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एनआईए ने आईएसआईएस से जुड़े बायो-टेरर मॉड्यूल का खुलासा कर तीन आतंकियों को अरेस्ट किया है. तीन आतंकी घर में ‘रिसिन’ जैसा घातक जहर बनाने की कोशिश में लगे थे. जांच में सामने आया कि उनका मकसद सार्वजनिक जगहों पर इस जहर का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर लोगों की जान लेना था.
एनआईए ने कोर्ट ने बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा किया है.
ISIS ‘Bio-Terror’ Module: नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने एक बेहद खौफनाक साजिश का पर्दाफाश किया है. एनआईए की जांच में सामने आया है कि कुछ आरोपी घर के अंदर ही ‘जहर की फैक्ट्री’ चला रहे थे. उनका मकसद हजारों बेगुनाह लोगों की जान लेना था. इस मामले में एनआईए ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है.
एनआईए के अनुसार, यह पूरा मामला ‘बायो-टेरर’ मॉड्यूल से जुड़ा हुआ है. आरोपी भीड़भाड़ वाले इलाकों पर जहरीले केमिकल का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर लोगों की जान लेने की साजिश रच रहे थे. इस साजिश का मुख्य आरोपी हैदराबाद का रहने वाला डॉ. सैयद अहमद मोहिउद्दीन है. उसके साथ उत्तर प्रदेश के दो अन्य आरोपी आजाद और मोहम्मद सुहेल भी शामिल थे. तीनों के खिलाफ अहमदाबाद की एनआईए स्पेशल कोर्ट में विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया है.
मोहिउद्दीन को मिला था आईएसआईएस में बड़े पद का लालच
- जांच में खुलासा हुआ है कि ये आरोपी आईएसआईएस से जुड़े विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में थे. इन हैंडलर्स के इशारों पर आरोपी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे. उनका मकसद ऐसे युवाओं को अपने साथ जोड़ना था, जिन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेलकर जिहाद के नाम पर इस्तेमाल किया जा सके.
- सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ‘रिसिन’ नाम के खतरनाक जैविक जहर का इस्तेमाल करने की साजिश रच रहे थे. रिसिन एक बेहद जहरीला पदार्थ होता है, जो अरंडी के बीज से तैयार किया जाता है. यह इतना खतरनाक होता है कि इसकी बहुत छोटी मात्रा भी इंसान की जान ले सकती है.
- यही वजह है कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित केमिकल हथियारों की सूची में रखा गया है. इस साजिश का खुलासा नवंबर 2025 में हुआ, जब गुजरात एटीएस ने डॉ. मोहिउद्दीन को एक टोल प्लाजा से पकड़ा था. उसकी कार से अवैध हथियार, अरंडी का तेल और कई संदिग्ध सामान बरामद हुआ था.
- डॉ. मोहिउद्दीन की निशानदेही पर उसी दिन दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने ‘डेड-ड्रॉप’ तकनीक का इस्तेमाल किया था. इसके तहत पैसे और हथियारों का लेन-देन एक तय जगह पर बिना सीधे संपर्क के किया जाता है.
- जांच में यह भी सामने आया कि राजस्थान के हनुमानगढ़ से पार्सल उठाकर गुजरात के छतरल में रखा गया था, ताकि मुख्य आरोपी उसे वहां से ले सके. जनवरी 2026 में एनआईए ने जब जांच अपने हाथ में ली, तो कई और बड़े खुलासे हुए. पता चला कि मोहिउद्दीन को उसके हैंडलर ने आईएसआईएस में बड़ा पद देने का लालच दिया था.
आरोपी ने घर में तैयार कर ली थी सीक्रेट लैब
एनआईए के अनुसार, इसी लालच में आकर उसने अपने घर को एक गुप्त लैब में बदल दिया था. यहां अरंडी के बीज से रिसिन बनाने की कोशिश की जा रही थी. बाकी दो आरोपी भी इस साजिश में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे. वे पैसे जुटाने, हथियारों की सप्लाई, रेकी करने और नए लोगों की भर्ती जैसे काम कर रहे थे. खास तौर पर सुहेल इस नेटवर्क में एक अहम कड़ी था, जो हैंडलर्स और अन्य आरोपियों के बीच तालमेल बना रहा था.
आतंकियों ने कर ली थी हमले की पूरी तैयारी
एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने आतंक साजिश को अंजाम देने की पूरी तैयारी कर ली थी. अगर समय रहते उन्हें नहीं पकड़ा जाता, तो यह साजिश बड़े हमले में बदल सकती थी. फिलहाल इस मामले की जांच जारी है. एनआईए इस साजिश से जुड़े अन्य लोगों और विदेशी हैंडलर्स की तलाश में जुटी है.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें


