नई दिल्ली. कोलकाता नाइट राइडर्स के प्रशंसक जब राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में मैच देखने बैठे थे, तो उन्हें यह अंदाज़ा नहीं था कि वे क्रिकेट इतिहास के एक दुर्लभ पल के गवाह बनने वाले हैं. जब सुनील नरेन ने मैच के आखिरी ओवर में अपना जादुई हाथ घुमाया और सलिल अरोड़ा को पवेलियन भेजा, तो स्टेडियम में शोर तो हुआ ही, साथ ही क्रिकेट के सांख्यिकीविदों की डायरी में एक नया कीर्तिमान दर्ज हो गया. केकेआर टी20 क्रिकेट के इतिहास में स्पिन गेंदबाजी से 650 विकेट पूरे करने वाली पहली आईपीएल टीम बन गई.
सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के खिलाफ यह दिन केकेआर के स्पिनरों के नाम रहा. वरुण चक्रवर्ती, जो पिछले कुछ समय से केकेआर की स्पिन कमान के मुख्य सिपाही रहे हैं. उन्होंने दिखा दिया कि क्यों उन्हें टी20 का सबसे चालाक गेंदबाज माना जाता है. उन्होंने 36 रन देकर 3 विकेट चटकाए, जिसमें ट्रैविस हेड, समरन रविचंद्रन और अनिकेत वर्मा के महत्वपूर्ण विकेट शामिल थे. वरुण ने जब बीच के ओवरों में अपनी फिरकी का जाल बिछाया, तो एसआरएच के मध्यक्रम की कमर टूट गई.
केकेआर ने आईपीएल में रचा इतिहास.
दूसरी तरफ, सुनील नरेन का अनुभव काम आया. पावरप्ले में नरेन ने शानदार गेंदबाजी की, हालांकि शुरुआती तीन ओवरों में उन्हें विकेट नहीं मिला. लेकिन असली कहानी अंतिम ओवर में लिखी जानी थी. नरेन ने न केवल अपना 200वां आईपीएल विकेट लिया, बल्कि यही विकेट केकेआर के लिए स्पिन का 650वां टी20 विकेट साबित हुआ. यहीं नहीं रुके, नरेन ने अंतिम गेंद पर इशान किशन को आउट कर अपनी सफलता का स्वाद और गहरा कर दिया.
क्या है इस रिकॉर्ड के पीछे का गणित?
यह उपलब्धि केकेआर के वर्चस्व को दर्शाती है. इन 651 विकेटों में से 605 विकेट केवल आईपीएल के मंच पर आए हैं, जबकि बाकी के विकेट चैंपियंस लीग टी20 में लिए गए हैं.यदि हम पूरी दुनिया में टी20 क्रिकेट के आंकड़ों पर नजर डालें, तो केकेआर का कद बहुत ऊंचा दिखाई देता है. उनसे आगे केवल अंतरराष्ट्रीय टीमें और एक काउंटी क्लब ही है. पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम (821 विकेट), भारतीय राष्ट्रीय टीम (778 विकेट) और इंग्लैंड का लंकाशायर क्लब (754 विकेट) ही ऐसी टीमें हैं जिन्होंने स्पिन से केकेआर से ज्यादा विकेट लिए हैं.
आईपीएल के भीतर, केकेआर का दबदबा निर्विवाद है। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) 620 विकेटों के साथ इस सूची में दूसरे स्थान पर है. हालांकि सीएसके के गेंदबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन वे केकेआर के आंकड़ों से पीछे हैं. सीएसके के आंकड़ों में यह अंतर इसलिए भी हो सकता है क्योंकि वे 2016 और 2017 में दो सीजन के बैन के कारण टूर्नामेंट से बाहर थे, लेकिन केकेआर की निरंतरता और स्पिनरों पर उनका अटूट विश्वास उन्हें बाकी टीमों से अलग बनाता है.
नरेन से लेकर चक्रवर्ती तक स्पिन की विरासत
केकेआर की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है. यह उनकी संस्कृति का हिस्सा है.2012 में जब गौतम गंभीर ने कप्तानी संभाली थी, तब से ईडन गार्डन्स को एक ‘स्पिन का गढ़’ माना जाने लगा था. उस दौर में सुनील नरेन का आगमन केकेआर के लिए एक गेम-चेंजर साबित हुआ. नरेन ने जिस तरह से आईपीएल में खुद को ढाला, वह अपने आप में एक मिसाल है. लेकिन नरेन से पहले भी केकेआर की स्पिन लाइब्रेरी काफी समृद्ध थी. इकबाल अब्दुल्ला और मुरली कार्तिक जैसे गेंदबाजों ने टीम की नींव रखी थी. समय के साथ, नरेन को भी बेहतरीन साझेदार मिले चाहे वो ब्रैड हॉग का अनुभव हो, कुलदीप यादव का रिस्ट-स्पिन जादू हो, या फिर आज के दौर में वरुण चक्रवर्ती की रहस्यमयी गेंदबाजी.
केकेआर के मैनेजमेंट ने हमेशा ऐसे गेंदबाजों पर दांव लगाया जो मैच का रुख बदल सकें. ईडन गार्डन्स की पिचें समय के साथ बदली हैं, लेकिन टीम का स्पिन डीएनए नहीं बदला. केकेआर के लिए 650 विकेट का आंकड़ा सिर्फ एक नंबर नहीं है, यह उस रणनीति की जीत है जो कहती है कि अगर आपके पास मैच जिताने वाले स्पिनर हैं, तो आप दुनिया की किसी भी पिच पर राज कर सकते हैं. आज जब हम केकेआर की इस ऐतिहासिक यात्रा को देखते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि टी20 क्रिकेट, जिसे अक्सर तेज गेंदबाजों का खेल माना जाता है, वहां केकेआर ने स्पिन के जरिए एक नई गाथा लिखी है. नरेन और चक्रवर्ती की यह जुगलबंदी अभी और भी रिकॉर्ड तोड़ने के लिए तैयार है, क्योंकि केकेआर के लिए स्पिन सिर्फ गेंदबाजी नहीं, एक जुनून है.


