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Blueberry Farming In Bihar: बिहार के किसान अब गेहूं-मक्का के साथ-साथ विदेशी सुपर फूड ब्लूबेरी से भी मुनाफा कमाएंगे. बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) सबौर के वैज्ञानिकों ने अमेरिकी जलवायु में उगने वाली ब्लूबेरी का बिहार की मिट्टी पर सफल परीक्षण किया है. कम जमीन में अधिक आमदनी देने वाली यह एडवांस फार्मिंग तकनीक जल्द ही किसानों के खेतों तक पहुंचेगी. जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है.
भागलपुर: पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब बिहार के किसान विदेशी फलों से भी मालामाल होंगे. बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जो राज्य के कृषि परिदृश्य को बदल सकती है. विश्वविद्यालय अब अमेरिकी और ठंडे प्रदेशों के सुपर फूड माने जाने वाले ब्लूबेरी को बिहार की जलवायु में उगाने पर शोध कर रहा है. जिसमें वैज्ञानिकों को प्रारंभिक सफलता मिल गई है.
कम जमीन, अधिक मुनाफा
बीएयू के कुलपति डॉ.डी.आर. सिंह ने बताया कि समय के साथ किसानों के पास जोत (जमीन) कम होती जा रही है. पारंपरिक खेती जैसे गेहूं, मक्का और चना से अब उतनी आमदनी संभव नहीं है जितनी एक परिवार की जरूरत है. ऐसे में एडवांस फार्मिंग ही एकमात्र विकल्प है. इसी उद्देश्य के साथ विश्वविद्यालय ने ब्लूबेरी पर रिसर्च शुरू की. ताकि किसान कम क्षेत्र में खेती कर अत्यधिक मुनाफा कमा सकें.
विदेशी फल पर स्वदेशी रिसर्च
ब्लूबेरी मुख्य रूप से अमेरिका और ठंडे देशों का फल है. बीएयू के वैज्ञानिकों ने विश्वविद्यालय के एक बड़े प्रक्षेत्र में इसकी अलग-अलग वैरायटी लगाई हैं. शोध के दौरान कई पौधों में फूल और फल आने शुरू हो गए हैं. वर्तमान में वैज्ञानिक यह देख रहे हैं कि कौन सी किस्म और कौन सी तकनीक बिहार की मिट्टी और तापमान के लिए सबसे सटीक है. शोध दल विदेशी ब्लूबेरी और यहां उगाई गई ब्लूबेरी की गुणवत्ता, स्वाद और पोषक तत्वों के अंतर का भी बारीकी से अध्ययन कर रहा है.
किसानों के लिए क्यों है यह वरदान?
ब्लूबेरी को सुपर फूड कहा जाता है. क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा भरपूर होती है. जिस कारण बाजार में इसकी कीमत बहुत अधिक होती है. ब्लूबेरी महंगे दामों पर बिकती है. जिससे किसानों की आय कई गुना बढ़ सकती है. इसे छोटे भूखंडों या नियंत्रित वातावरण में उगाकर भी बेहतर रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है. सफल रिसर्च के बाद इसे बिहार के अन्य जिलों में विस्तारित किया जाएगा. जिससे स्थानीय स्तर पर नए बाजार विकसित होंगे. कुलपति को उम्मीद है कि जल्द ही रिसर्च की प्रक्रिया पूरी कर इसकी उन्नत किस्म और खेती की तकनीक किसानों तक पहुंचाई जाएगी. यदि यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा तो बिहार जल्द ही विदेशी फलों के उत्पादन में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा होगा.
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