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Inzamam ul haq Aloo Incident: साल 1997 में ‘आलू’ कांड पर वकार यूनिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया. वकार के मुताबिक इंजमाम-उल-हक के गुस्से का असली कारण सिर्फ निजी अपमान नहीं, बल्कि भीड़ द्वारा भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन की पत्नी पर की गई अभद्र टिप्पणी थी. अपनी दोस्ती निभाने के लिए इंजमाम ने मर्यादा की दीवार लांघी और स्टैंड्स में जाकर दर्शक से भिड़ गए. यह घटना भारत-पाक खिलाड़ियों के बीच मैदान से परे गहरे आपसी सम्मान और भाईचारे की एक बेमिसाल मिसाल पेश करती है.
इंजमाम उल हक बैट लेकर दर्शक को मारने दौड़ पड़े.
नई दिल्ली. क्रिकेट की दुनिया में भारत और पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता हमेशा से सरहदों के तनाव और मैदान की गरमागरम जंग के लिए जानी जाती है. लेकिन, साल 1997 के ‘सहारा कप’ के दौरान टोरंटो (कनाडा) के मैदान पर एक ऐसी घटना घटी थी, जिसने खेल जगत को स्तब्ध कर दिया था. सालों तक दुनिया यही मानती रही कि पाकिस्तान के दिग्गज बल्लेबाज इंजमाम-उल-हक एक दर्शक पर सिर्फ इसलिए टूट पड़े थे क्योंकि उसने उन्हें ‘आलू’ कहा था. इस घटना के करीब 23-24 साल बाद पूर्व तेज गेंदबाज वकार यूनिस ने इस कहानी के पीछे का एक ऐसा मानवीय और भावनात्मक पहलू साझा किया, जिसने इस विवाद को पूरी तरह से एक नया मोड़ दे दिया. वकार के मुताबिक, वह गुस्सा सिर्फ अपने निजी अपमान के लिए नहीं, बल्कि भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन के सम्मान के लिए था.
वकार यूनिस (Waqar Younis) ने ‘द ग्रेटेस्ट राइवलरी’ पॉडकास्ट में बताया था कि उस दौर में भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच मैदान के बाहर गहरी दोस्ती थी. वकार ने कहा, ‘मैदान पर हम कड़ा मुकाबला करते थे, लेकिन मैदान के बाहर हमारा रिश्ता शानदार था. हम एक-दूसरे का बहुत सम्मान करते थे और एक-दूसरे के लिए खड़े रहते थे.उस दिन भीड़ में एक शख्स लगातार मोहम्मद अजहरूद्दीन (Mohammad Azharuddin) की पत्नी के बारे में अभद्र और अपमानजनक टिप्पणियां कर रहा था. इंजमाम उल हक (Inzmam ul haq) , जो अपनी शांत मिजाज के लिए जाने जाते थे, वह अपने दोस्त की पत्नी के खिलाफ की जा रही ‘बकवास’ को बर्दाश्त नहीं कर पाए.यह उनके लिए खेल से ऊपर उठकर मर्यादा और सम्मान की रक्षा का मामला बन गया था.
इंजमाम उल हक बैट लेकर दर्शक को मारने दौड़ पड़े.
जब इंजमाम ने बल्ला उठाया
घटना वाले दिन, पाकिस्तानी टीम फील्डिंग कर रही थी. वकार यूनिस ने बताया कि इंजमाम ने तत्कालीन कार्यवाहक कप्तान (सलीम मलिक) से अनुरोध किया कि उन्हें फाइन-लेग या थर्ड-मैन बाउंड्री के पास तैनात किया जाए. इंजमाम ने मन ही मन उस दर्शक को सबक सिखाने की योजना बना ली थी. इसके बाद जो हुआ, वह क्रिकेट इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया था. इंजमाम ने 12वें खिलाड़ी को आवाज लगाकर ड्रिंक्स नहीं, बल्कि अपना बल्ला मंगवाया. जैसे ही बल्ला उनके हाथ आया, इंजमाम बाउंड्री लाइन पार कर दर्शकों के बीच घुस गए. वह सीधे उस दर्शक की ओर दौड़े और स्कैफोल्डिंग पर चढ़कर उस शख्स पर हमला कर दिया.
40 मिनट तक रोकना पड़ा मैच
मैदान पर अफरा-तफरी मच गई. सुरक्षाकर्मी और अन्य खिलाड़ी हैरान थे. खेल को करीब 40 मिनट तक रोकना पड़ा. इंजमाम को अंततः सुरक्षा घेरे में बाहर निकाला गया. इस घटना के बाद इंजमाम-उल-हक पर दो मैचों का बैन लगाया गया. मामला सिर्फ खेल के मैदान तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा और अदालत में पेश होना पड़ा.यहां वकार ने अजहरूद्दीन की भूमिका की जमकर तारीफ की. उन्होंने बताया कि जिस शख्स (जो शायद भारतीय मूल का था) के साथ इंजमाम का झगड़ा हुआ था, उसे मनाने और मामला अदालत के बाहर सुलझाने के लिए खुद मोहम्मद अजहरूद्दीन सामने आए. अजहर ने उस दर्शक से बात की और उसे केस वापस लेने के लिए राजी किया. इंजमाम को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी. वकार कहते हैं, ‘यह देखना वाकई सुखद था कि कैसे अजहर ने अपने दोस्त को कानूनी पचड़ों से निकालने के लिए पहल की.’
खेल से बढ़कर इंसानियत
वकार यूनिस का यह खुलासा हमें याद दिलाता है कि भारत-पाकिस्तान मैच सिर्फ आंकड़ों और जीत-हार का खेल नहीं है. इंजमाम का वह गुस्सा भले ही अनुशासन के खिलाफ था, लेकिन उसके पीछे की प्रेरणा ‘दोस्ती’ और ‘सम्मान’ थी. आज जब हम 1997 की उस घटना को याद करते हैं, तो वह केवल ‘आलू’ वाले तंज के लिए नहीं, बल्कि इंजमाम की उस वफादारी के लिए याद की जानी चाहिए जो उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी कप्तान के लिए दिखाई थी. यह कहानी बताती है कि प्रतिद्वंद्विता के शोर में भी, खिलाड़ी एक-दूसरे की ढाल बनना जानते हैं.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें


