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यह वाकया बेंसन एंड हेजेस विश्व कप सीरीज का है, जहाँ इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा था. वेस्टइंडीज को जीत के लिए आखिरी गेंद पर 3 रनों की जरूरत थी. क्रीज पर कॉलिन क्राफ्ट थे और इंग्लैंड की ओर से गेंदबाजी की कमान दिग्गज ऑलराउंडर इयान बॉथम के हाथों में थी. मैच के उस नाजुक मोड़ पर, इंग्लैंड के चतुर कप्तान माइक ब्रेयरली ने कुछ ऐसा किया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी.
1979 में इंग्लैंड के कप्तान माइक ब्रेयरली की चालाकी की वजह से बदले गए वनडे क्रिकेट के नियम
नई दिल्ली. क्रिकेट को ‘सज्जनों का खेल’ कहा जाता है, जहाँ खेल की भावना को अक्सर लिखित नियमों से ऊपर रखा जाता है लेकिन इतिहास में कुछ ऐसे क्षण आए हैं जब कप्तानों ने नियमों के दायरे में रहकर ऐसी रणनीतियाँ अपनाईं, जिन्होंने पूरे खेल के ढांचे को ही हिलाकर रख दिया. ऐसी ही एक घटना 1979 में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) पर घटी, जब इंग्लैंड के कप्तान माइक ब्रेयरली की एक ‘अजीबोगरीब’ फील्डिंग सेटिंग ने आईसीसी (ICC) को वनडे क्रिकेट के नियम बदलने पर मजबूर कर दिया.
यह वाकया बेंसन एंड हेजेस विश्व कप सीरीज का है, जहाँ इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा था. वेस्टइंडीज को जीत के लिए आखिरी गेंद पर 3 रनों की जरूरत थी. क्रीज पर कॉलिन क्राफ्ट थे और इंग्लैंड की ओर से गेंदबाजी की कमान दिग्गज ऑलराउंडर इयान बॉथम के हाथों में थी. मैच के उस नाजुक मोड़ पर, इंग्लैंड के चतुर कप्तान माइक ब्रेयरली ने कुछ ऐसा किया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी.
नियमों की ‘खिड़की’ का चतुराई से उपयोग
अंतिम गेंद पर 4 रन चाहिए और तब इंग्लैंड के कप्तान ने विकेटकीपर डेविड बेयरस्टो सहित अपने सभी 11 खिलाड़ियों को बाउंड्री लाइन पर तैनात कर दिया. उस समय वनडे क्रिकेट में फील्डिंग को लेकर आज जैसे कड़े नियम (Field Restrictions) नहीं थे. ब्रेयरली ने इस कानूनी खामी का फायदा उठाया. उनका तर्क सीधा था कि यदि सभी खिलाड़ी बाउंड्री पर होंगे, तो बल्लेबाज के लिए चौका मारना नामुमकिन हो जाएगा चूंकि वेस्टइंडीज को जीत के लिए 3 रन चाहिए थे, इसलिए एक बाउंड्री ही उन्हें जीत दिला सकती थी. आखिरी गेंद पर इयान बॉथम ने कॉलिन क्राफ्ट को बोल्ड कर दिया और इंग्लैंड ने वह मैच जीत लिया. तकनीकी रूप से ब्रेयरली ने कुछ भी गलत नहीं किया था, लेकिन इस रक्षात्मक रणनीति ने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी.
खेल भावना बनाम नियम
भले ही इंग्लैंड मैच जीत गया, लेकिन इस घटना की तीखी आलोचना हुई. आलोचकों और प्रशंसकों का मानना था कि विकेटकीपर को भी बाउंड्री पर खड़ा कर देना खेल की आक्रामक भावना के खिलाफ है. इसने खेल के मनोरंजन मूल्य को कम कर दिया था. मैदान पर मौजूद दर्शकों ने भी इस रक्षात्मक रवैये के लिए इंग्लैंड की टीम की हूटिंग की. इस घटना ने एक बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया. क्या जीत के लिए खेल की मर्यादा को ताक पर रखना सही है?आईसीसी का हस्तक्षेप और नए नियमों का जन्ममाइक ब्रेयरली की इस ‘ट्रिक’ ने आईसीसी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि भविष्य में खेल को एकतरफा रक्षात्मक होने से कैसे बचाया जाए. इसी विवाद के परिणामस्वरूप वनडे क्रिकेट में ‘फील्डिंग प्रतिबंध’ (Fielding Restrictions) की अवधारणा पेश की गई.
आया 4 फील्डर 30 गज के दायरे में रहने का नियम
इसके बाद नियम बनाया गया कि पारी के शुरुआती ओवरों में (पॉवरप्ले) और पूरी पारी के दौरान एक निश्चित संख्या में खिलाड़ियों को 30-गज के घेरे के अंदर रहना अनिवार्य होगा. साथ ही, विकेटकीपर की स्थिति को भी सुरक्षित किया गया कि वह स्टंप्स के पीछे ही रहेगा. निष्कर्ष1979 की वह घटना केवल एक मैच का हिस्सा नहीं थी, बल्कि आधुनिक वनडे क्रिकेट की नींव थी. माइक ब्रेयरली की उस विवादास्पद रणनीति ने भले ही उन्हें उस दिन मैच जिता दिया हो, लेकिन उसने क्रिकेट को हमेशा के लिए बदल दिया. आज हम जो पॉवरप्ले और आक्रामक फील्डिंग सेटिंग्स देखते हैं, वे उसी ऐतिहासिक विवाद की देन हैं, जिसने संतुलन बनाए रखने के लिए नियमों में बदलाव की राह दिखाई.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


