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सत्येंद्र लोकल 18 से बताते हैं कि उनकी हैचरी में रोज करीब 4 से 5 करोड़ स्पॉन तैयार होता है. इतने बड़े स्तर पर उत्पादन होने की वजह से यह हैचरी अब इलाके में रोजगार का भी बड़ा केंद्र बन गई है. यहां करीब 100 लोगों को सीधा रोजगार मिला हुआ है. खास बात यह है कि यहां काम करने वाले कई मजदूर पश्चिम बंगाल और कोलकाता से आए हुए हैं. जो लंबे समय से इस काम से जुड़े हैं.
रामपुरः मिलक तहसील क्षेत्र के धनौरा गांव में मौजूद फौजी फिश हैचरी आज मत्स्य पालन के क्षेत्र में बड़ी पहचान बन चुकी है. साल 2002 में शुरू हुई यह हैचरी अब कई राज्यों तक मछली बीज सप्लाई कर रही है. हैचरी के मालिक सत्येंद्र कुमार बताते हैं कि शुरुआत छोटे स्तर से हुई थी लेकिन मेहनत और लगातार काम की वजह से आज उनका कारोबार लाखों रुपये तक पहुंच चुका है.
सत्येंद्र के मुताबिक उनकी हैचरी में रोहू, नैनी, कतला, सिल्वर, ब्रिगेड, कॉमन कार्प और ग्रास समेत सात वैरायटी के मछली बीज तैयार किए जाते हैं. यहां तैयार होने वाला बीज उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और मध्यप्रदेश तक भेजा जाता है. उन्होंने बताया कि कतला मछली सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रजाति मानी जाती है और बाजार में इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है.
100 लोगों को दे रहे रोजगार
सत्येंद्र लोकल 18 से बताते हैं कि उनकी हैचरी में रोज करीब 4 से 5 करोड़ स्पॉन तैयार होता है. इतने बड़े स्तर पर उत्पादन होने की वजह से यह हैचरी अब इलाके में रोजगार का भी बड़ा केंद्र बन गई है. यहां करीब 100 लोगों को सीधा रोजगार मिला हुआ है. खास बात यह है कि यहां काम करने वाले कई मजदूर पश्चिम बंगाल और कोलकाता से आए हुए हैं. जो लंबे समय से इस काम से जुड़े हैं. उन्होंने बताया कि एक सामान्य फिश हैचरी के लिए करीब 7 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ती है लेकिन उनका पूरा फार्म लगभग 25 एकड़ में फैला हुआ है. बड़े स्तर पर तालाब, बीज उत्पादन और मछलियों की देखरेख के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं. पानी में ऑक्सीजन बनाए रखने के लिए एरेटर मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है. जिस पर उन्हें सरकार की तरफ से 30 हजार रुपये की सब्सिडी भी मिली है.
रामपुर बना मछली उत्पादन का केंद्र
सत्येंद्र कुमार का कहना है कि अगर बिजली की सप्लाई 10 घंटे की जगह 18 से 20 घंटे तक मिलने लगे और सरकार की तरफ से सोलर पैनल की सुविधा दी जाए तो डीजल का खर्च काफी कम हो सकता है, क्योंकि रामपुर अब सिर्फ खेती ही नहीं बल्कि मछली बीज उत्पादन का भी बड़ा केंद्र बन चुका है. जिले में इस समय 56 फिश हैचरी संचालित हैं. जहां से हर साल करीब 200 करोड़ मछली बीज उत्तर भारत के कई राज्यों में भेजे जा रहे हैं. मत्स्य विभाग के मुताबिक वर्ष 2025-26 में मछली उत्पादन में 27 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है और 3846 लोगों को रोजगार मिला है. इतनी बड़ी संख्या में हैचरी और उत्पादन होने की वजह से बिजली की जरूरत भी काफी बढ़ गई है. हैचरी संचालकों का कहना है कि लगातार बिजली न मिलने से एरेटर और मोटर चलाने में दिक्कत होती है. जिससे डीजल का खर्च बढ़ जाता है अगर बिजली आपूर्ति बढ़े और सोलर सुविधा मिले तो मछली पालन का कारोबार और तेजी से आगे बढ़ सकता है.
इससे मत्स्य पालकों का मुनाफा कई गुना बढ़ जाएगा. उन्होंने यह भी मांग उठाई कि मछली बीज का एक तय न्यूनतम मूल्य होना चाहिए ताकि किसानों को सही दाम मिल सके. फिलहाल उनकी फौजी फिश हैचरी हर सीजन में करीब 80 से 90 लाख रुपये का कारोबार कर रही है. एक सीजन लगभग 6 महीने का होता है. गांव में शुरू हुआ यह काम आज न सिर्फ लाखों का कारोबार बन चुका है बल्कि सैकड़ों लोगों के लिए रोजगार और किसानों के लिए कमाई का मजबूत जरिया भी बन गया है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


