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1997 को कराची के नेशनल स्टेडियम में खेला गया यह मुकाबला ‘विल्स चैलेंज’ सीरीज का दूसरा वनडे था. पाकिस्तान की बल्लेबाजी के दौरान दर्शकों ने भारतीय फील्डरों पर तीन बार पत्थर फेंके. जब सौरव गांगुली को पत्थर लगा, तो कप्तान सचिन तेंदुलकर ने सुरक्षा का हवाला देते हुए टीम को मैदान से बाहर बुला लिया. हंगामे के कारण खेल 19 मिनट तक रुका रहा. इसके बाद मैच को 47 ओवर का कर दिया गया और भारत को 266 रनों का संशोधित लक्ष्य मिला जिसको भारत ने हासिल कर लिया.
1997 में पाकिस्तान के घर में घुसकर भारतीय टीम ने मैच जीता, कराची में राजेश चौहान ने रचा था इतिहास
नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर कुछ पल ऐसे होते हैं जो आंकड़ों से ऊपर उठकर जज्बात बन जाते हैं. कल्पना कीजिए सामने कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान, मैदान कराची का नेशनल स्टेडियम और चारों तरफ हजारों पाकिस्तानी फैंस का शोर. भारत को आखिरी ओवर में जीत के लिए चाहिए थे 8 रन. क्रीज पर नंबर 8 के बल्लेबाज राजेश चौहान और गेंद थामे दुनिया के नंबर 1 स्पिनर सकलैन मुश्ताक, जिनकी ‘दूसरा’ उस वक्त अच्छे-अच्छे बल्लेबाजों के पसीने छुड़ा रही थी.
यह मैच केवल एक छक्के के लिए नहीं, बल्कि मैदान पर हुए भारी हंगामे और तनाव के लिए भी जाना जाता है. 30 सितंबर 1997 को कराची के नेशनल स्टेडियम में खेला गया यह मुकाबला ‘विल्स चैलेंज’ सीरीज का दूसरा वनडे था. पाकिस्तान की बल्लेबाजी के दौरान दर्शकों ने भारतीय फील्डरों पर तीन बार पत्थर फेंके. जब सौरव गांगुली को पत्थर लगा, तो कप्तान सचिन तेंदुलकर ने सुरक्षा का हवाला देते हुए टीम को मैदान से बाहर बुला लिया. हंगामे के कारण खेल 19 मिनट तक रुका रहा. इसके बाद मैच को 47 ओवर का कर दिया गया और भारत को 266 रनों का संशोधित लक्ष्य मिला.
वो करिश्माई ओवर और कराची का वो ‘थप्पड़’
कराची का वो माहौल भारत के लिए किसी अभेद्य किले जैसा था, जहां जीत की उम्मीद कम ही लोग कर रहे थे. सकलैन की पहली ही गेंद पर राजेश चौहान ने वो किया जिसकी कल्पना खुद सकलैन ने भी नहीं की थी. चौहान ने आगे बढ़कर एक गगनचुंबी छक्का जड़ा और पूरा कराची स्टेडियम जैसे किसी गहरे सदमे में डूब गया. यह सिर्फ एक छक्का नहीं था, बल्कि पाकिस्तानी घमंड और उनकी गेंदबाजी की बादशाहत पर एक करारा प्रहार था.
चौहान की चतुराई
अगली गेंद पर चौहान ने समझदारी दिखाई और एक रन लेकर स्ट्राइक रॉबिन सिंह को दे दी. रॉबिन सिंह ने बिना किसी गलती के विजयी रन बनाया और भारत ने पाकिस्तान को उसके घर में धूल चटा दी. नंबर 8 के बल्लेबाज द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ स्पिनर की पहली ही गेंद पर छक्का मारना पाकिस्तान के लिए किसी ‘थप्पड़’ से कम नहीं था. राजेश चौहान का वह एक शॉट आज भी हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी के जेहन में ताजा है वो पल जब ‘अनहोनी’ को ‘होनी’ में बदल दिया गया था.
गांगुली की शानदार पारी
सौरव गांगुली इस मैच के असली हीरो थे उन्होंने 89 रनों (96 गेंद) की बेहतरीन पारी खेली और गेंद से भी कमाल करते हुए 10 ओवर में केवल 39 रन दिए. उन्हें ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया. एक समय भारत मजबूत स्थिति में था, लेकिन अचानक 26 रनों के भीतर 4 विकेट गिर गए. इसके बाद रॉबिन सिंह (31)* और सबा करीम (26) ने 62 रनों की साझेदारी कर भारत को संभाला. अंतिम ओवरों में गेंद खराब होने के कारण अंपायरों ने पाकिस्तान को बिल्कुल नई गेंद दी थी. सकलैन मुश्ताक को नई गेंद से ग्रिप बनाने में मुश्किल हो रही थी, जिसका फायदा राजेश चौहान ने उठाया. राजेश चौहान के छक्का मारते ही पूरे स्टेडियम में सन्नाटा छा गया था. भारत ने यह मैच 3 गेंद शेष रहते 4 विकेट से जीता और सीरीज 1-1 से बराबर की.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


