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गोंडा जिले के इटियाथोक ब्लॉक स्थित अर्जुनपुर गांव में स्थित मां कामिनपुर धाम मंदिर श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. मान्यता है कि यहां मां दुर्गा साक्षात विराजमान हैं और सच्चे मन से की गई हर मनोकामना पूर्ण करती हैं. स्थानीय कथाओं के अनुसार, रेलवे लाइन बिछाने के दौरान पटरी बार-बार उखड़ जाने की घटना के बाद एक अंग्रेज के सपने में मां दुर्गा ने दर्शन दिए और इसी स्थान पर मंदिर निर्माण का आदेश दिया. खुदाई में कई छोटी मूर्तियां मिलने के बाद यहां मंदिर स्थापित किया गया.
गोंडा. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक ग्राम पंचायत अर्जुनपुर में एक ऐसा मंदिर है, जिसे लेकर लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. यहां के श्रद्धालु मानते हैं कि मां दुर्गा साक्षात इस मंदिर में विराजमान हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं. इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां की मूर्ति को बहुत ही चमत्कारी माना जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, कई साल पहले इस स्थान से थोड़ी दूर पर रेलवे लाइन की पटरी बिछाई जा रही थी दिन में पटरी बिछाई जाती थी और रात में रेलवे लाइन की पटरी अपने आप उखड़ जाती थी या सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा. फिर एक दिन एक अंग्रेज के सपने में मां दुर्गा ने दर्शन दिए और इसी स्थान पर मंदिर बनाने का आदेश दिया. और मंदिर निर्माण के लिए जब खुदाई होने लगी तो वहीं पर छोटी-छोटी कई मूर्तियां मिली और उसे अंग्रेज द्वारा एक छोटी से मंदिर का निर्माण कराया गया.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान मंदिर के महंत अरुण कुमार पांडेय बताते हैं कि श्री मां कामिन पुर धाम मंदिर की सबसे बड़ी मान्यता यह है कि इस मंदिर पर जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से 7 सोमवार दर्शन करता है तो उसकी सारी मनोकामना पूरी होती है. माना जाता है की माता रानी साक्षात इस मंदिर पर विराजमान है और वह सभी भक्तों की सारी मनोकामना पूरी करती हैं. मंदिर के पुजारी अंकित पांडेय बताते हैं कि उनके पूर्वज बताते थे कि इस मंदिर का निर्माण भी काफी रोचक माना जाता है. इस मंदिर के बगल रेलवे लाइन बिछाई जा रही थी और रेलवे लाइन अपने आप उखड़ जाती थी. कर्मचारी काफी परेशान थे कि यह क्या हो रहा है किसी को समझ में नहीं आ रहा था, फिर एक दिन एक अंग्रेज के सपने में माता रानी आती हैं और उससे कहती हैं कि इस स्थान पर मंदिर की स्थापना की जाए. हम यहां स्वयं विराजमान हैं उसके बाद मंदिर की स्थापना हुई और स्थापना के बाद तब लाइन बिछाई गई, तो लाइन फिर दोबारा नहीं उखड़ी और आज भी वह लाइन गोंडा से बलरामपुर जाती है. उन्होंने बताया कि अंग्रेज के द्वारा एक छोटी से मंदिर का निर्माण कराया गया था उसके बाद हमारे पूर्वज यहां पूजा करने आने लगे और फिर हमारे पूर्वज के द्वारा यहां पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया. यह हमारी 9 पीढ़ियां जो इस मंदिर पर पूजा पाठ कर रही है.
निसंतान को होती है संतान की प्राप्ति
अरुण कुमार पांडेय बताते हैं कि यहां पर विशेष रूप से उन महिलाओं को यहां का प्रसाद दिया जाता है जो निसंतान है, प्रसाद के रूप में माता पर चढ़ाया हुआ अड़हुल का फूल और हवन किया हुआ भभूत दिया जाता है. इसको खाने के बाद 7 सोमवार माता रानी के दर्शन करने होते है. उसके बाद संतान की प्राप्ति होती है. उन्होंने बताया कि मन्नत पूरी हो जाने के बाद यहां श्रद्धालु अपने सामर्थ्य से कुछ भी कर सकता है. जैसे कुछ श्रद्धालु देवी भागवत करवाते हैं, कुछ लोग रामचरितमानस पाठ करवाते हैं, तो कुछ लोग नारियल, चुनरी चढ़ाते हैं, और घंटा भी चढ़ाया जाता है. अंकित पांडेय बताते हैं कि इस मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन है किसी को नहीं पता है कि इस मंदिर का क्या इतिहास है लेकिन हमारे पूर्वज बताते थे कि इस मंदिर की स्थापना एक अंग्रेज के द्वारा किया गया था. उसके पहले यहां पर घना जंगल हुआ करता था.
कहां-कहां से आते हैं श्रद्धालु
अंकित पांडेय बताते हैं कि मां कामिन पुर धाम मंदिर पर गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, लखनऊ, श्रावस्ती, चंडीगढ़, पंजाब समेत कई प्रदेश से यहां श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं. इस मंदिर पर प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार उसके अलावा नवरात्रि में विशेष में लेकर आयोजन होता है. लाखों की संख्या में श्रद्धालु आकर दर्शन करते हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें


