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आज भी गूंजता है सदियों पुराना ये वाद्य यंत्र, जिसके बिना अधूरे हैं रजवाड़े ठाठ-बाठ! – News18 हिंदी

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राजस्थानी शादियों की शान: आज भी गूंजता है सदियों पुराना ये वाद्य यंत्र

 

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Rajasthan Traditional Musical Instruments: राजस्थान की रंगीली संस्कृति में संगीत का स्थान सर्वोपरि है, और यहाँ के पारंपरिक वाद्य यंत्र इस विरासत की रीढ़ हैं. आज के आधुनिक डीजे और लाउड म्यूजिक के दौर में भी, राजस्थानी शादियों में रावणहत्था, कामायचा, सारंगी और मोरचंग जैसे सदियों पुराने वाद्य यंत्रों की गूँज कम नहीं हुई है. विशेष रूप से मारवाड़ और शेखावाटी अंचलों में, मांगणियार और लंगा कलाकारों द्वारा बजाए जाने वाले इन यंत्रों के बिना शादी की रस्में अधूरी मानी जाती हैं. इन वाद्य यंत्रों का निर्माण स्थानीय लकड़ी, खाल और धात्विक तारों से किया जाता है, जो एक ऐसी अनूठी और मर्मस्पर्शी ध्वनि उत्पन्न करते हैं जो सीधे हृदय तक पहुँचती है. रेगिस्तान की रेतीली हवाओं के बीच जब इन यंत्रों की धुन गूँजती है, तो वह राजस्थान के गौरवशाली इतिहास और लोक गाथाओं को जीवंत कर देती है. पर्यटन और शादियों के बढ़ते ट्रेंड के कारण, ये प्राचीन वाद्य यंत्र न केवल अपनी पहचान बचाए हुए हैं, बल्कि नई पीढ़ी के बीच भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इनका संरक्षण राजस्थान की कला और कलाकारों के स्वाभिमान का प्रतीक है.



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