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ricky ponting 5 records: क्रिकेट के इतिहास में कुछ खिलाड़ी अपने खेल से पहचाने जाते हैं, तो कुछ अपनी रणनीति से. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग उन चुनिंदा दिग्गजों में शुमार हैं, जिन्होंने बल्ले और कप्तानी के दिमाग, दोनों से विश्व क्रिकेट पर राज किया. पोंटिंग केवल एक बल्लेबाज नहीं थे, बल्कि वह जीत की एक ऐसी मशीन थे, जिसने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को उस शिखर पर पहुंचाया जहां से बाकी टीमें बौनी नज़र आती थीं. 2004 से 2011 के बीच टेस्ट और 2002 से 2011 तक वनडे टीम की कप्तानी करने वाले पोंटिंग ने सफलता के जो मानक स्थापित किए, वे आज भी किसी बल्लेबाज या कप्तान के लिए ‘एवरेस्ट की चढ़ाई’ जैसे कठिन हैं.
रिकी पोंटिंग (Ricky Ponting) ने साल 2004 में स्टीव वॉ से कप्तानी की कमान संभाली और 2010 तक टेस्ट क्रिकेट के मैदान पर अपनी चतुर रणनीति का लोहा मनवाया. उन्होंने कुल 77 टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलियाई टीम का नेतृत्व किया. पोंटिंग की कप्तानी की सबसे खास बात उनकी आक्रामकता थी. उनके नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया ने 48 टेस्ट मैचों में शानदार जीत दर्ज की. आंकड़ों के लिहाज से देखें तो टेस्ट क्रिकेट में उनका जीत का प्रतिशत 62 से भी ज्यादा रहा, जो दर्शाता है कि उनके दौर में ऑस्ट्रेलियाई टीम को हराना लगभग नामुमकिन था.

बतौर कप्तान आईसीसी टूर्नामेंट (वर्ल्ड कप, चैंपियंस ट्रॉफी) में सबसे ज्यादा रन बनाने का कीर्तिमान रिकी पोंटिंग के नाम दर्ज है. उन्होंने इन बड़े मंचों पर अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझा और कुल 1752 रन बनाए. यह रिकॉर्ड आज भी अटूट है. पोंटिंग की खासियत यह थी कि वे बड़े मैचों के खिलाड़ी थे. जब भी टीम को सबसे ज्यादा जरूरत होती थी, उनका बल्ला आग उगलता था.

भारतीय क्रिकेट प्रेमी आज भी 2003 के वनडे वर्ल्ड कप फाइनल को नहीं भूल पाए हैं. जोहान्सबर्ग के मैदान पर पोंटिंग ने भारतीय गेंदबाजों की ऐसी धुनाई की थी कि मैच एकतरफा हो गया. उन्होंने फाइनल जैसे दबाव वाले मैच में नाबाद 140 रनों की बेजोड़ पारी खेली थी. इस पारी की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हराकर विश्व कप का खिताब जीता और पोंटिंग ने पहली बार बतौर कप्तान विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया.
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एक बार विश्व कप जीतना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन उसे बरकरार रखना उससे भी कठिन. पोंटिंग ने 2007 के विश्व कप में अपनी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया को फिर से चैंपियन बनाया. सबसे खास बात यह रही कि पूरे टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलियाई टीम अजेय रही. पोंटिंग की रणनीति का ही कमाल था कि वेस्टइंडीज की धरती पर हुई इस प्रतियोगिता में कोई भी टीम ऑस्ट्रेलिया के करीब तक नहीं पहुंच सकी. यह ऑस्ट्रेलिया का लगातार तीसरा और पोंटिंग का बतौर कप्तान दूसरा विश्व कप खिताब था.

विश्व कप के अलावा पोंटिंग ने साल 2009 में ऑस्ट्रेलिया को अपनी कप्तानी में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी भी जिताई. इस टूर्नामेंट में पोंटिंग ने न केवल टीम का शानदार नेतृत्व किया, बल्कि खुद भी बल्ले से कमाल दिखाते हुए सबसे ज्यादा रन बनाए. उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुना गया. यह जीत साबित करती थी कि पोंटिंग सीमित ओवरों के क्रिकेट के निर्विवाद राजा थे.

