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IPL 2026 honey trap controversy: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने आईपीएल 2026 के बीच हनी ट्रैप को लेकर एडवाइजरी जारी की है. बीसीसीआई ने खिलाड़ियों को लेकर कुछ सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिसका पालन नहीं किए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. हाल के दिनों में बीसीसीआई को संज्ञान हुआ है कि कुछ बाहरी लोगों का आईपीएल टीम के होटल और टीम बसों तक पहुंच हो गई है.
आईपीएल हनी ट्रैप को लेकर बीसीसीआई ने दी वॉर्निंग
नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के बीच हनी ट्रैप को लेकर बीसीसीआई में खलबली मच गई है. आनन-फानन बोर्ड ने लीग की सभी 10 टीमों के लिए आठ पन्नों का एक निर्देश जारी किया है. इस निर्देश में बोर्ड ने आईपीएल प्रोटोकॉल के कुछ गंभीर उल्लंघनों के बारे में चिंता जाहिर की है, जिनका भविष्य में सख्ती से पालन करना जरूरी होगा. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर अचानक बोर्ड ने हनी ट्रैप को लेकर आईपीएल टीमों को क्यों आगाह किया है. हनी ट्रैप होता क्या है और क्या इससे पहले भी आईपीएल या फिर इंटरनेशनल क्रिकेट में इस तरह का मामला आया था. आइए विस्तार से जानते हैं.
क्या है हनी ट्रैप का इतिहास?
दुनिया में हनी ट्रैप का इतिहास बहुत ही पुराना है. अलग-अलग समय पर इसका नाम भी अलग रहा है. प्राचीन भारत में हनी ट्रैप के लिए सुंदर और आकर्षक महिलाओं का उपयोग किया जाता था जो शत्रु राजाओं को अपने प्रेम जाल में फंसाकर उनकी हत्या कर देती थीं या राज उगलवा लेती थीं. ऐसी महिला को विषकन्या के नाम से जाना था. वहीं आधुनिक समय में हनी ट्रैप की बात करें तो इस शब्द का इस्तेमाल शीत युद्ध के दौरान माना जाता है.
1950 और 1960 के दशक में सोवियत संघ की केजीबी और अमेरिका की सीआईए ने एक-दूसरे के अधिकारियों को फंसाने के लिए बड़े पैमाने पर महिला और पुरुष एजेंटों का इस्तेमाल किया. केजीबी में इसके लिए बाकायदा स्वेलो स्कूल चलाए जाते थे, जहां एजेंटों को रिझाने की कला सिखाई जाती थी.
क्या होता है हनी ट्रैप और ये कैसे काम करता है?
हनी ट्रैप की शुरुआत कब हुई इसे लेकर कोई निश्चित तारीख दर्ज नहीं है, लेकिन इससे जुड़ी कई कहानियां जरूर प्रचलित है. क्योंकि मोहपाश यानी हनी ट्रैप का इस्तेमाल युद्ध और सत्ता के लिए सदियों से होता आ रहा है, ऐसे में इसका इतिहास भी काफी पुराना है. हनी ट्रैप एक ऐसी रणनीति या जाल है जिसमें किसी व्यक्ति को फंसाने के लिए रोमांटिक या यौन संबंधों का लालच दिया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य उस व्यक्ति से गोपनीय जानकारी निकलवाना, उसे ब्लैकमेल करना या उसकी छवि को नुकसान पहुंचाना होता है.
इसके काम करने के तरीके के बारे में बात करें तो इसमें सबसे पहले टारगेट के रूप में ऐसे व्यक्ति को चुना जाता है. ये ऐसा व्यक्ति होता है जिसके पास कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हो या फिर उसे किसी तरह से ब्लैकमेल किया जा सकता हो. इसमें टारगेट से सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स या किसी सार्वजनिक स्थान पर दोस्ती के बहाने संपर्क साधा जाता है. इस प्रक्रिया में अपराधी अक्सर अपनी असली पहचान छिपाकर रखता है. शुरुआत में मीठी बातों और भावनात्मक जुड़ाव के जरिए सामने वाले का भरोसा जीता जाता है. जब टारगेट पूरी तरह भरोसे में आ जाता है तो उसे मिलने के लिए बुलाया जाता है या निजी तस्वीरें और वीडियो साझा करने के लिए उकसाया जाता है. जैसे ही कोई वीडियो या फिर फोटो उसे हाथ लगता है टारगेट जाल में फंस जाता है.
क्या खेल जगत में हुआ है हनी ट्रैप क इस्तेमाल?
खेल जगत और विशेष रूप से क्रिकेट में हनी ट्रैप का खतरा हमेशा बना रहता है. सट्टेबाज और फिक्सर अक्सर खिलाड़ियों को फांसने के लिए महिलाओं का सहारा लेते हैं ताकि उनसे टीम की अंदरूनी जानकारी निकलवाई जा सके या उन्हें फिक्सिंग के लिए मजबूर किया जा सके. यही कारण है कि बीसीसीआई ने आईपीएल टीमों को हनी ट्रैप को लेकर आगाह किया है.
इसका सबसे बड़ा उदाहरण आईपीएल ही है जब साल 2013 में स्पॉट फिक्सिंग मामले का भांडाफोड़ हुआ था. उस समय की जांच में यह बात सामने आई थी कि सट्टेबाजों ने खिलाड़ियों को लुभाने के लिए पार्टियों और महिलाओं का इस्तेमाल किया था. सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, अन्य खेलों में भी कई एथलीटों ने स्वीकार किया है कि अनजान लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए उनसे दोस्ती की और बाद में उन्हें डोपिंग या फिक्सिंग के लिए उकसाने की कोशिश की थी.
हनी ट्रैप पर बीसीसीआई ने क्या कहा है?
बीसीसीआई ने आईपीएल के दौरान हनी ट्रैप के खतरों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है. बोर्ड ने खिलाड़ियों को आगाह किया है कि सट्टेबाज और फिक्सर उन्हें फंसाने के लिए हनी ट्रैप का इस्तेमाल कर सकते हैं. बीसीसीआई की एंटी-करप्शन यूनिट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खिलाड़ी किसी भी अनजान व्यक्ति से मेल-जोल न बढ़ाएं और होटल के कमरों में बाहरी मेहमानों के प्रवेश पर कड़े प्रतिबंधों का पालन करें. बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि किसी भी संदिग्ध संपर्क की तुरंत सूचना न देना अनुशासनहीनता माना जाएगा, क्योंकि ऐसे जाल का मुख्य उद्देश्य ब्लैकमेलिंग के जरिए मैच की गोपनीय जानकारी हासिल करना और खेल की छवि को नुकसान पहुंचाना होता है.
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जितेंद्र कुमार डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में बीते 10 सालों से सक्रिय हैं. इस वक्त नेटवर्क 18 समूह में हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. क्रिकेट के साथ बॉक्सिंग, कबड्डी, बैडमिंटन, ह…और पढ़ें


