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Operation Sindoor Anniversary: ऑपरेशन सिंदूर में तबाह हुए आतंकी ठिकानों को पाकिस्तान फिर से खड़ा करने में जुट गया है. बहावलपुर, मुजफ्फराबाद और पीओके के कोटली इलाके में नए कैंप, बंकर और लॉन्च पैड बनाए जाने की जानकारी सामने आई है. सैटेलाइट तस्वीरों और खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, ISI और पाक सेना इन गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. भारत की सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं.
पहलगाम हमले के बाद भारत ने जब ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों को तबाह किया था, तब माना जा रहा था कि इस कार्रवाई से आतंक के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. लेकिन एक साल बाद सामने आई नई सैटेलाइट तस्वीरें अलग कहानी बयां कर रही हैं. पाकिस्तान एक बार फिर उन्हीं तबाह हो चुके आतंकी ढांचों को खड़ा करने में जुट गया है. बहावलपुर से लेकर पीओके के कोटली तक निर्माण गतिविधियां तेज हो चुकी हैं. खुफिया सूत्रों का दावा है कि यह सिर्फ पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि भारत के खिलाफ एक नए ‘डर्टी प्लान’ की तैयारी है. तस्वीरों में कई जगह नए बंकर, अस्थायी लॉन्च पैड और हाई-टेक ट्रेनिंग कैंप दिखाई दे रहे हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार आतंकियों के ठिकाने पहले से ज्यादा छिपे हुए और आधुनिक बनाए जा रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक जैश-ए-मोहम्मद अपने सबसे बड़े ठिकाने जामिया सुब्हान अल्लाह कॉम्प्लेक्स को फिर से तैयार कर रहा है. यही वह कैंप था, जिसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने भारी नुकसान पहुंचाया था. सैटेलाइट इमेज में अब वहां दोबारा निर्माण सामग्री, नई इमारतों की नींव और सुरक्षा घेरा दिखाई दे रहा है. माना जा रहा है कि पाकिस्तान की सेना और ISI इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रही हैं. आतंकी ढांचे को सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं दी जा रही, बल्कि आसपास सुरक्षा तंत्र भी मजबूत किया गया है. यही वजह है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियां अब इन गतिविधियों को बेहद गंभीरता से देख रही हैं.

इस बार पाकिस्तान की रणनीति भी बदली हुई नजर आ रही है. पहले बड़े-बड़े कैंप बनाए जाते थे जिन्हें सैटेलाइट या ड्रोन से पहचानना आसान था. लेकिन अब छोटे और मिनी टेरर कैंप तैयार किए जा रहे हैं. ये कैंप घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और दुर्गम क्षेत्रों में बनाए जा रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि इनमें हाई-टेक कम्युनिकेशन सिस्टम और अंडरग्राउंड बंकर जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जा रही हैं. इसका मकसद साफ है भारतीय निगरानी से बचना और जरूरत पड़ने पर आतंकियों को तेजी से लॉन्च करना. सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि आने वाले समय में ये छोटे कैंप बड़े खतरे में बदल सकते हैं.
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बहावलपुर के अलावा मुजफ्फराबाद और मुरिदके में भी हलचल तेज हो गई है. मुरिदके को लश्कर-ए-तैयबा का बड़ा गढ़ माना जाता है. यहां फिर से ट्रेनिंग गतिविधियां शुरू होने की खबरें हैं. खुफिया रिपोर्टों के अनुसार कई पुराने आतंकियों को दोबारा सक्रिय किया जा रहा है और नए लड़ाकों को ट्रेनिंग देने का काम चल रहा है. दूसरी तरफ अफगानिस्तान सीमा से लगे खैबर पख्तूनवा इलाके में भी कुछ ट्रेनिंग कैंप शिफ्ट किए गए हैं. माना जा रहा है कि पाकिस्तान भारत की एयर स्ट्राइक से बचने के लिए आतंकी ढांचे को ज्यादा फैलाकर चला रहा है, ताकि एक जगह हमला होने पर पूरा नेटवर्क खत्म न हो.

POK का कोटली इलाका भी एक बार फिर चर्चा में है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यहां भारतीय कार्रवाई में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था. अब इसी इलाके में नए बंकर और लॉन्च पैड बनाए जाने की जानकारी सामने आई है. LOC के करीब स्थित यह इलाका लंबे समय से घुसपैठ का रास्ता माना जाता रहा है. स्थानीय सूत्रों का दावा है कि रात के समय निर्माण गतिविधियां तेज हो जाती हैं और इलाके में सेना की आवाजाही भी बढ़ गई है. तस्वीरों में कई जगह नई खुदाई और अस्थायी ढांचे दिखाई दे रहे हैं. यह संकेत है कि पाकिस्तान फिर से सीमा पार आतंकवाद को सक्रिय करने की तैयारी कर रहा है.

भारतीय एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. सूत्रों के मुताबिक, सैटेलाइट इमेज, ड्रोन निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस के जरिए हर गतिविधि ट्रैक की जा रही है. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को आतंक के खिलाफ दिखाता है लेकिन जमीन पर तस्वीर बिल्कुल उलट है. यही वजह है कि भारत अब किसी भी गतिविधि को हल्के में नहीं लेना चाहता. पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर ने जिस तरह आतंकी नेटवर्क को झटका दिया था, उसके बाद पाकिस्तान अब ज्यादा चालाकी से अपने कार्ड खेल रहा है.

सीमा पर बढ़ती हलचल और आतंकी ढांचों के पुनर्निर्माण की खबरों ने एक बार फिर सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं. सवाल सिर्फ नए कैंपों का नहीं है, बल्कि उस सोच का है जो हर कार्रवाई के बाद फिर सिर उठाने लगती है. पाकिस्तान की यह नई रणनीति बताती है कि वह सीधे टकराव से बचते हुए प्रॉक्सी वॉर को जिंदा रखना चाहता है. ऐसे में आने वाले महीनों में एलओसी और पीओके की गतिविधियां भारत के लिए बेहद अहम रहने वाली हैं. सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं और माना जा रहा है कि भारत भी हर हरकत का जवाब देने की तैयारी में जुटा हुआ है.


