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Baba Bhumisen Temple Shahjahanpur : शाहजहांपुर के नाहिल गांव में बाबा भूमिसेन का 500 साल पुराना मंदिर आस्था और न्याय का केंद्र है. मान्यता है कि यहां झूठी कसम खाने वाले का सर्वनाश निश्चित है. जब पुलिस और कचहरी किसी विवाद को नहीं सुलझा पाते, तो लोग यहां आकर न्याय की गुहार लगाते हैं. मंदिर में होने वाले फैसलों को दिव्य शक्ति का आशीर्वाद माना जाता है. लोकल 18 से मंदिर के पुजारी शिवकरण मिश्रा बताते हैं कि इस दिव्य स्थान का निर्माण करीब पांच शताब्दियों पूर्व गांव के ही निवासी मूलाशाह ने करवाया था.
शाहजहांपुर जिले के नाहिल गांव में स्थित बाबा भूमिसेन का यह प्राचीन मंदिर अपनी चमत्कारिक शक्तियों के लिए पूरे क्षेत्र में विख्यात है. यहां की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लोग यहां दर्शन के साथ-साथ सत्य की परीक्षा देने भी आते हैं. स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है कि मंदिर की चौखट पर पैर रखकर बोला गया झूठ कभी खाली नहीं जाता और अपराधी को उसकी सजा ईश्वरीय विधान के अनुसार तत्काल मिल जाती है.

मंदिर के पुजारी शिवकरण मिश्रा बताते हैं कि इस दिव्य स्थान का निर्माण करीब पांच शताब्दियों पूर्व गांव के ही निवासी मूलाशाह ने करवाया था. मंदिर परिसर में आज भी वह ऐतिहासिक कुआं मौजूद है जो निर्माण काल के समय खोदा गया था. यहां न केवल बाबा भूमिसेन का वास है बल्कि मां अन्नपूर्णा, प्राचीन शिवलिंग और अर्धनारीश्वर की अत्यंत मनमोहक और चमत्कारी प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो भक्तों की श्रद्धा बढ़ाती हैं.

इस मंदिर की ख्याति का मुख्य कारण यहां होने वाला ‘न्याय’ है. मंदिर पुजारी के अनुसार, कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं जिनका समाधान लंबी कानूनी प्रक्रिया या पुलिस जांच के बाद भी नहीं निकल पाता है. ऐसे में दोनों पक्ष आपसी सहमति से मंदिर की शरण में आते हैं. यहां पंचायत बैठती है और बाबा की प्रतिमा के समक्ष सत्य बोलने की शपथ ली जाती है जिसे कोई नहीं तोड़ता है.
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पुजारी शिवकरण मिश्रा का दावा है कि यहां जो भी व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए झूठी कसम खाता है, उसका विनाश तय होता है. इतिहास में ऐसी कई घटनाएं दर्ज हैं जहां लोगों ने बाबा को चुनौती देने की कोशिश की और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा. यह डर ही है कि लोग यहां आकर सच बोलने के लिए मजबूर हो जाते हैं और बड़े से बड़े विवाद पल भर में सुलझ जाते हैं.

पुजारी शिवकरण मिश्रा ने एक खौफनाक आपबीती साझा करते हुए बताया कि उनके एक रिश्तेदार ने चोरी के मामले में खुद को निर्दोष बताते हुए मंदिर में झूठी कसम खाई थी. कसम खाने के महज आठ दिनों के भीतर ही उस व्यक्ति की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई. इस घटना के बाद से गांव और आसपास के इलाकों में मंदिर की न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों का खौफ और सम्मान और बढ़ गया.

मंदिर की परंपरा के अनुसार, जब कोई विवाद यहां आता है, तो दोनों पक्षों के बीच सुलह का प्रयास किया जाता है. फैसले के बाद उन्हें बाबा भूमिसेन की कसम खिलाई जाती है. एक बार कसम खा लेने के बाद कोई भी पक्ष उस वादे से मुकरने की हिम्मत नहीं करता है. लोगों का मानना है कि कोर्ट की सजा से तो बचा जा सकता है, लेकिन बाबा की सजा से बचना नामुमकिन है.

यह मंदिर वास्तुकला और प्राचीनता का भी बेजोड़ नमूना है. दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि यहां की हवा में एक अलग ही अनुशासन और सत्य की गूंज महसूस होती है. अर्धनारीश्वर और प्राचीन शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं, लेकिन गलत मंशा लेकर आने वालों के लिए यह स्थान किसी बड़ी चेतावनी से कम नहीं माना जाता है.

आज के आधुनिक युग में जहां लोग अदालतों के चक्कर काटते-काटते थक जाते हैं, वहां नाहिल का यह बाबा भूमिसेन मंदिर एक वैकल्पिक न्याय व्यवस्था का प्रतीक बना हुआ है. यह मंदिर इस पुरानी कहावत को चरितार्थ करता है कि ईश्वर के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं. यहां का हर पत्थर और हर कसम इंसान को नेक और ईमानदार बनने की प्रेरणा और चेतावनी देती रहती है.


