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Spider Web Disease in Mango Trees: आम के बागों पर इन दिनों मकड़ी के जाले का बड़ा खतरा मंडरा रहा है. यह जाला न केवल पेड़ों की बढ़त रोकता है, बल्कि फलों की क्वालिटी को भी खराब कर देता है. हैरानी की बात यह है कि बिना जाला तोड़े महंगी से महंगी कीटनाशक दवाइयां भी बेअसर साबित होती हैं. कृषि विशेषज्ञों ने इस समस्या से निपटने के लिए एक बेहद आसान और कारगर देसी जुगाड़ बताया है, जिससे मकड़ी का चक्र (Life Cycle) पूरी तरह टूट जाएगा. जानिए कैसे आप अपने बाग को इस दुश्मन से बचा सकते हैं.
सहारनपुर: उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जनपद अपनी खास किस्म के आमों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. यही वजह है कि इसे मैंगो बेल्ट भी कहा जाता है. यहां के किसान आम की सैकड़ों वैरायटी उगाते हैं, जिनकी मिठास भारत ही नहीं बल्कि विदेशों तक फैली हुई है. यहां ₹10 किलो से लेकर ₹1000 किलो तक का आम बिकता है, जो किसानों को तगड़ा मुनाफा देता है. लेकिन इन दिनों यहां के बागवान एक गंभीर समस्या से परेशान हैं और वो है आम के पेड़ों पर मकड़ी का बढ़ता प्रकोप. यह मकड़ी पत्तियों पर अपना जाला बुन लेती है, जिससे न केवल पेड़ की ग्रोथ रुक जाती है, बल्कि फलों की चमक और स्वाद पर भी बुरा असर पड़ता है. अक्सर किसान इस समस्या से निजात पाने के लिए महंगे कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता. आखिर क्यों दवाइयां काम नहीं करतीं और इसका सबसे आसान समाधान क्या है? आइए डिटेल से समझते हैं.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पत्तियों पर मकड़ी का जाला मौजूद रहता है, तब तक कोई भी रासायनिक छिड़काव मकड़ी तक पहुंच ही नहीं पाता है. यह जाला एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है जिसके अंदर मकड़ी मजे से छिपी रहती है. आप कितनी भी जहरीली दवा डाल दें, वह जाले के ऊपर से फिसल जाती है और अंदर बैठे कीट सुरक्षित रहते हैं. इसलिए सबसे जरूरी काम दवा डालना नहीं, बल्कि सबसे पहले मकड़ी के जाले को जड़ से तोड़ना और उसकी लाइफ साइकिल यानी जीवन चक्र को खत्म करना है.
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ये छोटा सा उपाय करेगा कमाल
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और प्रोफेसर डॉ. आई.के. कुशवाहा ने इस समस्या का एक बहुत ही सटीक समाधान बताया है. उनके अनुसार किसान अगर जालीदार पत्तियों को काट सकें तो यह सबसे अच्छा है, लेकिन ऊंचे पेड़ों के लिए एक लंबी बांस की लाठी का इस्तेमाल किया जा सकता है. इस लाठी के अगले हिस्से पर लोहे के सरियों से शेर के पंजे जैसा एक कांटा तैयार कर लें और इसकी मदद से पेड़ों पर लगे जालों को अच्छी तरह खींचकर तोड़ दें. जैसे ही जाला टूटेगा, मकड़ी का सुरक्षा कवच हट जाएगा और उसका लाइफ साइकिल पूरी तरह ब्रेक हो जाएगा.
जाला टूटने के बाद ही करें छिड़काव
डॉ. कुशवाहा बताते हैं कि एक बार जब आप इस देसी जुगाड़ से जाले साफ कर लेते हैं, उसके बाद ही मकड़ी नाशक दवाओं का छिड़काव करना चाहिए. ऐसा करने से दवा सीधे कीटों के शरीर पर लगेगी और वे तुरंत मर जाएंगे. इसके साथ ही जहां ‘मोल्फोर्मेस’ या ‘गुच्छा रोग’ की समस्या आती है, वहां आम की फसल लेने के बाद पेड़ों की सही तरीके से कटाई-छटाई करना भी बहुत जरूरी है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें


