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कृणाल ने कहा, ‘अब रन-अप शुरू करने से पहले ही सोचना पड़ता है कि गेंद कहां डालूं, क्योंकि लगता है बल्लेबाज हर गेंद को छक्के के लिए मारेंगे.’ उन्होंने कहा, ‘इसी वजह से मैंने बाउंसर को अपने खेल में शामिल किया. हालांकि, मैं प्रैक्टिस सेशन में बाउंसर का ज्यादा अभ्यास नहीं करता, क्योंकि इसमें मेहनत लगती है
क्रुणाल पांड्या ने क्यों बाउंसर को अपनी बॉलिंग का बनाया अहम हथियार
नई दिल्ली. दिल्ली को उसी के मैदान पर ध्वस्त करने के बाद रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के ऑलराउंडर कृणाल पंड्या ने कहा कि आईपीएल के पिछले दो सीजन में उनकी गेंदबाजी में जो बदलाव आया है, उसका श्रेय टीम के स्पिन गेंदबाजी कोच मलोलन रंगराजन को जाता है. उन्होंने कहा कि रंगराजन के भरोसे से उन्हें नए प्रयोग करने की आजादी मिली. दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ सोमवार को टीम की 6.3 ओवर में नौ विकेट से बड़ी जीत के बाद कृणाल ने कहा कि उन्हें विकेट लेने की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे वह खुलकर नए प्रयोग कर सकते हैं.
आरसीबी ने कैपिटल्स को सिर्फ 75 रन पर आउट करने के बाद 81 गेंद बाकी रहते मैच जीत लिया. इस आईपीएल में अपनी तेज बाउंसर गेंदों से बल्लेबाजों को परेशान करने वाले कृणाल ने कहा, ‘हमारे स्पिन बॉलिंग कोच मलोलन रंगराजन को भी काफी श्रेय जाता है. जब मैं आरसीबी में आया, तो मेरी भूमिका बदल गई. मुझे विकेट लेने और प्रयोग करने की आजादी मिली.
बाउंसर फेंकने की रणनीति
कृणाल ने कहा, ‘अगर कोच आप पर विश्वास जताता है और आत्मविश्वास देता है, तो उसका असर पड़ता है. मुझे विकेट लेने की जिम्मेदारी पसंद आने लगी है और मैं अपने नए प्रयोग आजमाना चाहता हूं. मैं सिर्फ दिखावे के लिए बाउंसर नहीं डालता, इसके पीछे ठोस सोच और योजना होती है.’ उन्होंने कहा, ‘पिछले साल आरसीबी के साथ मेरा सीजन अच्छा रहा. मैं सोच रहा था कि अपने खेल में क्या नया जोड़ूं, ताकि मानसिक रूप से बल्लेबाज से एक कदम आगे रह सकूं. इसी वजह से मैंने बाउंसर और लो-आर्म ट्राजेक्टरी वाली गेंद डालना शुरू किया.’ कृणाल की यह रणनीति बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ भी कारगर रही है.
बल्लेबाज देखकर वैरिएशन का इस्तेमाल
कृणाल ने कहा, ‘लेफ्ट हैंड बल्लेबाजों के खिलाफ लेफ्ट आर्म गेंदबाजों के इस्तेमाल को लेकर काफी चर्चा होती है. मैंने इसे चुनौती के रूप में लिया और अब तक यह मेरे लिए अच्छा रहा है.’ कृणाल ने कहा, ‘अब रन-अप शुरू करने से पहले ही सोचना पड़ता है कि गेंद कहां डालूं, क्योंकि लगता है बल्लेबाज हर गेंद को छक्के के लिए मारेंगे.’ उन्होंने कहा, ‘इसी वजह से मैंने बाउंसर को अपने खेल में शामिल किया. हालांकि, मैं प्रैक्टिस सेशन में बाउंसर का ज्यादा अभ्यास नहीं करता, क्योंकि इसमें मेहनत लगती है. मैं खुद को फिट रखने के लिए इसे मैच में ही इस्तेमाल करता हूं.’ इस 35 साल के गेंदबाज ने कहा, ‘स्पिनर के लिए बाउंसर डालना आसान नहीं है. इसके लिए फिटनेस बहुत जरूरी है, क्योंकि कम रन-अप में इतनी स्पीड लाना मुश्किल होता है.
विराट फिटनेस कल्चर के लीडर
कृणाल ने इस मौके पर विराट कोहली को आईपीएल में 9000 रन पूरे करने की बधाई भी दी. कोहली 15 गेंद में नाबाद 23 रन की पारी के दौरान इस लीग में 9000 रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज बने. उन्होंने यह कारनामा 275 मैचों और 267 पारियों में 40.05 की औसत और नौ शतक की मदद से किया. कृणाल ने कहा, ‘कोहली अब तक के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक हैं. पिछले 15–20 साल में उन्होंने जो हासिल किया है, वह कमाल है. उनकी निरंतरता और जीत की भूख वाकई तारीफ के काबिल है. इतने लंबे समय तक इस स्तर पर लगातार अच्छा खेलना बहुत खास है.’ कृणाल ने कहा कि कोहली ने भारतीय क्रिकेट में फिटनेस की सोच को पूरी तरह बदल दिया है. उन्होंने कहा, ‘कोहली ने लोगों के खेल को देखने का नजरिया फिटनेस के हिसाब से बदल दिया है. वह भारत में फिटनेस कल्चर के लीडर रहे हैं.’
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


