Last Updated:
Social Awareness Campaign: नर्सिंग स्टूडेंट्स की एक अनोखी और रचनात्मक पहल इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. “चेहरा नहीं, संदेश देखिए” थीम के साथ छात्रों ने समाज में जागरूकता फैलाने और सकारात्मक बदलाव लाने का अभियान शुरू किया है. इस पहल में छात्रों ने अपनी क्रिएटिविटी के जरिए सामाजिक मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया, जिससे लोगों का ध्यान सीधे संदेश पर जाए, न कि व्यक्ति की पहचान पर. अभियान का उद्देश्य समाज में जागरूकता बढ़ाना, संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करना और युवाओं को सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित करना है. कॉलेज परिसर और सोशल मीडिया पर इस पहल को काफी सराहना मिल रही है. शिक्षकों और सामाजिक संगठनों ने भी छात्रों की इस सोच और रचनात्मकता की तारीफ की है.
नर्सेज सप्ताह के अंतर्गत राजकीय नर्सिंग महाविद्यालय, जालोर में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं ने पूरे माहौल को रंगों और रचनात्मकता से भर दिया. जीएनएम एवं बीएससी नर्सिंग के प्रशिक्षणार्थियों ने फेस पेंटिंग, मेहंदी, रंगोली और पोस्टर प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इन गतिविधियों का उद्देश्य केवल कला प्रदर्शन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने वाले संदेश देना भी था. हर प्रतिभागी ने अपनी सोच को रंगों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया. कॉलेज परिसर में उत्साह और ऊर्जा साफ देखने को मिली.

फेस पेंटिंग प्रतियोगिता में कुल दस प्रतिभागियों की पांच टीमों ने हिस्सा लिया. हर टीम ने अपने अनोखे आइडियाज और कलर डिजाइन के जरिए अलग पहचान बनाई. प्रतियोगिता में कड़ी टक्कर देखने को मिली, जहां हर प्रस्तुति अपने आप में खास और संदेशपूर्ण थी. जजेज ने भी सभी प्रतिभागियों की मेहनत और रचनात्मकता की सराहना की.

फेस पेंटिंग प्रतियोगिता इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रही, जहां “चेहरा नहीं, मैसेज देखिए” थीम के तहत प्रतिभागियों ने अद्भुत क्रिएटिविटी दिखाई. चेहरे को कैनवास बनाकर सामाजिक मुद्दों को बेहद प्रभावशाली तरीके से दर्शाया गया. ऑपरेशन सिंदूर, नारी सशक्तिकरण, ड्रग्स छोड़ने और लैंगिक समानता जैसे विषयों पर गहरी सोच को रंगों में उकेरा गया. हर एक आर्टवर्क एक कहानी कहता नजर आया, जिसने देखने वालों को सोचने पर मजबूर कर दिया.
Add News18 as
Preferred Source on Google

प्रतिभागियों ने फेस पेंटिंग से पहले अपनी टीम के आर्टिस्ट के साथ बैठकर थीम पर विस्तार से चर्चा की. कलर कॉम्बिनेशन और डिजाइन को लेकर प्लानिंग की गई, जिससे अंतिम प्रस्तुति और भी प्रभावशाली बन सके. मॉडल्स को लगभग एक से डेढ़ घंटे तक स्थिर बैठना पड़ा, जिससे आर्टिस्ट अपनी कला को बारीकी से उभार सकें. यह पूरी प्रक्रिया धैर्य, एकाग्रता और टीमवर्क का शानदार उदाहरण रही.

जब आर्टिस्ट की कल्पना चेहरे पर उतरकर सामने आई, तो जजेज, विजिटर्स और अन्य विद्यार्थियों के लिए यह किसी सरप्राइज से कम नहीं था. हर डिजाइन में बारीकी, रंगों का संतुलन और संदेश की स्पष्टता दिखाई दी. कुछ फेस पेंटिंग्स ने उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने का संदेश दिया, तो कुछ ने पर्यावरण संरक्षण और देशभक्ति को प्रमुखता से दर्शाया. इन आर्टवर्क्स ने न केवल कला, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी परिचय दिया.

इस आयोजन की प्रभारी नर्सिंग फैकल्टी डिम्पल गर्ग ने बताया कि इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य छात्रों की छिपी प्रतिभा को सामने लाना और उन्हें सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक बनाना है. उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपनी सोच व्यक्त करने का मंच देती हैं. साथ ही, यह उनके आत्मविश्वास और रचनात्मकता को भी बढ़ावा देती हैं.

इंटरनेशनल नर्सेज सप्ताह के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि आज के युवा न केवल पढ़ाई में, बल्कि सामाजिक मुद्दों के प्रति भी जागरूक और संवेदनशील हैं. राजकीय नर्सिंग महाविद्यालय, जालोर में विद्यार्थियों को अपनी कल्पना और सोच को अभिव्यक्त करने का जो अवसर मिला, वह उनके भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. यह आयोजन कला, शिक्षा और सामाजिक संदेश का एक सुंदर संगम बनकर सामने आया.


