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Mamata Banerjee| TMC councillors resignation| ममता बनर्जी को डबल झटका, पहले करारी हार अब पड़ गई पार्टी में दरार, सड़क पर उतरने की आ गई नौबत

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TMC Mamata Banerjee News: पश्चिम बंगाल में तीन बार की मुख्यमंत्री और टीएमसी नेता ममता बनर्जी की बेचैनी बढ़ गई है. हाल ही में विधानसभा चुनावों में राज्य में मिली करारी हार के बाद अब उनको एक और बड़ा झटका लगा है. ममता दीदी की पार्टी में अब फूट पड़ने की खबरें सामने आ रही हैं.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में असंतोष के संकेत साफ दिखाई देने लगे हैं.बुधवार को कुछ ऐसा हुआ, जिसने ममता को जमीनी हकीकत से रूबरू करा दिया. दरअसल पार्टी की हार के बाद कोलकाता में पहला बड़ा विरोध कार्यक्रम बुधवार को किया गया था लेकिन इसमें टीएमसी के बेहद कम विधायक पहुंचे.

वहीं दूसरी ओर दो टीएमसी नियंत्रित नगर पालिकाओं में पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया और पार्टी से दूरी बना ली. इन दो घटनाओं ने पार्टी में दरार की अटकलों को और तेज कर दिया है. हालात ऐसे हो गए हैं कि ममता बनर्जी को अब अपनी पार्टी के अंदर की कलह को मिटाने के लिए ही मेहनत करनी पड़ेगी.

बता दें कि बुधवार को अंबेडकर प्रतिमा के पास विधानसभा परिसर में आयोजित धरने में पार्टी के 80 विधायकों में से सिर्फ 36 ही पहुंचे. कोलकाता में बीजेपी की नई सरकार के खिलाफ पोस्ट-पोल हिंसा, बुलडोजर कार्रवाई और फेरीवालों पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए यह प्रदर्शन किया गया था लेकिन टीएमसी के विधायकों के ही न पहुंचने से पार्टी में फूट की खबरें तेज हो गईं. अनुमान लगाया जा रहा है कि टीएमसी अब राज्य में अपनी जमीनी ताकत वापस बनाने की कोशिश कर रही है.

धरने में शामिल प्रमुख नेता रहे सोवंदेब चट्टोपाध्याय, फिरहाद हाकिम, कुणाल घोष, नयना बनर्जी, संदीपन घोष और ऋतब्रत बनर्जी.सोवंदेब चट्टोपाध्याय ने कहा कि कुछ विधायक अपने जिलों में पोस्ट-पोल हिंसा के मामलों को संभालने में व्यस्त थे, इसलिए नहीं आ पाए.

मंगलवार को कालीघाट में हुई पार्टी बैठक में कई विधायकों ने पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि बंद कमरों में चर्चा करने से जनता का समर्थन वापस नहीं मिलेगा.उन्हें सड़क पर उतरकर आक्रामक तरीके से लोगों से जुड़ना होगा.

वहीं दूसरी ओर उत्तर 24 परगना जिले में दो नगर पालिकाओं में बड़े पैमाने पर इस्तीफे हो गए. कांचरापाड़ा में 24 पार्षदों में से 15 ने इस्तीफा दे दिया, जबकि हलिशहर में 23 में से 16 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया. अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, चुनाव नतीजों के बाद से नगरपालिका नेतृत्व में नाराजगी बढ़ रही थी.सक्रिय नेतृत्व की कमी और नागरिक सुविधाओं की समस्याओं को लेकर शिकायतें आम थीं.

टीओआई की खबर के मुताब‍िक बीजेपी के बिजपुर विधायक सुदीप्त दास के हालिया बैठक के बाद यह फैसला लिया गया.रविवार को कल्याणी में हुई टीएमसी पार्षदों की बैठक में इस्तीफों पर मुहर लगी.हलिशहर में बुधवार दोपहर डिप्टी चेयरमैन की मौजूदगी में इमरजेंसी मीटिंग हुई, जिसमें राजू साहनी के नेतृत्व में 16 पार्षदों ने इस्तीफा दिया.

ये घटनाएं टीएमसी में संभावित राजनीतिक उठापटक की अटकलों को हवा दे रही हैं.कुछ पार्षद बीजेपी में जा सकते हैं. हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इन घटनाओं पर चुप्पी साध रखी है.
विश्लेषकों का कहना है कि हार के बाद टीएमसी को अपनी संगठनात्मक कमजोरियों को जल्द दूर करना होगा, वरना असंतोष और बढ़ सकता है और इसके लिए ममता बनर्जी को अब सड़क पर उतरना होगा.



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