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Agriculture News: गन्ने और गेहूं की पारंपरिक खेती के बीच रामपुर के किसान सुनव्वर अली ने इंदिरा उड़द को अपनी कमाई का नया जरिया बनाया है. इस फसल की सबसे बड़ी खासियत इसका सुपरफास्ट होना है. महज 70 से 75 दिनों में यह पककर तैयार हो जाती है. साल में तीन बार उगाई जाने वाली यह दाल न सिर्फ प्रति बीघा 40 हजार रुपये तक का मुनाफा दे रही है, बल्कि कम पानी और कम लागत की वजह से छोटे किसानों के लिए एटीएम साबित हो रही है. खास बात यह है कि यह फसल खेत की मिट्टी को भी उपजाऊ बनाती है, जिससे अगली फसल में खाद का खर्च कम हो जाता है.
रामपुर के मिलक खानम गांव के किसान सुनव्वर अली ने अपनी 2 एकड़ जमीन पर इंदिरा उड़द की खेती की है. कम समय और कम लागत में अच्छी कमाई देने वाली इस फसल ने उनकी आय को काफी बढ़ा दिया है. सुनव्वर बताते हैं कि उन्होंने फरवरी के महीने में इस उड़द की बुवाई की थी और वे हर साल इसी फसल से बहुत बढ़िया मुनाफा कमा लेते हैं.

इंदिरा उड़द की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ 70 से 75 दिनों के भीतर पूरी तरह तैयार हो जाती है. इसका मतलब यह है कि किसान को फसल काटने के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता. बहुत कम समय में फसल तैयार होने की वजह से किसान साल में कई बार खेती कर सकते हैं. यही वजह है कि सुनव्वर अली जैसे किसान हर सीजन में इसे उगाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं.

इस फसल की एक खास बात यह भी है कि इसे साल में तीन बार उगाया जा सकता है. आप इसे खरीफ, रबी और जायद यानी तीनों सीजन में लगा सकते हैं. इससे किसान का खेत कभी खाली नहीं रहता और हर मौसम में कमाई होती रहती है. खासकर खरीफ सीजन के लिए जून-जुलाई का समय सबसे बेहतर माना जाता है, जिससे बंपर पैदावार मिलती है.
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अगर कमाई और मुनाफे की बात करें, तो सुनव्वर अली इस फसल से प्रति बीघा 35 से 40 हजार रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं. कम लागत में जल्दी तैयार होने वाली यह फसल छोटे किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. अगर सही से देखभाल की जाए, तो उड़द की खेती किसानों के लिए भरोसेमंद कमाई का एक बहुत बड़ा जरिया बन सकती है.

किसान सुनव्वर का कहना है कि उड़द की फसल को कीटों से बचाना बेहद जरूरी होता है. अगर समय रहते कीट नियंत्रण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो फसल को नुकसान हो सकता है. इसलिए किसानों को नियमित रूप से खेत की निगरानी करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर सही दवा का छिड़काव करना चाहिए. सही समय पर देखभाल करने से उत्पादन पर बुरा असर नहीं पड़ता.

सुनव्वर अली के अनुभव के मुताबिक, इंदिरा उड़द एक बीघा जमीन में करीब 3 से 4 क्विंटल तक का उत्पादन दे देती है. यह उत्पादन छोटे किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है. कम जगह में ज्यादा पैदावार मिलने की वजह से खेती की लागत कम आती है और मुनाफा ज्यादा होता है. यही कारण है कि यह किस्म अब किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है.

उड़द की खेती की एक अच्छी बात यह है कि इसमें बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ती. बस समय-समय पर हल्की सिंचाई करनी होती है, जिससे पानी की काफी बचत होती है और खेती का खर्च भी कम रहता है. जिन इलाकों में पानी की थोड़ी कमी है, वहां के किसान भी इस फसल को बहुत आसानी से उगा सकते हैं.

उड़द की खेती सिर्फ अच्छी कमाई ही नहीं देती, बल्कि यह मिट्टी की सेहत को भी सुधारती है. यह फसल मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती है, जिससे जमीन की उपजाऊ शक्ति यानी फर्टिलिटी काफी बढ़ जाती है. इसका सीधा फायदा किसान को अगली फसल में मिलता है. इसलिए इसे फसल चक्र में शामिल करना किसानों के लिए हर तरह से फायदे का सौदा साबित हो रहा है.


