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Agriculture Tips: कृषि एक्सपर्ट डॉ. एन.पी. गुप्ता ने बताया कि गर्मियों में गहरी जुताई का अपना एक वैज्ञानिक और विशेष महत्व है. वैसे तो जुताई की गहराई फसल के प्रकार पर निर्भर करती है. सामान्य फसलों के लिए 6 इंच और गन्ने जैसी गहरी जड़ों वाली फसलों के लिए 9 इंच तक जुताई करना चाहिए. इससे मिट्टी में दबे हानिकारक फंगस, बैक्टीरिया, कीटों के अंडे और लार्वा सतह पर आ जाते है जो तेज धूप या पक्षियों द्वारा नष्ट कर दिए जाते है.
गर्मियों में खेतों की गहरी जुताई खेती-किसानी के लिए बेहद फायदेमंद होता है. खेत की गहरी जुताई करने से मिट्टी का कायाकल्प हो जाता है. भीषण गर्मी के दौरान जब खेत खाली होते है. तब गहरी जुताई करने से न केवल मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है, बल्कि हानिकारक कीटों और बीमारियों का भी प्राकृतिक रूप से अंत हो जाता है. लेकिन गहरी जुताई मानसून की पहली बारिश से पहले कर देनी चाहिए और जुताई करते समय इस बात का भी ध्यान रखें कि गहराई कितनी और किस यंत्र से जुताई करनी चाहिए.
कृषि एक्सपर्ट डॉ. एन.पी. गुप्ता ने बताया कि गर्मियों में गहरी जुताई का अपना एक वैज्ञानिक और विशेष महत्व है. वैसे तो जुताई की गहराई फसल के प्रकार पर निर्भर करती है. सामान्य फसलों के लिए 6 इंच और गन्ने जैसी गहरी जड़ों वाली फसलों के लिए 9 इंच तक जुताई करना चाहिए. इससे मिट्टी में दबे हानिकारक फंगस, बैक्टीरिया, कीटों के अंडे और लार्वा सतह पर आ जाते है जो तेज धूप या पक्षियों द्वारा नष्ट कर दिए जाते है. ऐसे में माना जाता है कि बिना किसी रासायनिक के कीटनाशक के मृदा शोध हो जाता है, मिट्टी में पाए जाने वाले फंगस और हानिकारक कीट मर जाते है.
कीटों और बीमारियों से प्राकृतिक बचाव
मिट्टी के भीतर कई प्रकार के हानिकारक जीव जैसे प्रोटोजोआ, फंगस और बैक्टीरिया लंबे समय तक सुप्त अवस्था में रहते हैं. गहरी जुताई के माध्यम से जब मिट्टी को पलटा जाता है, तो कीट ऊपर आ जाते हैं. मई-जून की चिलचिलाती धूप इन्हें पूरी तरह नष्ट कर देती है. इसके अलावा, मिट्टी के अंदर मौजूद विभिन्न सुंडियों के अंडे और लार्वा भी बाहर निकल आते हैं. इससे अगली फसल में कीटों का प्रकोप काफी हद तक कम हो जाता है और किसानों को महंगे कीटनाशकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.
मिट्टी की जल धारण क्षमता में सुधार
गहरी जुताई का सबसे बड़ा लाभ मिट्टी की संरचना में सुधार होना है. जब मिट्टी की निचली परतों को ऊपर लाया जाता है, तो जमीन का घनत्व कम होता है और वह भुरभुरी हो जाती है. इससे मानसून की पहली बारिश का पानी जमीन के अंदर काफी गहराई तक रिस पाता है. मिट्टी की जल धारण क्षमता (Water Holding Capacity) बढ़ने से सूखे के समय भी पौधों को नमी मिलती रहती है. यह प्रक्रिया भूजल स्तर को सुधारने में भी सहायक होती है, जो लंबे समय तक मिट्टी को खेती के लिए उपजाऊ बनाने के लिए जरूरी है.
नाइट्रोजन स्थिरीकरण और पोषक तत्व
मानसून की पहली बारिश के साथ वातावरण में नाइट्रोजन की प्रचुर मात्रा होती है. जुताई किए हुए खेतों में यह नाइट्रोजन सीधे मिट्टी के संपर्क में आती है और गहराई तक समा जाती है. इसके अलावा, जुताई से मिट्टी में ऑक्सीजन का संचार बढ़ता है, जिससे सूक्ष्म पोषक तत्व पौधों के लिए अधिक सुलभ हो जाते हैं. यह ‘नेचुरल फर्टिलाइजेशन’ फसल की शुरुआती ग्रोथ को जबरदस्त बढ़ावा देता है. गहरी जुताई से खरपतवारों की जड़ें भी सूख जाती हैं, जिससे फसल को पूरा पोषण मिलता है.
गहरी जुताई के लिए सही मार्गदर्शन
किसानों को यह ध्यान रखना चाहिए कि गहरी जुताई केवल तभी करें जब खेत खाली हो और कड़ी धूप हो. जुताई के बाद खेत को कुछ दिनों के लिए खुला छोड़ देना चाहिए ताकि सूर्य की किरणें अपना काम कर सकें. जुताई के लिए मिट्टी के प्रकार और आगामी फसल का ध्यान रखना जरूरी है. अगर खेत में गन्ने की बुआई करनी है, तो 9 इंच की गहराई जरूरी है ताकि जड़ें मजबूती से फैल सकें.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें


