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अमेठी का रहस्यमयी इतिहास, जहां कयाधु ने की तपस्या, आज भी पूरी होती हैं मन्नतें!

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Amethi News: अमेठी का इतिहास काफी पुराना है और यहां कई प्रसिद्ध मंदिर और स्थल हैं. इन्हीं में से एक है मंदिर है, जिसका असुरराज हिरणकश्यप की पत्नी का से पुराना नाता रहा है. आज भी इस ऐतिहासिक स्थल को लोग एक प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहर मानते हैं और यहां इतिहास समझने के साथ-साथ दर्शन पूजन और भ्रमण के लिए आते हैं.

अमेठी: वेद पुराण की कहानियों का नाता अमेठी जिले से भी जुड़ा है. यह हम नहीं, बल्कि अमेठी का इतिहास गवाही देता है. असुरराज हिरणकश्यप की पत्नी का अमेठी जिले से भी पुराना नाता रहा है. हिरणकश्यप की पत्नी कयाधु ने अमेठी जिले के गांव में घोर तपस्या की और देवी-देवताओं से पूजा-पाठ के बाद मनचाहा वरदान भी हासिल किया. आज भी इस ऐतिहासिक स्थल को लोग एक प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहर मानते हैं और यहां इतिहास समझने के साथ-साथ दर्शन पूजन और भ्रमण के लिए आते हैं.

कहानी है अमेठी जिले के मुसाफिरखाना तहसील क्षेत्र के नेवाडा और गुन्नौर गांव की, जहां का नाता असुराज की पत्नी कयाधु से जुड़ा हुआ है. कई सालों तक यहां पर कयाधु ने कठिन तपस्या की. जब प्रहलाद कयाधु के गर्भ में थे, तब भी उनकी सुरक्षा के लिए इसी जंगल में आकर पूजा पाठ किया. कयाधु ने ना सिर्फ प्रहलाद की सुरक्षा की, बल्कि देवर्षि नारद के साथ रहकर यहां पर वेद पुराण भी संरक्षित किया.

सच्चे मन से मांगी मन्नत होती है पूरी
मंदिर के पुजारी और इतिहास से जुड़े महंतस्वामी रामानुजाचार्य महाराज बताते हैं कि मंदिर काफी प्राचीन है और यहां पर सच्चे मन से मान्यता मांगने वाले भक्त की हर मुराद पूरी होती है. उन्होंने कहा कि देवताओं के राजा इंद्र भक्त प्रहलाद को मारना चाहते थे, उन्हें खतरा था कि राक्षसों के कुल में जन्म लेने वाला बच्चा राक्षसी होगा. लेकिन देवर्षि नारद ने उन्हें समझा-बुझाकर शांत किया, जिसके बाद उन्होंने यहीं पर हिरणकश्यप की पत्नी कयाधुं के साथ घोर तपस्या की. आज भी यहां पर जो भी सच्चे मन से मन्नतें मांगता है, वह पूरी होती है.

स्थानीय लोगों ने किया संरक्षित
रामानुजाचार्य महाराज ने आगे कहा कि इस मंदिर में वेद पुराण और कयालु से जुड़े कई साक्ष्य आज भी मौजूद हैं. वह वृक्ष भी मौजूद है, जहां पर उन्होंने तपस्या की. वह मंदिर भी मौजूद है, जहां उन्होंने पूजा पाठ किया. यहां बहुत कुछ है, जिसे इतिहास के रूप में आज यहां पर्यटन विभाग और स्थानीय लोगों ने मिलकर संरक्षित किया है.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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