यदि आईसीसी ट्रॉफियों को सफलता का पैमाना माना जाए, तो पोंटिंग इस सूची में सबसे ऊपर खड़े नजर आते हैं. उन्होंने अपनी कप्तानी में कुल 4 आईसीसी ट्रॉफियां (2 विश्व कप और 2 चैंपियंस ट्रॉफी) जीतीं. इसके अलावा, वह 1999 की विश्व कप विजेता टीम के सदस्य भी थे, हालांकि तब टीम की कमान स्टीव वॉ के हाथों में थी. कुल मिलाकर 5 विश्व कप मेडल उनके नाम हैं, जो उनकी महानता की कहानी खुद बयां करते हैं.

विश्व कप के इतिहास में पोंटिंग सबसे सफल कप्तान माने जाते हैं. उन्होंने 2003 से 2011 के बीच कुल 29 विश्व कप मैचों में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी की, जिनमें से टीम ने 26 मैचों में जीत हासिल की. विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में उनका जीत का प्रतिशत 89.66 रहा, जो किसी भी कप्तान के लिए एक सपने जैसा है. इसके अलावा, लगातार 24 वनडे वर्ल्ड कप मैच जीतने का विश्व रिकॉर्ड भी पोंटिंग की टीम के ही नाम है.

पोंटिंग ने केवल टेस्ट या वनडे नहीं, बल्कि तीनों फॉर्मेट को मिलाकर कुल 324 अंतरराष्ट्रीय मैचों में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी की. इन 324 मैचों में से ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 220 मैचों में फतह हासिल की. यह संख्या बताती है कि पोंटिंग ने लगभग एक दशक तक विश्व क्रिकेट के हर कोने में अपनी जीत का झंडा गाड़ा था।. उन्होंने वनडे क्रिकेट में 75 प्रतिशत से भी अधिक मैच जीतकर एक नया कीर्तिमान रचा था.

मैदान पर आक्रामक दिखने वाले पोंटिंग निजी जीवन में काफी रचनात्मक भी हैं. वे केवल क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि एक लेखक और पब्लिशर भी हैं. उन्होंने खेल की बारीकियों और अपने अनुभवों को साझा करने के लिए ब्रायन मुर्गट्रॉयड और ज्योफ आर्मस्ट्रॉन्ग जैसे लेखकों की किताबें पब्लिश कीं. इतना ही नहीं, साल 2013 में उन्होंने अपनी खुद की बायोग्राफी लिखी और उसे खुद ही पब्लिश भी किया, जिससे उनके बहुमुखी व्यक्तित्व का पता चलता है.

रिकी पोंटिंग का करियर साल 2002 से लेकर 2012 तक कप्तानी और बल्लेबाजी के शिखर पर रहा. उन्होंने वनडे टीम की अगुआई 2002 से 2011 तक की, जबकि टेस्ट टीम को 2004 से 2011 तक संभाला. उनके बनाए गए 5 प्रमुख वर्ल्ड रिकॉर्ड आज भी ऐसे मील के पत्थर हैं, जिन्हें तोड़ना मॉडर्न युग के बल्लेबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. पोंटिंग की विरासत केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि उस ‘विनिंग कल्चर’ में है जो उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई ड्रेसिंग रूम में पैदा किया था.

रिकी पोंटिंग का नाम जब भी लिया जाएगा, एक ऐसे खिलाड़ी की छवि उभरेगी जो हारना नहीं जानता था. उनकी बल्लेबाजी में जहां तकनीकी मजबूती और कलात्मकता थी, वहीं उनकी कप्तानी में चातुर्य और साहस का मिश्रण था. 48 टेस्ट जीत, 220 अंतरराष्ट्रीय जीत और 4 आईसीसी खिताबों के साथ पोंटिंग का सफर क्रिकेट जगत की सबसे सुनहरी कहानियों में से एक है. वे आज भी दुनिया भर के युवा कप्तानों के लिए एक आदर्श हैं, जो सिखाते हैं कि शिखर पर पहुंचना जितना कठिन है, वहां बने रहना उससे कहीं ज्यादा बड़ी चुनौती है.


