ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की रक्षा नीति को एक नई ऊंचाई दी है. इस अभियान ने साबित कर दिया कि न्यूक्लियर हथियारों देश भारत को ब्लैकमेल कर आतंकवाद नहीं फैला सकते. भारत आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक, सीमित और प्रभावी सैन्य जवाब देता रहेगा. ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर प्रमुख रक्षा विश्लेषक, पूर्व एडीजी उत्तर-पूर्व क्षेत्र, एनसीसी और किताब Red Lines Redrawn – Operation Sindoor and India’s New Normal के सह-लेखक मेजर जनरल विपिन बक्शी ने भारत की सुरक्षा नीति में आए बड़े बदलाव पर विस्तार से चर्चा की.
मेजर जनरल बक्षी ने बताया कि भारत का न्यू-नॉर्मल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद स्पष्ट किया गया. इसमें तीन अहम संदेश हैं: 1. आतंकवाद पर जवाबी कार्रवाई होगी, 2. न्यूक्लियर ब्लैकमेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, 3. आतंकियों व उनके संरक्षकों में कोई फर्क नहीं रखा जाएगा. जो आतंकवाद को अपने इलाके में पनपने देते हैं, वे भी बच नहीं पाएंगे.
यह दुनिया के इतिहास में पहला सशस्त्र संघर्ष था जिसमें दोनों पक्षों के पास न्यूक्लियर हथियार थे. फिर भी भारत ने सब-कन्वेंशनल और न्यूक्लियर युद्ध के बीच पर्याप्त जगह बनाकर लिमिटेड कन्वेंशनल युद्ध किया. इससे साबित हुआ कि न्यूक्लियर हथियारों की मौजूदगी में भी आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है.
मेजर जनरल बक्षी ने विस्तार से बताया कि भारतीय सेना ने पिछले वर्षों में डॉक्ट्रिन को लगातार बदला है. 1980 के दशक में हमारी नीति बड़ी संख्या में “Mechanized Forces” को पाकिस्तान की गहराई में ले जाकर क्षेत्र कब्जाने की थी. बाद में Cold Start Doctrine आया, जिसमें सीमा के पास भारी मात्रा में फोर्स हमेशा तैनात रहती थीं और जीरो वार्निंग पर 8-10 जगहों पर 10-15 किलोमीटर तक सीमित घुसपैठ की जा सकती थी.
लेकिन 2016 के उरी हमले के बाद भारत ने “Dynamic Response Doctrine” अपना लिया. इस नई नीति की खासियत है कि बड़े सैन्य अभियान की जरूरत नहीं है, आधुनिक तकनीक और बेहतर क्षमता के साथ भारत अब पाकिस्तान के किसी भी हिस्से में प्रिसाइस सर्जिकल स्ट्राइक्स कर सकता है.
उदाहरण:
2016 उरी सर्जिकल स्ट्राइक: छोटे कमांडो दलों ने घुसकर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया
2019 बालाकोट एयर स्ट्राइक: वायुसेना ने एलओसी और आईबी पार कर पाकिस्तानी एयरस्पेस में घुसकर हमला किया
2025 ऑपरेशन सिंदूर: कोई सैनिक सीमा या एलओसी पार नहीं किया, फिर भी आतंकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया गया.
ये सभी कार्रवाई Dynamic Response Doctrine का हिस्सा हैं. मेजर जनरल बक्शी ने कहा कि नई नीति का दूसरा बड़ा पहलू एस्केलेशन कंट्रोल है। कम से कम फोर्स का इस्तेमाल, कम से कम बॉर्डर पार करना, लेकिन लक्ष्य पूरा करना और युद्ध को अनावश्यक रूप से आगे न बढ़ने देना, यही इस नीति का मूल मंत्र है.
वहीं ऑपरेशन सिन्दूर पर ट्रंप के बार-बार मीडिएशन करवाने के दावों को खारिज करते हुए मेजर जनरल बक्शी ने कहा कि मीडिएशन में तीन पक्षों की जरूरत होती है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ. फोन कॉल्स और सामान्य कूटनीति चली, जो युद्ध के समय होती रहती है. भारत शिमला समझौते के अनुसार किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता. ट्रंप का बयान नॉर्मल डिप्लोमेसी नहीं, बल्कि व्यक्तिगत दावा था. उन्हें अपने लिए नोबेल प्राइज लेना था.
पहले भारत Strategic Restraint (रणनीतिक संयम) की नीति पर चलता था. संसद हमला, मुंबई हमले जैसे कई आतंकी हमलों के बाद भी हम युद्ध नहीं छेड़ते थे और अंतरराष्ट्रीय दबाव की उम्मीद करते थे. अब नीति “Punitive Deterrence” (दंडात्मक करवाई) की हो गई है. अगर आतंकी हमला हुआ तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा, बिना किसी युद्ध की औपचारिक घोषणा के.
मेजर जनरल बक्शी ने अंत में कहा कि भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और सीडीएस की प्रक्रिया अब ज्यादा बेहतर और क्रेडिबल हो गई है. उन्होंने विदेशी मीडिया और विभिन्न समाचार चैनलों के बीच बेहतर तालमेल की भी जरूरत पर जोर दिया. ऑपरेशन सिंदूर ने भारत को न सिर्फ मजबूत बनाया है, बल्कि पूरे विश्व को यह संदेश दिया है कि अब भारत अपनी सुरक्षा के मामले में किसी भी दबाव या ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा.


