मिलेगा’. अधिकारी मानते हैं कि बफेलो के आने से कान्हा के इकोसिस्टम का बैलेंस बनेगा. महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ भी अब वाइल्ड बफेलो को बचाने के ऐसे ही कदम उठा रहे हैं.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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