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11 अक्टूबर 1956 को कराची में पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जा रहे टेस्ट मैच के पहले दिन पूरे दिन के खेल में दोनों टीमों को मिलाकर केवल 95 रन ही बने, और इसके साथ 12 विकेट भी गिरे. यह टेस्ट इतिहास का सबसे धीमा दिन बन गया एक ऐसा रिकॉर्ड जो आज भी कायम है.
1956 में खेले गए पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट के पहले दिन बने सिर्फ 95 रन
नई दिल्ली. टेक्नीक, टेंपरामेंट और टाइमिंग ये तीन शब्द क्रिकेट के सबसे पुराने फॉर्मेट की पहचान होते थे. टेस्ट क्रिकेट में रोमांच और रिकॉर्ड्स का अनूठा संगम है कभी बल्लेबाज़ धुआंधार बल्लेबाज़ी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं, तो कभी ऐसे दिन भी आते हैं जब पूरा दिन बीत जाता है और स्कोरबोर्ड पर रन ही नहीं चढ़ते. ये उन दिनों की बात है जब क्रिकेट मैटिंग विकेट पर खेली जाती थी जहां बल्लेबाजी करना और रन बनाना बहुत मुश्किल काम होता था.
टी-20 के दौर में जहां 20 ओवर कि क्रिकेट में 250 रन अब आम बात है, जहां हर गेंद पर बल्लेबाज बड़े-बड़े शाट्स खेल कर महफिल लूट रहे है. वहीं 70 साल पहले जब टी-20 फॉर्मेट का कोई अस्तित्व नहीं था तब एक ऐसा मैच खेला गया जो इसलिए इतिहास के पन्नों में आ गया. तब ओवर फेंकने की कोई निश्चित संख्या नहीं थी पर उस समय के आंकड़े बताते है कि मैच 6 घंटे से ज्यादा चला और रन बने सिर्फ 95.
1 दिन के खेल में बने सिर्फ 95 रन
11 अक्टूबर 1956 को कराची में पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जा रहे टेस्ट मैच के पहले दिन पूरे दिन के खेल में दोनों टीमों को मिलाकर केवल 95 रन ही बने, और इसके साथ 12 विकेट भी गिरे. यह टेस्ट इतिहास का सबसे धीमा दिन बन गया एक ऐसा रिकॉर्ड जो आज भी कायम है. यह मैच दोनों टीमों के बीच खेला जाने वाला पहला-कभी टेस्ट मैच था और इस ऐतिहासिक पहली मुलाकात में स्कोरबोर्ड एकदम ठहरा हुआ नज़र आया.
फ़ज़ल महमूद उस दिन के असली नायक
उस मैच में पाकिस्तान की ओर से जो गेंदबाज़ सबसे घातक साबित हुए, वह थे फ़ज़ल महमूद. मैटिंग पिच पर फ़ज़ल महमूद ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए पूरे मैच में 70-28-114-13 के आंकड़े दर्ज किए. उनकी इस घातक गेंदबाज़ी के सामने ऑस्ट्रेलियाई टीम जिसमें हार्वे, मिलर, बेनॉ और डेविडसन जैसे दिग्गज शामिल थे पहली पारी में 80 और दूसरी पारी में 187 रन पर ढेर हो गई. मैटिंग पिच पर गेंद असाधारण रूप से टर्न और सीम लेती थी, जिसने बल्लेबाज़ों के लिए रन बनाना लगभग असंभव बना दिया. यही वजह रही कि पूरा दिन बीत गया और दोनों टीमें मिलकर सिर्फ दो अंकों का आंकड़ा पार कर सकीं.
मैच का अंतिम परिणाम
यह मैच अंततः पाकिस्तान ने जीता यह उस दौर की एक बड़ी उपलब्धि थी जब पाकिस्तानी क्रिकेट अभी अपने शुरुआती कदम रख रहा था. टेस्ट क्रिकेट सिर्फ छक्कों और चौकों का खेल नहीं है कभी-कभी गेंद और बल्ले के बीच का वह मौन संघर्ष जब एक-एक रन बड़ी मशक्कत से आता है उतना ही रोमांचक होता है. 1956 का वह दिन इसी का प्रतीक है 95 रन, 12 विकेट, और क्रिकेट इतिहास में अमर हो गया एक पूरा दिन.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


