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एक साथ जली छह चिताएं, पति ने आखिरी बार भरा सिंदूर…कलेजा चीर देगा मिर्जापुर का ये सड़क हादसा

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Mirzapur Accident Ground Report : दो भाइयों में सिर्फ एक बेटी बची है. दादी का रो-रोकर हाल-बेहाल है. एक साथ छह चिताओं को जलता देखकर सभी की आंखों में आंसू आ गए. ड्रमंड गंज घाटी में हुए इस दर्दनाक हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है. बोलेरो सवार 8 लोग, आल्टो सवार एक, ट्रक ड्राइवर और खलासी ने जान गंवाई है. अरुण सिंह को बड़ी मन्नतों के बाद लड़का हुआ था. 7 साल बाद लड़का होने पर मैहर में मुंडन कराकर घर आ रहे थे, हादसा तभी हुआ.

मिर्जापुर. घर में मुंडन के बाद भोज की तैयारी चल रही थी. भोज की तैयारी के लिए पिता साथ में नहीं गए थे. 7 सालों की मन्नत के बाद लड़का पैदा हुआ था. हंसी-खुशी का माहौल था, लेकिन एक घटना ने पूरी दुनिया उजाड़ दी. दो भाइयों में सिर्फ एक बेटी बची है. दोनों भाइयों की पत्नी, दो बेटे और फूल सी गुड़ियां इस दुनिया से चली गईं. पिता कहते हैं कि रात में हादसे से पहले फोन किए थे. रिचार्ज के लिए पत्नी ने कहा था, लेकिन क्या पता था कि ऐसी घटना होगी. दादी का रो-रोकर हाल-बेहाल है. बार-बार बेहोश हो जा रही हैं. एक साथ छह चिताओं को जलता देखकर सभी की आंखों में आंसू आ गए.

ड्रमंड गंज घाटी में हुए इस दर्दनाक हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है. बोलेरो सवार 8 लोग, आल्टो सवार एक और ट्रक के ड्राइवर और खलासी ने जान गंवाई है. बोलेरो में एक ही परिवार के 7 लोग सवार थे. अरुण सिंह को बड़ी मन्नतों के बाद लड़का हुआ था. 7 साल बाद लड़का होने पर मैहर में मुंडन कराकर घर आ रहे थे. घर पर कार्यक्रम आयोजित था. भोज के लिए पिता जुटे हुए थे, लेकिन आधी रात जश्न मातम में बदल गया. अरुण सिंह खुद को कमरे में बंद कर ले रहे हैं. कह रहे हैं कि मैं भी गाड़ी में रहता तो उनके साथ ही चला जाता. पत्नी और बच्चों के बगैर मैं जीकर क्या करूंगा.

अनहोनी का ख्याल आया लेकिन…

अरुण सिंह के भाई प्रदीप सिंह बुलंदशहर में रहकर काम करते हैं. उन्होंने बताया कि रात्रि में 7:30 पत्नी को फोन किया था. उन्होंने हनुमान में होने की बात कहीं और मोबाइल में रिचार्ज कराने को लेकर कहा. हमने रिचार्ज कराने को लेकर बात कहकर फोन काट दिया. रात्रि में 8 के बाद दो बार पत्नी को फोन किया तो लगा नहीं. दो बार बेटे पर रिंग गई, लेकिन उठा नहीं. अनहोनी का ख्याल मन में आया, लेकिन अम्मा से बात होने पर उन्होंने कहा कि आधे घंटे में आ जाएगी तो निश्चिंत होकर सो गए. 25 से ज्यादा मिसकॉल पड़े हुए थे. 12 बजे रात नींद खुली तो घटना की जानकारी हुई, अब कोई चिराग जलाने वाला नहीं है.

आखिरी बार भरी मांग

प्रदीप सिंह ने आखिरी बार पत्नी के मांग में सिंदूर भरा. बार-बार वे बेसुध हो जा रहे थे, लेकिन लोगों ने पकड़कर मुखाग्नि दिलाई. गांव गमगीन है. घर में चूल्हे नहीं जले हैं. दो भाइयों के परिवार में सिर्फ मां, एक बेटी और दो भाई बचे हैं. बेटी पढ़ाई की वजह से बाहर थी, इसलिए शामिल नहीं हो सकी. गंगा घाट पर पहुंचे जनप्रतिनिधियों को आक्रोश का सामना करना पड़ा. ग्रामीणों ने 12 घंटे बीतने के बाद घर पहुंचने पर नाराजगी व्यक्त की.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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