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Mukul Chouidhary: 21 वर्षीय मुकुल तनावपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए बल्ले से अपनी लय नहीं बना पाए. कप्तान ऋषभ पंत ने आखिरकार एलएसजी को जीत दिलाई और विजयी शॉट लगाने के बाद मुकुल का हौसला बढ़ाने की कोशिश की. मुकुल के पित दलीप खुद एक क्रिकेटर थे, लेकिन उन्होंने अपने गांव में ही स्थानीय टूर्नामेंट खेले. 2011 वनडे विश्व कप के बाद जब एमएस धोनी ने विजयी छक्का मारा, तो वह माही के फैन बन गए.
अपने पिता के साथ मुकुल चौधरी
मेजबान कोलकाता नाइटराइडर्स के खिलाफ 9 अप्रैल की रात मुकुल चौधरी सिर्फ गेंदबाजों का सामना नहीं कर रहे थे बल्कि अपने परिवार को कठिनाइयों से उबार रहे थे. चाहे उनके पिता द्वारा घर बेचना हो, या किसी अच्छे क्रिकेट अकादमी को ढूंढने का संघर्ष या सूदखोरों का बार-बार आना-जाना, या उनके पिता का जेल जाना, उनका सफर आसान नहीं था.
भले ही सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ लखनऊ सुपर जायंट्स के दूसरे मैच में यह 21 साल का मुकुल तनावपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए बल्ले से अपनी लय नहीं बना पाए, लेकिन कोलकाता नाइटराइडर्स के खिलाफ उनका बल्ला जमकर बोला. ये दाएं हाथ का बल्लेबाज जब 27 गेंद में नाबाद 54 रन बनाकर डगआउट की ओर लौट रहा था. उसी वक्त राजस्थान के झुंझुनू में दलीप चौधरी डबडबाईं आंखों से पूरा वाकया टीवी पर देख रहे थे.
मुकुल चौधरी राजस्थान के झुंझुनू जिले के खेदारो की धानी नामक एक छोटे से गांव से आते हैं. जब एलएसजी ने नीलामी में उन्हें 2.60 करोड़ रुपये में खरीदा, जो उनके बेस प्राइस से 13 गुना से भी ज्यादा था तो उन्होंने अपने पिता से वादा किया था कि जल्द से जल्द आपके सारे लोन-कर्ज चुका दूंगा. सच तो ये है कि आज अगर मुकुल क्रिकेटर बन पाए तो उसमें उनके पिता दलीप का बड़ा हाथ है.
2003 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद, उसी साल मेरी शादी हुई और मेरा सपना था कि अगर मेरा बेटा हुआ, तो वह क्रिकेट खेलेगा. अगले ही साल मुझे एक पुत्र का आशीर्वाद मिला और बहुत छोटी उम्र से ही मैंने ठान लिया था कि मैं उसे क्रिकेटर बनाने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा. जब इतने सारे लोग बनते हैं तो मेरा बेटा क्यों नहीं?
छह साल तक दलीप चौधरी ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी की, लेकिन परीक्षा पास नहीं कर सके फिर उन्होंने रियल एस्टेट के कारोबार में कदम रखा, जो भी असफल रहा. 2016 में एक अच्छी क्रिकेट अकादमी की तलाश में पिता और पुत्र अपने घर से लगभग 70 किलोमीटर दूर सीकर स्थित एसबीएस क्रिकेटहब पहुंचे. उन्होंने बताया:
जब मैंने उसका दाखिला कराया, तो मुझे एहसास हुआ कि मेरे पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं. नियमित आय न होने के कारण मैंने अपना घर बेचने का फैसला किया. मुझे 21 लाख रुपये मिले. मैंने खरीदार से पूरी रकम मेरे खाते में ट्रांसफर करने को कहा ताकि सब कुछ रिकॉर्ड में रहे. अगले साल मैंने एक होटल शुरू किया और एक और लोन ले लिया. हां, मैं किश्तें समय पर चुकाने में असफल रहा. मैं जेल भी गया, लेकिन मैंने कभी धोखाधड़ी नहीं की. मेरे रिश्तेदारों ने मुझे छोड़ दिया. उन्होंने मुझे पागल कहा. कहते थे खुद की जिंदगी बर्बाद कर दी, अब अपने बेटे को बख्श दे. इन बातों से मेरा परिवार और भी मजबूत हो गया. उन कठोर शब्दों ने मुझे और भी दृढ़ बना दिया कि मैं सही रास्ते पर हूं.
चौधरी ने कोलकाता में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद पत्रकारों से कहा, ‘मुझे हमेशा धोनी का मैच खत्म करने का तरीका पसंद आया है. वह यॉर्कर पर भी छक्का मार सकते हैं. जब आप इस तरह की गेंद पर छक्का मार सकते हैं, तो गेंदबाज को अलग तरह से सोचना पड़ता है.’
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अंशुल तलमले फरवरी 2025 से नेटवर्क18 ग्रुप में डिप्टी न्यूज एडिटर की जर्सी पहनकर स्पोर्ट्स डेस्क की कप्तानी कर रहे हैं. जबरदस्त स्ट्राइक रेट के साथ पिछले एक दशक से उनकी नाबाद पारी जारी है. अपनी ऑलराउंड क्षमता के…और पढ़ें


