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गोंडा के प्रगतिशील किसान देवीदीन ने सहफसली खेती अपनाकर नई मिसाल कायम की है. उन्होंने एक ही खेत में लौकी और अरबी (घुइयां) की खेती कर कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाया है. लौकी की बेल ऊपर फैलती है जबकि अरबी जमीन के नीचे तैयार होती है, जिससे दोनों फसलें एक-दूसरे को नुकसान नहीं पहुंचाती. इस तकनीक से उन्हें दोहरी आमदनी मिल रही है और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है. लगभग एक बीघा खेत में की जा रही इस खेती से अब वह सालाना अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं.
गोंडा. जिले के एक किसान ने अपनी मेहनत और नई सोच से खेती में सफलता की नई कहानी लिख दी है. जहां ज्यादातर किसान एक समय में एक ही फसल उगाते हैं, वहीं इस किसान ने लौकी के साथ अरबी (घुइयां) की खेती कर अच्छी कमाई का रास्ता बना लिया है. अब उनकी यह खेती आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान प्रगतिशील किसान देवीदीन ने बताया कि पहले वह पारंपरिक खेती करते थे, जिसमें गेहूं और धान जैसी फसलें उगाई जाती थी. लेकिन बढ़ती लागत और कम मुनाफे के कारण उन्हें ज्यादा फायदा नहीं हो रहा था. इसके बाद उन्होंने खेती में कुछ नया करने का फैसला किया और लौकी के साथ अरबी की खेती शुरू की.
देवीदीन ने अपने खेत में ऐसी योजना बनाई कि एक ही खेत में दोनों फसलों का फायदा मिल सके. लौकी की बेल ऊपर फैलती है, जबकि घुइयां जमीन के नीचे तैयार होती है. इस वजह से दोनों फसलें एक-दूसरे को नुकसान नहीं पहुंचाती और खेत का बेहतर उपयोग हो जाता है. इससे किसान को एक ही जमीन से दो फसलों की आमदनी मिलने लगी.
इस खेती को क्या कहते हैं
देवीदीन बताते हैं कि इस खेती को सहफसली खेती कहा जाता है, इस खेती में जमीन पर दो या दो से अधिक फसल लगाए जाते हैं. एक ही लागत एक ही पानी एक ही देखाभल में दोनों फसल तैयार हो जाती है. यदि एक फसल खराब हो जाए तो दूसरी से इनकम हो जाती है.
साल भर बनी रहती है मांग
देवीदीन का कहना है कि लौकी की मांग बाजार में लगभग पूरे साल बनी रहती है. वहीं घुइयां भी एक ऐसी सब्जी है जिसकी अच्छी बिक्री होती है. दोनों फसलों से लगातार आमदनी होने लगी तो उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया. अब वह पहले के मुकाबले ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं. देवीदीन बताते हैं कि पहले हम पारंपरिक खेती करते थे, पानी संस्थान के कुछ अधिकारी ने आकर हमको आधुनिक खेती के बारे में जानकारी दी और हम इस समय लौकी के साथ अरबी की खेती करके सालाना लाखों की इनकम कर रहे हैं.
कितने बीघा में कर रहे हैं लौकी के साथ अरबी की खेती
देवीदीन बताते हैं कि लगभग एक बीघा में लौकी के साथ अरबी की खेती कर रहे हैं. भविष्य में इसको और आगे बढ़ाना है. एक बीघा खेती में लगभग चार से 5 हजार रुपए की लागत लगी है. फसल अच्छी है और मार्केट की रेट अच्छी रहे तो अच्छी खासी इनकम होने की उम्मीद है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें


