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आर फॉस्टर अपना पहला टेस्ट मैच खेलने ऑस्ट्रेलिया की धरती पर उतरते है और पहली ही पारी में 287 रन ठोक देते है. यह आज भी टेस्ट डेब्यू पर बनाया गया दुनिया का सबसे बड़ा स्कोर है लेकिन इस खिलाड़ी की महानता यहीं खत्म नहीं होती. कुछ सालों बाद, यही शख्स सफ़ेद जर्सी उतारकर फुटबॉल के मैदान पर उतरता है और वहां भी अपनी टीम की कप्तानी करता है. जिन्हें दुनिया ‘टिप’ फॉस्टर के नाम से जानती है.
आर फॉस्टर दुनिया के एकमात्र खिलाड़ी जिन्होंने क्रिकेट और फुटबॉल में देश की कप्तानी की
नई दिल्ली. बड़ी पुरानी कहावत है कि ईश्वर हर इंसान को कुछ ना कुछ खास प्रतिभा के साथ धरती पर भेजता है और जो उस टैलेंड को सही समय पर भुना लेता है वो दुनिया में नाम रोशन करता है. इस धरती पर कुछ ऐसे विरले लोग भी आए जिनको भगवान ने कई टैलेंट देकर भेजा और उन महान शख्सियतों ने हर प्रतिभा को प्रदर्सन में तब्दील करके हर क्षेत्र में दुनिया में नाम कमाया. कुछ ऐसे ही प्रतिभा के धनी थे रेजिनाल्ड एर्स्काइन फॉस्टर, एक ऐसा खिलाड़ी जिसने न सिर्फ क्रिकेट में शिखर नहीं छुआ, बल्कि फुटबॉल में भी अपने देश का नेतृत्व किया.
आर फॉस्टर अपना पहला टेस्ट मैच खेलने ऑस्ट्रेलिया की धरती पर उतरते है और पहली ही पारी में 287 रन ठोक देते है. यह आज भी टेस्ट डेब्यू पर बनाया गया दुनिया का सबसे बड़ा स्कोर है लेकिन इस खिलाड़ी की महानता यहीं खत्म नहीं होती. कुछ सालों बाद, यही शख्स सफ़ेद जर्सी उतारकर फुटबॉल के मैदान पर उतरता है और वहां भी अपनी टीम की कप्तानी करता है. जिन्हें दुनिया ‘टिप’ फॉस्टर के नाम से जानती है.
क्रिकेट के मैदान पर धमाका
1903 का सिडनी टेस्ट फॉस्टर ने डेब्यू करते हुए 287 रनों की जो पारी खेली,उसने उस वक्त टेस्ट क्रिकेट के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में ऐसा दबदबा बनाना उस दौर में नामुमकिन जैसा था. उनका यह रिकॉर्ड 1930 तक (ब्रैडमैन के आने तक) कायम रहा.फोस्टर का करियर लंबा नहीं रहा उन्होंने केवल 8 टेस्ट मैच खेले, और 14 पारियों में 46.30 की औसत से 602 रन बनाए लेकिन उनकी छाप इतनी गहरी थी कि आज भी उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है. उनका जीवन यह दिखाता है कि महानता सिर्फ लंबी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि प्रभाव में होती है.
फुटबॉल में भी ‘कैप्टन कूल’
क्रिकेट में रिकॉर्ड बनाने के बाद फॉस्टर रुके नहीं वह एक असाधारण फुटबॉलर भी थे. उन्होंने इंग्लैंड की नेशनल फुटबॉल टीम के लिए 5 मैच खेले और टीम की कप्तानी भी की. वह दुनिया के इकलौते ऐसे खिलाड़ी बने जिन्होंने क्रिकेट और फुटबॉल, दोनों खेलों में इंग्लैंड की नेशनल टीम की कप्तानी की. फॉस्टर का जीवन बहुत लंबा नहीं रहा महज़ 36 साल की उम्र में बीमारी के कारण उनका निधन हो गया. उनके बारे में अक्सर कहा जाता है कि वह एक ऐसे सितारे थे जो बहुत कम समय के लिए चमके, लेकिन उनकी चमक इतनी तेज़ थी कि खेल के इतिहास के दो अलग-अलग पन्ने हमेशा उनके नाम से रोशन रहेंगे.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


