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IGRS Ranking UP 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास मॉडल को धरातल पर उतारने में उत्तर प्रदेश के जिलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है. आईजीआरएस (एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) की ताजा मार्च रिपोर्ट में रामपुर ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है. 99.29 प्रतिशत अंकों के साथ रामपुर विकास और जनसुनवाई के मामले में सबसे आगे रहा है, जबकि हाथरस और बाराबंकी जैसे जिलों ने भी शीर्ष स्थान बनाकर सबको चौंका दिया है.
IGRS रैंकिंग में रामपुर ने मारी बाजी
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पिछले कुछ सालों से विकास की नई इबारत लिख रहा है. प्रदेश में न केवल सड़कों और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, बल्कि सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंच रहा है. इस पूरे सिस्टम को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने में ‘आईजीआरएस’ (एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) एक मजबूत कड़ी साबित हो रही है. इसी कड़ी में मार्च महीने की आईजीआरएस रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें रामपुर ने एक बार फिर बाजी मारते हुए पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है.
आईजीआरएस की इस निगरानी प्रणाली से जिलों के बीच विकास कार्यों और शिकायतों के निस्तारण को लेकर एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा हुई है, जिससे आम जनता की समस्याओं का हल अब और भी तेजी से हो रहा है.
रामपुर बना नंबर वन, विकास कार्यों की गुणवत्ता ने दिलाया सम्मान
आईजीआरएस की मार्च महीने की रिपोर्ट में रामपुर ने मानक पूर्णांक 140 में से 139 अंक प्राप्त कर प्रदेश में टॉप किया है. इसका सफलता प्रतिशत 99.29 रहा है.
रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जिले में विकास कार्यों को न केवल समय पर पूरा किया जा रहा है, बल्कि उनकी गुणवत्ता का भी खास ख्याल रखा जा रहा है. जनशिकायतों का त्वरित और संतोषजनक निस्तारण ही रामपुर की इस सफलता का मुख्य कारण है.
हाथरस और बाराबंकी ने दूसरे स्थान पर जमाया कब्जा
इस रेस में हाथरस और बाराबंकी भी पीछे नहीं रहे. दोनों जिलों ने 140 में से 137 अंक हासिल कर प्रदेश में संयुक्त रूप से दूसरा स्थान प्राप्त किया है. हाथरस के जिलाधिकारी अतुल वत्स के मुताबिक, पिछले चार महीनों में जनशिकायतों के निस्तारण की दर में काफी सुधार हुआ है. अधिकारियों के साथ साप्ताहिक बैठकें और आम जनता से मिलने वाला सकारात्मक फीडबैक इस रैंकिंग का आधार बना है. सरकार का सीधा निर्देश है कि जब तक फरियादी अपनी समस्या के हल से संतुष्ट न हो जाए, तब तक उस शिकायत को निस्तारित नहीं माना जाता.
शाहजहांपुर और पीलीभीत तीसरे नंबर पर
तीसरे स्थान की बात करें तो शाहजहांपुर और पीलीभीत ने 136-136 अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से अपनी जगह बनाई है. इसके अलावा चौथे और पांचवें स्थान के लिए भी जिलों में कड़ी टक्कर देखने को मिली है. इसके साथ ही सोनभद्र, कन्नौज, अंबेडकरनगर और हापुड़ ने 135 अंकों के साथ चौथे नंबर में जगह बनाई है. जबकि, बरेली, आजमगढ़ और लखीमपुर खीरी ने 134 अंक के साथ पांचवां स्थान हासिल किया है.
टॉप-10 में इन जिलों ने भी बनाई जगह
प्रदेश के अन्य प्रमुख जिलों ने भी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए टॉप-10 की सूची में जगह बनाई है. इनमें हमीरपुर, सहारनपुर, बलिया, प्रयागराज और मथुरा जैसे जिले शामिल हैं. आईजीआरएस के जरिए हर महीने प्रदेश के 49 विभागों के लगभग 109 कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की जाती है. इसमें राजस्व कार्य, विकास परियोजनाएं और जनता की शिकायतों की सुनवाई जैसे कई कड़े मानक शामिल होते हैं. सरकार की इस सख्त निगरानी का ही नतीजा है कि अब जिलों में फाइलों के बजाय धरातल पर काम ज्यादा तेजी से होता नजर आ रहा है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें


